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### जब भरोसा भी ज़िम्मेदारी बन गयाबारहवीं की परीक्षा में 67 प्रतिशत अंक प्राप्त...
(कमरे में हल्की रौशनी जल रही है। सिमरन खिड़की के पास बैठी है, उसकी आँखों से आँसू...
[अस्वीकरण: यह एक काल्पनिक कहानी है, वास्तव के साथ इसका कोई संबंध नहीं है]पहला अध...
सुबह Aashi की आँख खुली तो सबसे पहले उसकी नजर मेज पर रखी डायरी पर गई। पिछली रात उ...
भस्मोपनिषद--यह उपनिषद के क्रम में 96 वें स्थान पर आया है।भस्मोपनिषद् एक लघु शैव...
अगला दृश्य...रेहान दूर से उस तरफ देखता रहा।फिर उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ...
️ हुक्म और हसरत ️2894 words chapter...#Arsiaएपिसोड 41: एक अनजानी जलन सुबह के दस...
भाग एक: एक नई सुबह और नताशा का अल्टीमेटमअगली सुबह मुंबई में हमेशा की तरह तेज रफ्...
ट्रेन अपनी रफ़्तार से आगे बढ़ रही थी। खिड़की के बाहर भागते पेड़, पीछे छूटते स्टे...
जिंदगी की दूसरा किनारा पार्ट 37और वही कुछ देर बाद अभिराज अस्पताल से बाहर आते हु...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
लाई हूं, एक ऐसी स्टोरी जिसमे सस्पेंस और लव है जो शुरू होता है हरिद्वार के शहर से जहाँ पर हमारी प्यारी सी वैशाली शर्मा जो की साधरण से परिवार की है ।जिसकी शादी एक ऐसे इंसान से हो जात...
फूलों से सजा और जगमगाती रोशनी में नहाया मल्होत्रा विला। ढोल-बाजे की आवाज़ के शोर के बीच हर कोई खुशी से नाच रहा था। मौका था करोड़पति कपड़ा व्यापारी बिशम्बर मल्होत्रा की 23 वर्षीय...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
दो दोस्त है चुन्नू और मुन्नू। चुन्नू जो है वो एकदम मजाकिया वाले जो होता है ना उस अंदाज में रहता है कि हमेशा उसको बस मजाक ही सूझता रहता है और मजाक ही सूझता रहता है। और वही मुन्नू जो...
आज जब मैं खुद को आईने में देखती हूँ, तो कुछ अलग-सा महसूस होता है। आईने में चेहरा तो वही दिखाई देता है, लेकिन लगता है जैसे जीवन में न जाने कितने बदलाव आ गए हैं। एक समय था, जब लोग...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की तीन लघुकथाएँ (1) लाइक एंड कॉमेंट्सरात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दू...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
एक अनजान मुलाकातशहर की भीड़ हमेशा की तरह अपने काम में व्यस्त थी।सड़कों पर गाड़ियों का शोर था। लोग जल्दी-जल्दी अपने ऑफिस जा रहे थे। कोई फोन पर बात कर रहा था, तो कोई अपने काम के लिए...
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