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बनने से मिटने तक जीवन का मूल क्या है? कुछ बनने में—या हर क्षण मिटकर फिर बनने म...
भाग ९ — विश्वास और संदेहलेखिका: अलोका पटेलरात जैसे थम गई थी।मंदिर के पीछे पुराने...
शहर के पुराने हिस्से में एक तांत्रिक रहता था। लोग उसे त्रिकाल बाबा कहते थे। कहते...
बंद डिब्बा और खौफनाक दस्तकखिड़की के दोहरे शीशे पर बाहर से दर्जनों हथेलियाँ चिपक...
किस्मत का खेल कई बार जिंदगी में हम पूरी मेहनत करते हैं।सही रास्ता चुनने की कोशिश...
पहले तो गुजाराभत्ता के नाम पर अड़ी रही सुहानी। मनोज अपने सामर्थ्य को देखते हुए...
गोदाम में सन्नाटा था, सिर्फ बाहर से आती हवा की सरसराहट और राहुल की भारी साँसों क...
श्रीकृष्ण की पूरी जीवन-कथा भाग 12 — कंस का बुलावा और कृष्ण का मथुरा जानाजय श्रीक...
आखिरी रात“तुम्हारा शरीर…”“अभी भी मेरा है।”आवाज मंदिर की दीवारों से टकराकर चारों...
अध्याय 01: कैंपस संकट छात्र तेज़ कदमों से गलियारे में दौड़ा, रास्ते में आने वाले...
गंगा के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव सूर्योदय के साथ ही जाग जाता था। सुबह के पाँच बजे थे। आसमान अभी अँधेरा था, लेकिन पूरब की दिशा में हल्की लालिमा दिखाई देने लगी थी। दूर मंदिर...
शैलजा सिंह की एंट्री – नया कमरा, नई शुरुआत… या कुछ और?शाम का धुंधलका धीरे-धीरे शहर पर उतर रहा था। आसमान में हल्की बैंगनी छटा थी और हवा में अजीब सी ठंडक घुली हुई थी।शैलजा सिंह ऑटो स...
रात के ठीक ग्यारह बज चुके थे। यूपी से बिहार जाने वाली इस एक्सप्रेस ट्रेन का थर्ड एसी कोच लगभग पूरी तरह से शांत हो चुका था। ट्रेन के पहियों की पटरियों से टकराने वाली छुक-छुक की लयबद...
बचपन की पहली यादें कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें हम चाहकर भी भूल नहीं पाते। वे यादें किसी तस्वीर की तरह हमारे मन में टंगी रहती हैं। वक्त गुजरता जाता है, उम्र बढ़ती जाती है,...
विराट का आलीशान घर – सुबह रसोईघर में संपूर्णा (चाय बनाते हुए, मुस्कान के साथ) बोली - अच्छा, आज विराट जी को जल्दी जाना है, तो चाय गर्म और नाश्ता तैयार। विवान, अपना खिलौना इध...
भाग 1 — कंस की भविष्यवाणी और श्रीकृष्ण के जन्म की शुरुआत जय श्रीकृष्ण मथुरा नगरी में उस समय चारों ओर खुशियाँ थीं। राजा उग्रसेन की पुत्री देवकी का विवाह यदुवंशी वीर वसुदेव के साथ...
जिस गाँव का रास्ता रात में खत्म हो जाता था बिहार के एक छोटे-से जिले में एक गाँव था—भैरवपुर।नक्शे में उसका नाम था।सरकारी कागजों में उसका नाम था।वहाँ रहने वाले लोगों के राशन कार्ड, ज...
उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ऐसा आलम था कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी मिट्टी छोड़कर सैकड़ों मील दूर परदेस जाने को मज...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
स्वर्णिम गढ़ यानी अपने आप में एक पूर्ण गढ़ । यह वह भूमि थी जहां की हवाओं में खूबसूरती बहती थी , जहां प्यार की छांव थी और शांति का पहरा था। वक्त कब बदला और इस शां...
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