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अगला दृश्य...युई का चेहरा गुस्से से लाल हो चुका था। उसकी नज़र सामने खड़े जुशेंग...
अनंत प्रभा प्रवाह नव प्रभात -डॉ विद्या निवास मिश्र जी --कलजयी व्यक्तित्व ----समय...
बहुत समय पहले की बात है। एक घने हरे पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर एक नन्हीं सी चिड़िय...
" रेगिस्तान का मेला”गाँव में आए उन्हें लगभग तीन हफ्ते हो चुके...
"बहू बनकर आई थी उस घर में, पर जब बुखार में पूरा शरीर तप रहा था, तब सास के मुँह स...
Chapter 4: पार्टी ऑन द रिस्कप्रैक्टिकल खत्म होते ही लैब से बाहर निकलते शैलेंद्र...
स्वामी रमते राम वचनामृत रामगोपाल भावुक ...
सृजना कि पृष्ठभूमि --महोबा आल्हा,उदल, मामा माहिल,डेबा कि धरती शारीरिक शौष्टव, शक...
: प्रकरण 5 : मांकवा से वापस आने के बाद मेरे सभी घा...
समाज की परंपराएँ और हमारे अपने निर्णयजब हम समाज की अपेक्षाओं और निर्णयों से परे...
शाम का वक्त था।बस स्टैंड लगभग खाली था — बस एक 16 साल की लड़की वहाँ खड़ी थी।उसका नाम था आशी कपूर 4'11 की नाजुक सी हाइट, दूध जैसा गोरा रंग, कमर तक आते काले घने बाल,नीली बड़ी-बड़...
सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी। "अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...
कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है। यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्क...
एक शहर की लड़की गांव घूमने आती है। उसे क्या पता था कि इस गांव से वापस जाने का रास्ता बंद हो जाएगा। क्या वो लड़की इस जबरदस्ती के रिश्ते को कभी अपनाएगी? या इस कैद से भाग जाएगी? और ज...
एक नई शुरुआत सुबह के करीब छह बजे थे। छोटे से शहर की गलियों में अभी पूरी तरह चहल-पहल शुरू नहीं हुई थी। कहीं किसी घर के आंगन में झाड़ू लग रही थी, तो कहीं चाय की पहली खुशबू हवा...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
विराट का आलीशान घर – सुबह रसोईघर में संपूर्णा (चाय बनाते हुए, मुस्कान के साथ) बोली - अच्छा, आज विराट जी को जल्दी जाना है, तो चाय गर्म और नाश्ता तैयार। विवान, अपना खिलौना इध...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
घना अंधेरा जंगल. रात का न जाने कौन- सा पहर था. चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था कि अपनी ही साँसों की आवाज किसी अनजान खतरे की आहट लग रही थी. आसमान को काले बादलों ने निगल लिया था और...
कलयुगी महा-उत्पाद और अधर्म की भयानक ज्वालाएँ भड़कने से ठीक १०० वर्ष पूर्व, जब काल-चक्र ने एक पावन युग की रचना का निर्णय लिया, तब पृथ्वी पर परम-पवित्र भूमि सिंभाला की स्थापना हुई। स...
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