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आपके दिए गए शीर्षक में अपार संभावनाएँ हैं। यह एक प्रेरणादायक, रहस्यपूर्ण और दार्...
एपिसोड 42: समाधि की गहराई और अंधेरे का पुनर्जन्म---शहर की बेचैनीसमाधि की गहराई स...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 41: रक्त का रहस्यबर्फ़ीली हवाएँ प्रतिध्वनि...
---------------रूद्रिका अपने कमरे मे चहल कदमी कर रही थी। उसका चेहरा तमतमाया हुआ...
अध्याय 4 — पहला इंकाररुहिका ने अपनी पहली कहानी पूरी की तो उसे लगा जैसे उसने अपने...
अब आपको पता ही होगा कि दृष्टि के पिता मोहनलाल को उसकी पढ़ाई और उनके झुठ के बारे...
**भाग तीन: फ़ासले दिलों के**अगले दिन की दोपहर बेहद उमस भरी थी। आसमान में मटमैले...
यजुर्वेद सूक्ति (3) की व्याख्या परिमाग्ने दुश्चरिताद बाधस्व"यजुर्वेद--4/28भावार्...
(कंक्रीट के गिरने की भयानक आवाज़ें, अलार्म की तीखी चीखें, और रंजना की पागलों जैस...
*इल्म का नूर - क़ुरान और इल्म की फ़ज़ीलत**अस्सलामु अलैकुम,*आज हम बात करेंगे *इल्...
भारतीय रंगमंच प्रायः सभी भारतीय एवं पाश्चात्य विद्वान संस्कृत नाटक और रंगमंच का धार्मिक भूमि से उदय और विकास मानते हैं । अकेले प्रोफेसर जागीरदार हैं, जिन्होंने कि इन सारे धार्मिक व...
आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के कच्छ सेंटर जहाँ मैं अपने अति उत्साही कार्यकर्ताओं के साथ एक बड़े से हॉल में जमीन पर बिछी लाल- काली धारी वाली दरी पर बैठी हूँ। आने वाले दो दिवसीय। श्री श्री...
आज धूप बहुत तेज़ है, चला भी नहीं जा रहा है। प्रेमलता उसका नहर के किनारे इंतज़ार कर रही होगी। यहीं सब सोचते हुए सुयश मोहन के कदमों की गति बढ़ती गई। जब नहर के पास पहुँचा तो उसने देखा कि...
सीढ़ियों से ऊपर की ओर भागती हुई एक लड़की रोती जा रही थी। ना ही उसे होश था ना ही आँसू रुक रहे थे। कॉरिडोर से होते हुए वोह एक कमरे में जा पहुँची। कमरे में दाखिल होते ही उसने अपने पीछ...
उनके बहुचर्चित उपन्यास ‘हज़ार चौरासी की माँ’ में एक ‘माँ’ सुजाता की मर्मस्पर्शी कहानी के साथ-साथ साथ 1970 के दशक के बंगाल मे नक्सलवाद आंदोलन मे हो रहे हिंसक संघर्ष की कहानी भी समान...
समर गढ़ का असीम साम्राज्य।उसके वजीर शादाफ सींग की हवेली मे आज सुबह से कुछ ज्यादा ही हड़बड मची हुई थी।उसने धीरे से अपनी आंखे खोली, " हे भगवान अभी भी यही फसी हुई हू। पता नहीं कब...
"तुम से वो थी , आज वो है अजनबी है लिखी जा चुकी बात ये है अनकही, दर्द से अलग हुई, खौंफ में दफन हुई, प्यार से रंगी जो थी खून से अलग हुई, बात वो हो चुकी इस जनम उस जनम, लौट कर आ रह...
कहानी में दिखाई देने वाले सभी पात्र काल्पनिक हैं, जीवित या मृत किसी भी वास्तविक व्यक्ति से कोई भी समानता विशुद्ध रूप से संयोग है। राधे राधे || आप लोगो ने कहानी का शीर्षक तो देख ल...
जोया माथे को हाथ लगा कर basketball hall के stairs पे बैठी थी। उपर से माया stairs उतरते हुए आई और उसने कहा, “जोया, चल ये books renew करनी हैं...” जोया के face को देख...
(दृश्य - एक घर की लॉबी का दृश्य है जहां पर हवन किया जा रहा है । छोटा सा हवन कुंड है, उसके आसपास सीमा , राजन और परी खड़े हुए हैं ; एक तरफ चार कुर्सियां पड़ी हुई है । ) पर्दा खुलता ह...
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