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एक कर्तव्य ऐसा भीस्वामी हरि प्रपन्नाचार्य हरिद्वार में वैष्णव सम्प्रदाय के प्रसि...
जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 22 और तभी दूसरी तरफ सिड़यो पेअचानक वह आंटी मेघना के...
इधर पि के रुद्रा को जवाब देते हूए कहता है । पि के :- ह..हां पर तुम्हें पि...ई......
Black magic या काला जादू एक प्राचीन मान्यता है, मनुष्य समाज में रहता है, तो समाज...
देख रहे हो आर्यमन, कैसे तुम्हें फंसाने के लिए इन लोगों ने पूरा बाजार सजा रखा है?...
कोर्टरूम में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था।सभी की निगाहें जज की तरफ थीं।जज ने अपनी फा...
बेनकाब सच और तड़पउस रात के बाद से रॉयल कॉर्पोरेशन का माहौल पूरी तरह बदल चुका था।...
शिक्षा नहीं, मनुष्य निर्माणविज्ञान, विद्या और चेतना का समन्वयआज मानव सभ्यता अपने...
शहर की रंगीन रोशनियाँ भाग – 03 (यादों के उस पार) ️ Written by H. K. Bhar...
श्रावण की एकादशीएक समय की बात है। किसी गाँव में चार दोस्त थे - अजय, विजय, संजय औ...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
एक घर… जो गहरे अंधेरे में डूबा था। चारों तरफ़ एक भयावह सन्नाटा पसरा हुआ था। सिर्फ़ घड़ी की टिक-टिक… टिक-टिक… उस सन्नाटे को चीर रही थी। घर के एक कोने में एक ग्यारह साल की बच्ची...
खिड़की खुली जरा, जरा परदा सरक गया बहोत ही खबसूरत सा गाना सोनू नीगम का गाया हुआ रेडिओ पर बज रहा था और तभी रोडपर हंगामा हो गया. कोई राह चलता हुआ युवक एक महिला से टकरा गया जो सब्जीमंड...
यह कहानी एक काल्पनिक सुपरहीरो से प्रेरित है, लेकिन इसके किरदार और जज़्बात पूरी तरह से मौलिक हैं।" लेखक _समीर खान क़िस्त 1: शिकागो की ठंडी धूप शिकागो की शाम और ऊपर से गिर...
लोग कहते हैं कि जीवन में पैसा ही सब कुछ होता है। यह बात मैं नहीं कहता—मेरे आसपास के सभी लोग कहते हैं। बचपन से ही मैं यह सुनता आया था कि अगर आपके पास पैसा हो, तो जीवन की हर चीज आसान...
अक्सर आपके मन में एक सवाल आता होगा कि आख़िर में क्षत्रिय में क्यों पैदा हुआ? या ब्राह्मण परिवार में क्यों पैदा हुआ उसका आख़िर मुझे क्या फ़ायदा? इससे तो अच्छा मैं किसी भी जाति म...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
त के ठीक 12 बजे…सड़क सुनसान थी… हवा में अजीब सी ठंडक घुली हुई थी… रिद्धि सिंह अपनी scooty पर घर लौट रही थी। हेलमेट के अंदर उसकी सांसें तेज़ चल रही थीं, जैसे उसे खुद नहीं पता कि वो...
दोपहर के तीन बज रहे थे। जून की इस चुभती हुई गर्मी में ऐसा लग रहा था मानो आसमान से आग बरस रही हो। दुकान इतनी छोटी थी कि वहां ढंग से खड़े होने की भी जगह नहीं थी, ऊपर से पुरानी किताबो...
बात उन दिनों की है जब मेरी नई नई शादी हुई थी। मेरे पिता जी अपनी ड्यूटी के चक्कर में पड़े हुए थे, अतः उनका हमारे परिवार की ओर ध्यान लगभग कम ही था अतः हमारा सयुंक्त परिबार दादीअम्मा...
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