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शाम ढल रही थी। होटल के कमरे में हल्की सी ठंडक थी। विराट ने अपने फोन को टेबल पर र...
यह वृतांत बीसवीं...
अध्याय 2 - मैं अपनी ही माँ बन गई?`*कहानी:*मेरी आँखें खुली तो सब कुछ सफ़ेद था। ते...
अनकहा सच___राजू ने आँखों में छलकते आँसुओं को दबाते हुए कहा, "हाँ... बहुत प्यारी...
अनकहे एहसासहर दर्द को शब्द नहीं मिलते, लेकिन हर एहसास की अपनी एक कहानी होती है।ल...
*हिस्सा 1: लौट आना (1972)*1972. बनारस में गंगा अब भी वैसी ही बहती थी, पर घाट पर...
अध्याय 5: अमावस की रात, गन्ने का खेत और लाल आँखेंसूरज ढलते ही आसमान पर स्याही बि...
### जब भरोसा भी ज़िम्मेदारी बन गयाबारहवीं की परीक्षा में 67 प्रतिशत अंक प्राप्त...
(कमरे में हल्की रौशनी जल रही है। सिमरन खिड़की के पास बैठी है, उसकी आँखों से आँसू...
यह कहानी मेरी पहली कहानी है जो हिन्दी में है। इस दुनिया में हर लोगो अनेकों अवसर...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
आर्यन शहर का एक उभरता हुआ सितारा था। उसके पास वह सबकुछ था जिसका सपना एक आम इंसान देखता है—शानदार करियर, समाज में प्रतिष्ठा, और सुख-सुविधाओं से भरा जीवन, उसे लगता था किजीवन की दौड़...
कलयुगी महा-उत्पाद और अधर्म की भयानक ज्वालाएँ भड़कने से ठीक १०० वर्ष पूर्व, जब काल-चक्र ने एक पावन युग की रचना का निर्णय लिया, तब पृथ्वी पर परम-पवित्र भूमि सिंभाला की स्थापना हुई। स...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
एक अनजान मुलाकातशहर की भीड़ हमेशा की तरह अपने काम में व्यस्त थी।सड़कों पर गाड़ियों का शोर था। लोग जल्दी-जल्दी अपने ऑफिस जा रहे थे। कोई फोन पर बात कर रहा था, तो कोई अपने काम के लिए...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
लोग कहते हैं कि जीवन में पैसा ही सब कुछ होता है। यह बात मैं नहीं कहता—मेरे आसपास के सभी लोग कहते हैं। बचपन से ही मैं यह सुनता आया था कि अगर आपके पास पैसा हो, तो जीवन की हर चीज आसान...
घना अंधेरा जंगल. रात का न जाने कौन- सा पहर था. चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था कि अपनी ही साँसों की आवाज किसी अनजान खतरे की आहट लग रही थी. आसमान को काले बादलों ने निगल लिया था और...
आधी रात का रिस्क... एक खिड़की का दीदार और छूटा हुआ जूता! शिव, दिनेश और शैलेंद्र का मास्टरप्लान: कुत्तों से ध्यान भटकाना, तीन की शेड पर पत्थर मारना और बिना आवाज बाइक खींच ले जाना। प...
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