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अध्याय 1: धुंध में लिपटा अतीत"यह उन दिनों की बात है..."जब कसौली के पहाड़ों पर धु...
इंजन रूम के उस भयानक, धड़कते हुए मांसल कमरे में, जहाँ दीवारों से खून रिस रहा था...
"बेटा, जब तक यह साइकिल चल रही है, तब तक तेरा बाप खड़ा है।" पिता के इन शब्दों की...
कॉलेज का पहला हफ्ता बीत चुका था। रोहन अब कैंपस के माहौल में थोड़ा-बहुत ढलने लगा...
SCENE 3."इसमें मेरी बेटी की तज़लील क्यों हुई, उसकी क्या ग़लती थी?" रेड कोर्ट पर...
फिर...
लंच ब्रेक: खामोशी के पीछे का शोरलंच की घंटी बजते ही पूरी क्लास में एक अजीब सी हल...
भूख का फैसलाकभी-कभी कटघरे में खड़ा इंसान दोषी नहीं होता… हमारी संवेदनहीनता होती...
सुबह का अलार्म बजते ही राहुल की आँख खुल गई.कुछ पल तक वह चुपचाप बिस्तर पर बैठा रह...
Mr. & Ms. FakeEpisode 36 – The Man in the Mansionसुबह के करीब छह बजे...आर्यवीर क...
काहिरा के रेगिस्तानी इलाके में रात का गहरा सन्नाटा था। बंद पड़ी सीमेंट फैक्ट्री के अंदर पीली बत्तियों की रोशनी में दर्जनों लोग अत्याधुनिक हथियार और हेरोइन के पैकेट बड़े-बड़े कंटेनर...
कहानी की शुरुआत एक अंधेरे कमरे से होती है, जहाँ एक लड़की लोहे की चेन से लॉक होती है। फिर कमरे का दरवाज़ा खुलता है और एक आदमी अंदर आता है। वह उस लड़की के पास जाता है और उससे कहता...
कॉलेज के पहले दिन की वह सुबह हर साल की तरह आम थी, लेकिन रोहन के लिए यह दिन उसकी जिंदगी का सबसे खास मोड़ बनने वाला था। रोहन शहर के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में बी.टेक के पहले वर्ष में दाख...
शहनाई की गूंज, गेंदे के फूलों की मादक महक और हवन कुंड से उठते पवित्र धुएं ने उस पुरानी हवेली के विशाल प्रांगण को एक जादुई आभामंडल से भर दिया था।हवेली की वह पुरानी छत, जिसकी पारंपरि...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
शाम का वक्त था और Priyam अपने कमरे में खड़ी थी। खिड़की से हल्की धूप आ रही थी, और कमरे में सन्नाटा था। आज कुछ अलग सा लग रहा था। दिल हल्का-हल्का धड़क रहा था, और मन में हल्की बेचैन...
बहुत पुराने ज़माने की बात है। एक छोटा-सा गाँव था। उसी गाँव में एक बूढ़ी औरत रहती थी। उसका पति कब का मर-खप चुका था। घर में बस वही बूढ़ी औरत और उसका एक इकलौता बेटा बचा था। अब बेटा...
पीपल का चबूतरा, हुक्के की गुड़गुड़ और वहम की रातउस रात मोनू सिर्फ अपनी माँ की आवाज़ सुनना चाहता था।उसे नहीं पता था कि उस एक आवाज़ की तलाश उसे ऐसी चीज़ के सामने खड़ा कर देगी, जो शाय...
एक अनजान मुलाकातशहर की भीड़ हमेशा की तरह अपने काम में व्यस्त थी।सड़कों पर गाड़ियों का शोर था। लोग जल्दी-जल्दी अपने ऑफिस जा रहे थे। कोई फोन पर बात कर रहा था, तो कोई अपने काम के लिए...
28 साल की मीशा अपने काम से जाने की घर वालों से विदा लेकर अपनी कार में बैठी। उसने अपने परिवार वालों की तरफ एक हल्की मुस्कुराहट के साथ देखा... जैसे मानो वह उनसे कुछ कहना चाहती हो, पर...
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