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उन दोनों पति-पत्नी में अस्पताल में शोर मचाना शुरू कर दिया। उनका शो सुनकर वहां एक...
"कहिए करण सर, या फिर मिस्टर करण मेहरा कहूँ?" आरव ने फोन कान से लगाते ही बिना किस...
अध्याय 10: जागने के बाद“इस बार तुम्हें खुद को बचाना है।”अंगद उस दूसरे अंगद को दे...
PART 3 — आखिरी वादाशादी की शहनाई अब भी बज रही थी, लेकिन घर के अंदर हर किसी के चे...
समय के साथ...रितांश और सिद्धिदात्री का रिश्ता और भी गहरा होता जा रहा था। शुरुआत...
मीना बहुत दिनों बाद अपने मायके जा रही थी। ट्रेन से उतर कर उसने रिक्शा किया। "भैय...
एपिसोड 26– एक नई शुरुआतइंटर-कॉलेज मेडिकल चैलेंज खत्म हुए दो दिन बीत चुके थे।लेकि...
शक्ति ने दूर जाती हुई उस बस की तरफ आख़िरी बार देखा, फिर अलिशा की ओर मुड़ी।"तुम उ...
“कुर्सी बदलते देर नहीं लगती, लेकिन इंसान की पहचान उसके व्यवहार से होती है।”समय ब...
[58]शैल ने सरिता के शब्दों को नहीं सुना था। वह नदी की तरफ बढ़ता गया। पानी के समीप...
एक माँ आज रो रही है। उसका दम घुट रहा है, वह धीरे-धीरे मर रही है। क्या कोई उसकी पीड़ा को समझ पाएगा, या यह दर्द उसे उसके अंत की ओर ले जाएगा? मैं उसे देख रही हूँ… क्योंकि मैं उसी...
वेदांत बीस बरस में बहुत तरक्की कर लिया है ।फ़िल्म निर्माता ,निर्देशक और उपन्यासकार लेखक भी है।वह बंगले के लॉन में मैना पक्षी के जोड़े को देखते ही रहा जाता है ।दोनों में इश्क हो रहा थ...
तकनीकी दृष्टि से नाटकों से अधिक सक्षम माध्यम आज उपलब्ध हैं। महान वृत्तान्तों के साथ स्थानीय चटकीले रंग, संयोजन-विखण्डन, रडार छवि- संस्कृति, अतियथार्थता के बीच नाटकों का स्थान कहाँ...
मुंबई की शामें कभी शांत नहीं होतीं। मरीन ड्राइव पर टकराती लहरों का शोर हो या लोकल ट्रेन की वो अंतहीन जद्दोजहद, यहाँ सुकून तलाशना रेत में सुई ढूँढने जैसा है। भार्गव, जो अंधेरी के एक...
प्राग की सर्द रात थी।व्लतावा नदी के किनारे हवा में नमी थी, और शहर की रोशनी पानी पर सुनहरी झिलमिलाहट फैला रही थी।वहीँ एक कैफ़े की खिड़की के पास बैठा था , आर्यन मल्होत्रा,अपने महंगे...
(चौराहे का एक दृश्य । एक तरफ डुग्गी पीटने वाला डुग्गी पीटता हुआ प्रवेश करता है।) डुग्गीवाला- कल से इस पूरे षहर में कोई नशा नहीं करेगा.....कल से इस पूरे षहर में कोई भी आदमी नशा न...
अंधेरे में चमकती हुई उन दो आँखों को देखकर चारों के शरीर में सिहरन दौड़ गई। "क... कौन है वहाँ?" रोहित ने काँपती आवाज़ में पूछा। कोई जवाब नहीं आया। बस वही आँखें अंधेरे में...
कॉलेज की छुट्टियां होते ही हम पांच दोस्तों—मैं, रोहित, नितिन, स्नेहा और अंजलि ने कुछ ऐसा करने का सोचा जो हमारी बोरिंग जिंदगी में रोमांच भर दे। हम सब हॉरर फिल्मों और भूतिया कहानियों...
सरकारी बंगले का लान। चार कुर्सियाँ लगी हैं बगल में एक छोटी मेज पर फोन रखा है। बातुल और नायकम बात कर रहे हैं। वे कमाण्डर तथा उनके साथियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।) बातुल- समय तो हो...
कहते हैं कि किस्मत का लिखा और समय का बीता हुआ पल न कोई टाल सकता है, न वापस ला सकता है।पर क्या हो जब ऊपरवाला खुद आपके साथ हो… जब वह खुद चाहे कि आपकी पूरी ज़िंदगी बदल जाए और अब आपके...
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