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----------------रौक्षिण के कदम जैसे ही रुद्रिका की डेस्क के पास आकर रुके, पूरी...
---*Chapter 6: भागते-भागते प्यार ~आग के पंखों से उड़कर रेशमा और अर्जुन "नील पर्व...
सोलह साल की आयत अपने माँ-बाप की इकलौती बेटी थी। पढ़ाई में होशियार, शालीन और बड़े...
चाँदी का कंगनबरसों पुराने राजस्थान के एक छोटे-से कस्बे "चाँदपुर" में एक हवेली थी...
विष अमृत..."आज जाने की ज़िद ना करो, यूं ही पहलू में बैठे रहो।" कनु के स्वर की मध...
माई ने अमाया से कहा, "पिछली बार तोहफे में जो नई डिश (थाली/बर्तन) आई थीं, आज सबक...
Reincarnated as Villainess: The Man Who Hated Her Became Her Obsession वह एक ऐसी...
अंधेरी रात थी ... सब ओर नीरवता छाई थी ... रात के अशुभ पक्षी चीत्कार कर रहे थे .....
अचानक लग झटके साथ भावेश की तन्द्रा टूटी । वो लैण्ड कर चुके थे अहमदाबाद में । यहा...
मैं अभी भी वहीं बैठी थी। मन तो बाहर जाने का था, लेकिन मैंने खुद को रोक लिया था।...
दिल्ली से छः सौ किलोमिटर दूर हिमाचल प्रदेश की गोद बसा एक टाउन अवासा इस समय शांत था। अवासा एक छोटा टाउन था लेकिन जितना छोटा था उतना ही समृद्ध भी था। पहाडियो की गोद मे बसा ये शहर कि...
Part 1: श्रापित गांव ~ साल था 1826। जगह थी - *राजस्थान का गांव "धू-धू"*। पिछले 100 साल से यहां बारिश नहीं हुई। कुएं सूखे। खेत बंजर। लोग भूखे। बूढ़े कहते थे: "य...
बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है… वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था। छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...
यह कहानी बहुत समय पहले की है ... करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले की ................ नेपाल के सरहद से सटा भारत में एक छोटा सा गाँव था विष्णुपुर । इसी गाँव के ठीक बीचोबीच बने कु...
"कुछ मुलाकातें ज़िंदगी बदल देती हैं... और मेरी ज़िंदगी की वह मुलाकात एक शादी के समारोह में हुई थी।" मैं उससे पहली बार एक शादी के समारोह में मिली थी। वह लड़के वालों की तरफ़...
संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...
लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई और युवाओं की पुकार— सत्येंद्र कुमार "एस.टी.डी. मौर्य" कटनी मध्य प्रदेश क्या आप जानते हैं कि देश में क्या चल रहा है? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? हम...
झूठ बोल कर निकली, ये कहानी शुरू होती है एक झूठ से, प्रतिज्ञा ने अपने घर पर सबको बोला था, कि वो कॉलेज ट्रिप पर जा रही है, लेकिन सच ये था कि, ये कोई आम कॉलेज ट्रिप नहीं थी, ये एक कपल...
हरियाणा के एक छोटे से गांव में नयना देवी रहती थी। गांव वाले उसे नयना कहकर बुलाते थे। नयना बहुत सुंदर थी, लेकिन स्वभाव से अक्खड़ और साफ दिल की थी। उसकी शादी पास के ही गांव में सुरेश...
“शिफ़ा शिफ़ा....”,अनस सहन में खड़ा उसको आवाज़ कम दे रहा था और चि़ल्ला ज़्यादा रहा था।“क्या मुसीबत है, कभी तो चैन से खाना खाने दिया करो। हर वक़्त सर पर नाज़िल रहते हो”वह बड़बड़ाती ह...
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