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मेरा पति तेरा पति - 7
द्वारा Jitendra Shivhare

7 "अरे नहीं! इसमें प्राॅब्लम कैसी?" अनिता ने जवाब दिया। "ठीक है अनिता! कभी किसी से चीज़ की जरूरत हो तो बिना संकोच के बता देना। मैं चलता हूं।" ...

अपनत्व
द्वारा Saroj Verma

बेटा, सौजन्य आओ नाश्ता लग गया है, juice लोगे या दूध शेखर ने अपने बेटे सौजन्य को आवाज लगाई। मुझे नाश्ता नहीं करना, बहुत देर हो गई है, मैं ...

कोड़ियाँ - कंचे - 10 - अंतिम भाग
द्वारा Manju Mahima

Part- 10 अन्दर बहुत सारी महिलाएं घूँघट निकाले बैठी थीं, गायत्री जी थोड़ी चकित हुई, पराग ने आगे बढ़कर ‘मम्मी’ कहा और उनको लेकर गायत्री जी के साथ अलग ...

एक यात्रा समानान्तर - 2
द्वारा Gopal Mathur

2 होटल के काॅरीडोर के आखिर में छोर पर है उसका कमरा, जहाँ इस समय वह अकेली लेटी हुई है. रात आहिस्ता आहिस्ता सरकती आ रही है, पर ड्रिंक्स ...

Broken with you... - 5
द्वारा @njali

{गजब ज़िन्दगी है हम राइटर की 500 सिगरेट , 15 घंटे बैठे बैठे पिछवाड़ा सुन्न हो जाता है , तब भी ये खाली पन्ना नहीं पूरा होता है , ...

भारत के गावों में स्वतंत्रा संग्राम - 6
द्वारा Brijmohan sharma

6 जाति अपमानकुछ दिनों बाद, ऐक शाम शिव की जाति के ऐक व्यक्ति के यहां विवाह भोज का आयोजन था। शिव का पूरा परिवार भी निमंत्रित था। पंडित जब ...

अजीब दास्तां है ये.. - 9
द्वारा Ashish Kumar Trivedi

(9) रेवती रात दिन ईश्वर से प्रार्थना करती रहती थी कि कोई राह निकालें जिससे वह इस स्तिथि से निकल सके। एक दिन उसका धैर्य और विश्वास रंग लाया। ...

बीच में कहीं
द्वारा Gopal Mathur

गोपाल माथुर क्या आपने कभी किसी अनजान शहर में ऐसी शाम बिताई है, जहाँ आपको ऐसे व्यक्ति की प्रतीक्षा करनी पड़े, जिसे आना ही नहीं था ? नहीं, मैं ...

अनमोल सौगात - 6
द्वारा Ratna Raidani

भाग ६ रवि कॉलेज के बाहर नीता का इंतज़ार कर रहा था। दोपहर के १२ बजे तक नीता नहीं आयी। रवि की बैचेनी बढ़ने लगी थी। उसने पास के ...

एक दुनिया अजनबी - 36
द्वारा Pranava Bharti

एक दुनिया अजनबी 36- आश्चर्यचकित था प्रखर ---ऐसा भी होता है ? तभी उसके मन से आवाज़ आई ;'अभी दुनिया देखी ही कहाँ है प्रखर बाबू ---' वह खो ...

यादों के झरोखों से—निश्छल प्रेम (7)
द्वारा Asha Saraswat

              संसार में कुछ लोगों का सानिध्य ठंडी फुआर की तरह जीवन में ठंडक दे जाता है ।महाराज जी ऐसे ही व्यक्ति थे।वह ...

किले का भाग्य
द्वारा Kirtipalsinh Gohil

कैसे है आप सब? आशा है ठीक ही होंगे क्योंकि जितना मैं सुनता हूं और देखता हूं, मुझे पता चला है की दुनिया बहुत आगे निकल चुकी है तो ...

कोड़ियाँ - कंचे - 9
द्वारा Manju Mahima

Part- 9 जयपुर और  जहाजपुर दोनों ही स्थानों पर गहमागहमी का वातावरण था. एक ओर ख़ुशी एक ओर गम. यह कैसी विडम्बना थी ईश्वर की. काली रात की समाप्ति ...

मेरा पति तेरा पति - 6
द्वारा Jitendra Shivhare

6 मुझसे पहले मेरी अमीरी दिखाई दी और इसलिए मैं कह सकता हूं कि तुम मुझसे प्यार कभी नहीं कर सकती।" अमर इतना बोलकर जा चुका था। अनिता कुछ ...

पुराने पन्ने
द्वारा Deepak sharma

पुराने पन्ने इस सन् २०१६ के नवम्बर माह का विमुद्रीकरण मुझे उन टकों की ओर ले गया है साठ साल पहले हमारे पुराने कटरे के सर्राफ़, पन्ना लाल, के ...

गिर्दागिर्द
द्वारा Deepak sharma

गिर्दागिर्द अमला के अस्पताल में दाखिल होने का समाचार जिस समय सुभाष को दिया गया, वह अपने पड़ोसी को अपने बचपन का एक किस्सा सुना रहा था| जिस के ...

भारत के गावों में स्वतंत्रा संग्राम - 5
द्वारा Brijmohan sharma

5 मंदिर दर्शनहरिजन विद्यालय का काम जोर शोर से चल रहा था। छात्र संख्या मे नित्य वृद्धि हो रही थी। उस दिन सवेरे मंदिर मे आरती हो रही थी। ...

