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बिहार…गंगा के किनारे बसे बिहार के एक छोटे से जिले से करीब पैंतीस किलोमीटर दूर एक...
कहानी: एक लड़की की ___गांव पहुँचकर मीशा की दादी उसे गले लगाकर बहुत प्यार करती है...
"गुप्त ख़ज़ाना" तीन नटखट दोस्तों—शिव, दिनेश और शैलेंद्र की एक मजेदार कहा...
कबीर का दिल तेज़ी से धड़क रहा था…दिमाग में बस एक ही बात घूम रही थी—श्रेया कहाँ च...
पर तुम तो,,,,कुछ कहते कहते निकिता रुक गई----दर्सल कॉलेज के समय अंकित निकी को बेह...
खट! खट! खट! खट!फर्स्ट क्लास एसी के उस जमे हुए, बर्फीले गलियारे में उन भारी दरवाज...
एक अधूरी मुलाकातरिया एक छोटे से शहर में रहने वाली लड़की थी। उसके सपने बहुत बड़े...
ध्रुव की ताराभाग - १८लेखिका "अनामिका"अगली सुबह तारा अपनी रूममेट्स के साथ पहली क...
अवधूतोपनिषद-- अवधूतोपनिषद् का मूल संस्कृत पाठ अपेक्षाकृत संक्षिप्त है और इसमें भ...
शहर के एक छोटे, शांत और बेहद खूबसूरत कैफ़े के कोने वाली टेबल माहिरा की सबसे पसंद...
एक शहर की लड़की गांव घूमने आती है। उसे क्या पता था कि इस गांव से वापस जाने का रास्ता बंद हो जाएगा। क्या वो लड़की इस जबरदस्ती के रिश्ते को कभी अपनाएगी? या इस कैद से भाग जाएगी? और ज...
कहते हैं कि ज़िंदगी में कुछ मुलाकातें अचानक होती हैं। न कोई योजना होती है, न कोई इंतज़ार। बस एक दिन कोई अनजान इंसान हमारी दुनिया में आता है और धीरे-धीरे हमारी कहानी का ऐसा हिस्सा...
आज जब मैं खुद को आईने में देखती हूँ, तो कुछ अलग-सा महसूस होता है। आईने में चेहरा तो वही दिखाई देता है, लेकिन लगता है जैसे जीवन में न जाने कितने बदलाव आ गए हैं। एक समय था, जब लोग...
एक 19 साल की लड़की आईने के सामने खड़ी थी। वह बिल्कुल नई नवेली दुल्हन की तरह लग रही थी। उसकी आँखों में चमक थी और चेहरे पर अपार खुशी। वह खुद को आईने में ऐसे निहार रही थी, जैसे कोई...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।" "प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...
डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की तीन लघुकथाएँ (1) लाइक एंड कॉमेंट्सरात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दू...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
भादो मांझी — वंश और विरासतभादो मांझी कई दिनों से मुँह फुलाए बैठा था।घर में उसकी बूढ़ी पत्नी के साथ रोज की तरह छोटी-बड़ी बातों पर नोकझोंक होती रहती थी। उस दिन भी दोपहर के भोजन पर पत...
फूलों से सजा और जगमगाती रोशनी में नहाया मल्होत्रा विला। ढोल-बाजे की आवाज़ के शोर के बीच हर कोई खुशी से नाच रहा था। मौका था करोड़पति कपड़ा व्यापारी बिशम्बर मल्होत्रा की 23 वर्षीय...
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