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18 जॉय का खोना थोड़ी देर बाद , आकाश मे काले बादल देखकर वह अपने ख्याल से बाहर आता...
मुंबई की बारिश और शाम की लोकल ट्रेन—दोनों का मिज़ाज एक जैसा था, कभी भी किसी की ज...
चार दिन की शान।एक बेटे की ज़िद… और एक परिवार की कीमत️ लेखककान्तिभाई राठौड़ '...
(नूरगढ़ के मुख्य चौराहे पर पसरा सन्नाटा अब तनाव में बदल चुका था। हवा में अभी भी...
भाग १० — डूबते सूरज को अर्घ्यसुबह की पहली किरण अभी गाँव की गलियों तक पहुँची भी न...
छत से लटकता साया और माधव का राजकबीर के हाथ में पकड़े मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशन...
आज मैं जहाँ हूँ… और आगे की उम्मीद हर सफर की एक शुरुआत होती है।कुछ रास्ते आ...
Part 1 — पहली मुलाकातशहर में उस दिन सुबह से ही बारिश हो रही थी।आसमान बादलों से ढ...
पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म...
अध्याय-२८रमेशभाईने जैसे ही बात की, सभी बड़ों ने कहा, "वाह! यह तो आपने बहुत सुंदर...
मैं... अपने ऑफिस का काम जल्द से जल्द निपटाने में व्यस्त था तभी मुझे कुछ हल्की सी चिल्लाने की आवाज सुनाई दी, पर मुझे अपने ऑफिस का काम जल्दी खत्म करना था इसलिए मैंने उस आवाज को नजर...
(नूरगढ़ की चौड़ी पक्की सड़क पर ढलती हुई धूप ने एक अजीब सी चमक बिखेर रखी थी। हवा में हल्की ठंडक और आसपास के खेतों से आती हुई सौंधी खुशबू घुली हुई थी। गाँव के बाहर से गुजरने वाले मुख...
गंगा के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव सूर्योदय के साथ ही जाग जाता था। सुबह के पाँच बजे थे। आसमान अभी अँधेरा था, लेकिन पूरब की दिशा में हल्की लालिमा दिखाई देने लगी थी। दूर मंदिर...
रात के ठीक ग्यारह बज चुके थे। यूपी से बिहार जाने वाली इस एक्सप्रेस ट्रेन का थर्ड एसी कोच लगभग पूरी तरह से शांत हो चुका था। ट्रेन के पहियों की पटरियों से टकराने वाली छुक-छुक की लयबद...
बचपन की पहली यादें कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें हम चाहकर भी भूल नहीं पाते। वे यादें किसी तस्वीर की तरह हमारे मन में टंगी रहती हैं। वक्त गुजरता जाता है, उम्र बढ़ती जाती है,...
समर्पित उन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं। प्रस्तावना यह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। मेरे और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक...
विराट का आलीशान घर – सुबह रसोईघर में संपूर्णा (चाय बनाते हुए, मुस्कान के साथ) बोली - अच्छा, आज विराट जी को जल्दी जाना है, तो चाय गर्म और नाश्ता तैयार। विवान, अपना खिलौना इध...
लाई हूं, एक ऐसी स्टोरी जिसमे सस्पेंस और लव है जो शुरू होता है हरिद्वार के शहर से जहाँ पर हमारी प्यारी सी वैशाली शर्मा जो की साधरण से परिवार की है ।जिसकी शादी एक ऐसे इंसान से हो जात...
कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है। यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्क...
भाग 1 — कंस की भविष्यवाणी और श्रीकृष्ण के जन्म की शुरुआत जय श्रीकृष्ण मथुरा नगरी में उस समय चारों ओर खुशियाँ थीं। राजा उग्रसेन की पुत्री देवकी का विवाह यदुवंशी वीर वसुदेव के साथ...
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