अनमोल सौगात - 5
द्वारा Ratna Raidani

भाग ५ जैसे ही नीता ने घर में प्रवेश किया तो देखा कि शशिकांतजी बैचेनी से टहल रहे थे और उर्मिला भी चिंतित नजर आ रही थी। नीता से ...

अजीब दास्तां है ये.. - 8
द्वारा Ashish Kumar Trivedi

(8) तमिलनाडु से उपेंद्र रेवती को बिहार ले गया। पश्चिमी चंपारण के बेतिया में उसकी बहुत सी संपत्ति थी। कुछ दिन तो रेवती को वहाँ अच्छा लगा। पर उसे ...

आखिरी विदा
द्वारा Suryabala

सूर्यबाला सुबह से तीन बार रपट चुकी थीं वे। एक बार, किचेन में टँगी जाली की आलमारी से खीर के लिए इलायची की डिब्बी निकालते हुए। दूसरी बार, पूजा ...

रोशनीघर की लड़की
द्वारा Yogesh Kanava

रोशनीघर की लड़की रात का गहरा सन्नाटा था, कभी कभी कुत्तों के भौंकने की आवाज़ नीरवता को तोड़ देती थी। कई बार ऐसा होता कि नींद नहीं आती थी ...

एक दुनिया अजनबी - 35
द्वारा Pranava Bharti

एक दुनिया अजनबी 35- मनुष्य को अकेलापन खा जाता है, वह भुक्त-भोगी था | भविष्य का तो कुछ पता नहीं लेकिन अभी वह जिस घुटन से भरा हुआ था, ...

स्वतंत्र सक्सेना की कहानियाँ समीक्षा - 8
द्वारा बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

समीक्षा - काव्य कुंज-स्व.श्री नरेन्द्र उत्सुक समीक्षक स्वतंत्र कुमार सक्सेना पुस्तक का नाम- काव्य कुंज कवि -नरेन्द्र उत्सुक सम्पादक- रामगोपाल भावुकसहसम्पादक- वेदराम प्रजापति ‘मदमस्त’ धीरेन्द्र गेहलोत ’धीर‘प्रकाशक-परमहंस मस्तराम गौरीशंकर ...

एक यात्रा समानान्तर - 1
द्वारा Gopal Mathur

गोपाल माथुर 1 वह घिसटने लगती है. सारा थकान हमेशा पाँवों में ही क्यों उतर आती है ? कन्धे पर लटका छोटा सा बैग भी बोझ लगने लगता है. ...

कोड़ियाँ - कंचे - 8
द्वारा Manju Mahima

Part- 8 गरम चाय साइड टेबल पर रख गौरी सोते हुए बलदेव के पास बैठ, बालों में उँगलियाँ फिराते हुए बोली, ‘ अजी उठो,  म्हारा नंद जी का लाल ...

मेरा पति तेरा पति - 5
द्वारा Jitendra Shivhare

5 "मैं जानता हूं कि मेरे माता-पिता कल यहां आये थे। और उन्होंने तुम्हें जमकर डांटा है।" रमन ने कहा। "हां बेटा! आराधना का जीवन पहले ही कांटों से ...

कोख - दोषी कौन (पार्ट 1)
द्वारा किशनलाल शर्मा

"सॉरी",डॉक्टर रत्ना,कृतिका का चेकअप करने के बाद बोली,"अब तुम कभी भी माँ नही बन सकती।"कृतिका से प्रवीण की मुलाकात एक  फैशन पार्टी में हुई थी।प्रवीण को कृतिका की सुंदरता ...

विजित पोत
द्वारा Deepak sharma

विजित पोत यह संयोग ही था कि अस्थिर उन दिनों अंतर्राष्ट्रीय एक सेमिनार में भागीदारी के निमंत्रण पर स्वराज्या देश के बाहर, जिनेवा गयी हुई थीं जब स्वतंत्रता को ...

पश्चाताप के आंसू
द्वारा Gyaneshwar Anand Gyanesh

कहानी "पश्चाताप के आँसू" आज हमारा समाज अनेक बुराइयों और कुरीतियों से ग्रस्त है। जिसमें सबसे बड़ी और भयंकर बुराई है "दहेज प्रथा" आज इसी बुराई के कारण हमारे ...

अजीब दास्तां है ये.. - 7
द्वारा Ashish Kumar Trivedi

(7) मुकुल इस बात से खुश था कि रेवती भी उसे प्यार करती है। उसने कहा था कि उससे अच्छा जीवनसाथी उसे नहीं मिल सकता है। नेहा ने जिस ...

एक दुनिया अजनबी - 34
द्वारा Pranava Bharti

एक दुनिया अजनबी 34- इसी मृदुला को ढूँढ़ते हुए प्रखर उस स्थान पर पहुँचा था जहाँ उसके फ़रिश्तों ने भी कभी जाने की कल्पना न की होगी | कितना चिढ़ता था वह ...

स्वतंत्र सक्सेना की कहानियाँ - 7
द्वारा बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

संपादकीय                                                      स्वतंत्र कुमार सक्सेना की कहानियाँ को पढ़ते हुये                     वेदराम प्रजापति ‘मनमस्त’                      कहानी स्मृति की पोटली होती है| जो कुछ घट चुका ...