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कैसे मैं शृंगार लिखूँ कैसे मैं शृंगार लिखूँ, जब के पाकीज़ा हुस्न बहकता हैं...
राजन का मन जैसे कर रहा था वो वैसे त्रिशा को इधर उधर धक्का दे रहा था। उसे मार रहा...
राठौर मेंशन के गेट से बाहर निकलते ही, आर्यन ने गाड़ी की खिड़की का शीशा थोड़ा नीचे क...
इधर जानवी पुलिस स्टेशन पहूँच जाती है और अंदर चली जाती है जहां पर इंस्पेक्टर विक्...
हास्पिटल के बहार..एक बैंच पर बैठी थी राधा मां के आने का इंतजार कर रही थी।मां ने...
भुतिया हवेली की कहानीप्रस्तावनाबिहार के एक छोटे से गाँव में एक पुरानी हवेली थी।...
अब आगे,संयम ने गन चला दी। वहीं अनहिरा जिसकी आंखे बंद थी उसे कुछ फील नहीं हुआ। जि...
उसकी काली आँखों की चमक अँधेरे में तैर रही थी। उसने फुसफुसाया था—“इस बार… मैं वो...
यह कहानी “मैं दादा-दादी की लाड़ली” का तीसरा अध्याय है।यह अध्याय उस मासूम एहसास क...
एपिसोड: 'विरासत का विष और अदृश्य शत्रु'खन्ना मेंशन की सुबह आज पहले जैसी...
मंगलाचरण: एक रहस्यमयी आकृति गर्मी की दोपहर हो या सर्दियों की गुनगुनी धूप, मोहल्ले की उस २० फुट चौड़ी सड़क के बाएं कोने पर एक 'अजूबा' हमेशा मौजूद रहता है। दूर से देखने वा...
योगेश और संगीता का घर जगमगा रहा था। सुंदर बिजली की लड़ियाँ मानो बार-बार खिलखिला कर हँस रही थीं। आने-जाने वालों का मन मोहने वाली इस घर की सुंदरता में ताज़े फूलों की ख़ुशबू अपनी उपस्...
आठ वर्ष पूर्व :- दूसरे दिन प्रात: ब्राह्म मुहूर्त से ही सेलेना की योग साधना प्रारंभ होनेवाली थी। सेलेना को रात्री भर निद्रा नहीं आई। कारण यह नहीं था कि पहाड़ पर सभी सुख सुविधा का...
सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है। आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा। कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...
ब्लैक फॉर्मल ड्रेस में सजी हुई, आँखों पर ब्लॉक गॉगल्स लगाए, अर्शित रॉय—शहर का जाना माना, प्रसिद्ध और ताकतवर C.E.O—ऑफिस के दरवाज़े से बाहर निकला। उसके हर कदम में उच्चस्तरीय आत्मविश्...
यशस्विनी 21वीं सदी में महिलाओं की बदलती भूमिकाविषय पर एक आलेख लेखन में व्यस्त है।अपने लैपटॉप पर हेडफोन से वॉइस टाइपिंग करने केसमय वह कई बार भावनाओं में डूबती- उतरती रही। उसने यह मह...
मित्रों ! प्रणाम जीवन की गति बहुत अदभुत है | कोई नहीं जानता कब? कहाँ?क्यों? हमारा जीवन अचानक ही बदल जाता है ,कुछ खो जाता है ,कुछ तिरोहित हो जाता है |हम एक आशा की प्रतीक्षा में खड़े...
इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है इसका किसी जीवित, जंतु, मानव संसाधन से कोई लेना देना नही है अगर ऐसा होता है तो ये मात्र एक सयोग होगा ,,, जय हिन्द, इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क...
में और मेरे अहसास भाग-१ *** ईश्क में तेरे जोगन बन गई lआज राधा जोगन बन गई ll *** गरघर कीदीवार केकर्णहोतेकोई घरखड़ाना होता ll *** काटे नहीं कटता एक पल यहां lकैसे कटेगी एक उम्र भला यहा...
इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की.... शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है। क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें? तुम उठकर क्यों चली आई मुझे ब...
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