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संस्करण := 3***********12 रुपिया किलो में बिकता प्रेमचंद...
भाग ५ — एक पुरुष का निर्णयलेखिका: अलोका पटेलरात गहरी हो चुकी थी।सावित्री के सामन...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 67: पहला द्वार — स्मृति“अनन्या...”पीछे से आ...
YouTube का सपना हर इंसान के अंदर कोई न कोई ऐसा सपना जरूर होता है, जिसे वह दुनिया...
मनुष्य जब इस दुनिया में आता है, तब उसके हाथ में कोई नक्शा नहीं होता। उसे यह नहीं...
साहित्य अकादमी से पुरस्कृत संजीव जी का अभिमत नीलम कुलश्रेष्ठ एक बार...
एक फूल की यादेंलेखक: विजय शर्मा एरीज़िंदगी के सफ़र में कुछ चीज़ें छोटी-सी होती...
उन्होंने आगे कहामैं अपने दोनों बेटों के साथ मॉरीशस में था बिजनेस के सिलसिले में...
सुबह का समय — हवा में धुंध, जंगल के पेड़ों के बीच से सूरज की किरणें छनकर आ रही ह...
लखनऊ, नवाबों का शहर। शाम के सात बज रहे थे। हजरतगंज की रौशनी, चौक की चाट की खुशबू...
कोलकाता: गुनाह का काला जश्न कोलकाता की वह रात आम रातों जैसी नहीं थी। 'द वेलवेट अंडरग्राउंड' नाइट क्लब के बाहर महंगी गाड़ियों का काफिला लगा था, और अंदर—शहर की चकाचौंध अ...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
बहुत पुरानी बात नहीं है, यह उस दौर की कहानी है जब लोग आँखों से दिलों का हाल पढ़ लिया करते थे। शहर के बीचों-बीच बसा पुराना कॉलेज, जिसकी दीवारों पर इतिहास की परतें जमी थीं और गलियारो...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
भाग १ — एक दिन, कई जिम्मेदारियाँ सुबह छह बजे अलार्म बजा। मिहिर ने आँखें खोलीं, लेकिन कुछ क्षणों तक बिस्तर पर ही पड़ा रहा। बगल में उसकी पत्नी निशा अभी सो रही थी। सामने की द...
ये कहानी है चार लड़कियों की, जो अपनी-अपनी ज़िंदगी की परेशानियों से दूर भागकर आर्मी में आई थीं। लेकिन उन्हें कहाँ पता था कि आर्मी में आने के बाद उनकी ज़िंदगी पूरी तरह बदलने वाली है।...
शादी के तीन साल बाद जब नेहा अपने गांव वाले पुश्तैनी घर पहुंची, तो उसकी सांसों में बचपन की वही पुरानी और जानी-पहचानी खुशबू भर गई। गाड़ी से उतरते ही उसने देखा कि मां दरवाजे पर कब से...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आई तो शैलजा की आँख खुली। रात की घटनाएँ उसे सपने जैसी लगीं।उसने खुद को फिर समझाया -सब वहम था…उसने नहाकर हल्के पीले रंग का सूती सलवार-सूट पहना। ब...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
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