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गरीब के बहते आंसु. By prem chand hembram

उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ऐसा आलम था कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी मिट्टी छोड़कर सैकड़ों मील दूर परदेस जाने को मज...

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ध्रुव की तारा By Anamika

सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी।
​"अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...

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घुमक्कड़ जिज्ञासा By Dharmendra Kumar

"नमस्कार दोस्तों! स्वागत है, आप सभी का "मातृभारती" के एक बेहद अनोखे और आपके होश उड़ा देने वाले सफ़र में।मैं हूँ, आपका दोस्त..."धर्मेंद्र कुमार"......अपने यात्रा...

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परम अंशः कलियुग का अंतिम महायुद्ध. By Gyan Roshani

प्रस्तावना: तमस का साम्राज्य और अदृश्य आशाकलयुग का वातावरण: सन 4,28,126 ईस्वीसन 4,28,126 ईस्वी का यह भयानक काल-चक्र संपूर्ण ब्रह्मांड का सबसे खौफनाक, क्रूर और घिनौना दौर बन चुका था...

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पवित्र प्रेम या अभिशाप Season 2 By Sonam Brijwasi

रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी।
उम्र लगभग चालीस...

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मौत का डर By Irfan ayan Khan

[दृश्य 1]
स्थान: घर का आंगन / हॉल
समय: शाम का वक्त

सूरज ढल रहा है और आसमान में हल्की लाली छाई हुई है। घर के अंदर हवा में एक सुकून और अपनापन घुला हुआ है।
आंगन में पाँच साल का...

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उम्मीदों की छाँव By mahendr Kachariya

यह कहानी आधुनिक समाज, रिश्तों की उथल-पुथल, मानवीय मूल्यों और संघर्ष के बीच उम्मीद की एक किरण ढूँढने की यात्रा है। कहानी का मुख्य पात्र 'राघव' है, जो शहर की चमक-धमक से दूर अ...

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में और मेरे अहसास By Dr Darshita Babubhai Shah

में और मेरे अहसास भाग-१ *** ईश्क में तेरे जोगन बन गई lआज राधा जोगन बन गई ll *** गरघर कीदीवार केकर्णहोतेकोई घरखड़ाना होता ll *** काटे नहीं कटता एक पल यहां lकैसे कटेगी एक उम्र भला यहा...

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तुम हो तो सब कुछ है By Ankit Khatri

एक नई शुरुआत

सुबह के करीब छह बजे थे।

छोटे से शहर की गलियों में अभी पूरी तरह चहल-पहल शुरू नहीं हुई थी। कहीं किसी घर के आंगन में झाड़ू लग रही थी, तो कहीं चाय की पहली खुशबू हवा...

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हैवान By aakash kumar

उस रात जंगल ज़रूरत से ज्यादा खामोश था। इतना खामोश कि नील को सूखी पत्तियों पर पड़ते अपने ही जूतों की आवाज़ किसी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी। हवा ठंडी थी, पर उसके माथे पर पसीने की...

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गरीब के बहते आंसु. By prem chand hembram

उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ऐसा आलम था कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी मिट्टी छोड़कर सैकड़ों मील दूर परदेस जाने को मज...

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ध्रुव की तारा By Anamika

सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी।
​"अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...

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घुमक्कड़ जिज्ञासा By Dharmendra Kumar

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परम अंशः कलियुग का अंतिम महायुद्ध. By Gyan Roshani

प्रस्तावना: तमस का साम्राज्य और अदृश्य आशाकलयुग का वातावरण: सन 4,28,126 ईस्वीसन 4,28,126 ईस्वी का यह भयानक काल-चक्र संपूर्ण ब्रह्मांड का सबसे खौफनाक, क्रूर और घिनौना दौर बन चुका था...

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पवित्र प्रेम या अभिशाप Season 2 By Sonam Brijwasi

रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी।
उम्र लगभग चालीस...

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मौत का डर By Irfan ayan Khan

[दृश्य 1]
स्थान: घर का आंगन / हॉल
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सूरज ढल रहा है और आसमान में हल्की लाली छाई हुई है। घर के अंदर हवा में एक सुकून और अपनापन घुला हुआ है।
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उम्मीदों की छाँव By mahendr Kachariya

यह कहानी आधुनिक समाज, रिश्तों की उथल-पुथल, मानवीय मूल्यों और संघर्ष के बीच उम्मीद की एक किरण ढूँढने की यात्रा है। कहानी का मुख्य पात्र 'राघव' है, जो शहर की चमक-धमक से दूर अ...

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में और मेरे अहसास By Dr Darshita Babubhai Shah

में और मेरे अहसास भाग-१ *** ईश्क में तेरे जोगन बन गई lआज राधा जोगन बन गई ll *** गरघर कीदीवार केकर्णहोतेकोई घरखड़ाना होता ll *** काटे नहीं कटता एक पल यहां lकैसे कटेगी एक उम्र भला यहा...

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तुम हो तो सब कुछ है By Ankit Khatri

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हैवान By aakash kumar

उस रात जंगल ज़रूरत से ज्यादा खामोश था। इतना खामोश कि नील को सूखी पत्तियों पर पड़ते अपने ही जूतों की आवाज़ किसी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी। हवा ठंडी थी, पर उसके माथे पर पसीने की...

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