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बर्बाद इश्कएपिसोड 5 — जब खेल शुरू हुआमुंबई की सुबह फिर आई।लेकिन आज तीन अलग-अलग ज...
कहते हैं कुछ कहानियाँ सिर्फ लिखी नहीं जातीं. वो महसूस की जाती हैं.ये कहानी है सन...
रितांश के हाथ काँप रहे थे। डायरी के पन्ने एक-एक करके खुल रहे थे। हर पन्ने के साथ...
रोशनी का हाथ जैसे ही अपनी पीठ की ओर गया, उसका दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया। उ...
COLLEGE EXAM HALL – DAYExam hall में चुप्पी थी। Students अपने-अपने seats पर बैठे...
### **पॉकेट में जितना ज्यादा माल, घरवाली के उतने ज्यादा गुलाबी गाल** संडे की अलस...
लेखिका: शालिनी गौतमआज की नारी किसी परिचय की मोहताज नहीं है। वह शिक्षा, विज्ञान,...
एक छोटी-सी विनती अगर मेरी इस कहानी में कोई गलती रह जाए, तो कृपया मुझे माफ़ कर दी...
भाग 1: दुनिया का सबसे दर्दनाक आरम्भअमन — हर घर का बच्चाघर एक मामूली-सा घर था — द...
बात सन 1869 की है जब द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो चुका था शीत युद्ध का दूर था ए...
देवक़ेड़ा का रहस्य छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहाँ बसा...
" इंस्पेक्टर मैं सच कह रही हूँ। उस दिन मेरे घर पार्टी में लगभग 110 लोग आए थे। सभी मेरे दोस्त थे। खाने में चिकन करी, फिश करी और अंडा करी तीनों ही थीं। कुछ लोग चिकन नहीं खाते थे,...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
कोलकाता: गुनाह का काला जश्न कोलकाता की वह रात आम रातों जैसी नहीं थी। 'द वेलवेट अंडरग्राउंड' नाइट क्लब के बाहर महंगी गाड़ियों का काफिला लगा था, और अंदर—शहर की चकाचौंध अ...
यह कहानी बहुत समय पहले की है ... करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले की ................ नेपाल के सरहद से सटा भारत में एक छोटा सा गाँव था विष्णुपुर । इसी गाँव के ठीक बीचोबीच बने कु...
सुबह का समय था…हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी…मंदिर की घंटियों की मधुर आवाज़ पूरे माहौल को पवित्र बना रही थी…राधा-कृष्ण के मंदिर में आज कुछ खास शांति थी…उसी मंदिर के दरवाज़े पर एक...
एक दिन उनके राज्य में एक भिखारी आ पहुँचा। उसके कपड़े फटे-पुराने थे और उसकी त्वचा पर बड़े-बड़े फोड़े-फुंसियाँ थीं, जिनसे निरंतर मवाद बह रहा था। उसके शरीर से दुर्गंध फैल रही । उसके ए...
"Hii..." अंश के फोन की स्क्रीन पर नोटिफिकेशन चमक उठा। सुबह की हल्की-सी रोशनी कमरे में फैली हुई थी। अंश ने आँखें मलते हुए फोन उठाया और मैसेज पढ़ते ही उसके होंठों पर अनचाही...
“शिफ़ा शिफ़ा....”,अनस सहन में खड़ा उसको आवाज़ कम दे रहा था और चि़ल्ला ज़्यादा रहा था।“क्या मुसीबत है, कभी तो चैन से खाना खाने दिया करो। हर वक़्त सर पर नाज़िल रहते हो”वह बड़बड़ाती ह...
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