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मुझे बचाओ !! - 1
द्वारा Brijmohan sharma

(लड़कियों से) (मीटू पुरुष) ब्रजमोहन शर्मा (1) ( एक खूबसूरत शर्मीले अध्यापक को उसके स्टाफ व छात्राओं द्वारा परेशान किए जाने की मनोरंजक दास्तान ) १ उसके अनुसार सारे ...

नकली गहनें
द्वारा SHAMIM MERCHANT

"चाचाजी, नेहा के लिए, शादी के गहने मेरी तरफ से।""लेकिन बेटा, ये तो बहुत ज़्यादा है। तुम इतना बोझ अपने सिर पर मत लो, मैं कुछ न कुछ बन्दोबस्त ...

नाट्यपुरुष - राजेन्द्र लहरिया - 1
द्वारा राज बोहरे

राजेन्द्र लहरिया–नाट्यपुरुष 1   आख्यान    बूढ़ा क्यू में था! क्यू 'महामहिमावान’ के सार्वजनिक अभिनंदन करने के लिए लगी हुई थी, जिसमें स्त्री-पुरुष नौजवानों-जवानों से लेकर बूढ़ों तक की ...

इस सुबह को नाम क्या दूँ - महेश कटारे - 4 - अंतिम भाग
द्वारा राज बोहरे

महेश कटारे - इस सुबह को नाम क्या दूँ 4         फट-फट फटक, फटक फट फट की दनदनाती आवाज़ के साथ प्रवेश द्वार पर वजनी एन्फील्ड़ मोटर-साईकिल चमकी ...

इस सुबह को नाम क्या दूँ - महेश कटारे - 3
द्वारा राज बोहरे

महेश कटारे - इस सुबह को नाम क्या दूँ 3           बाबू के जाने के बाद रेडियो खोलकर शर्मा जाने क्या-क्या सोचते रहे। दूध पीकर सोने की ...

कुछ अल्फाज खामोश क्यों?? - क्या मैं लड़की हूं ?
द्वारा Bushra Hashmi

वह केवल एक राज़ था जिसे मैं जानना चाहती थी मेरे अंदर जो छिपा था । मैं खुद अपने अंदर के बदलाव से दंग थी ना जाने कैसी असमंजस ...

जिंदगी और जंग
द्वारा Anand Tripathi

जिंदगी और जंग की कहानी बड़ी विचित्र है। जीवन की धुरी पर एक साथ वर्षो तक घूर्णन करना कोई खेल नहीं है। बस एक अनुमान ही है जिसके सहारे ...

इस सुबह को नाम क्या दूँ - महेश कटारे - 2
द्वारा राज बोहरे

महेश कटारे -इस सुबह को नाम क्या दूँ 2         रामरज मिसमिसाकर फूट पड़ना चाहते थे। पर जानतेथे कि इससे स्थिति तो बदलेगी नही, उल्टे उन्हीं की हानि ...

सर्कस - 3 - अंतिम भाग
द्वारा Keval Makvana

                         हार्दिक ने उर्मी को मार डाला था। सभी कलाकार हैरान थे कि जिस जोड़े की शादी को एक महीने से भी कम ...

इस सुबह को नाम क्या दूँ - महेश कटारे - 1
द्वारा राज बोहरे

महेश कटारे - इस सुबह को नाम क्या दूँ 1         रामरज शर्मा अभी अपना स्कूटर ठीक तरह से स्टैंड पर टिका भी नहीं पाए थे कि उनकी ...

सर्कस - 2
द्वारा Keval Makvana

(उर्मी हार्दिक के पास जा कर बोली) उर्मी : हार्दिक! तुम समझ रहे हो ऐसा कुछ भी नहीं है। (हार्दिक हंसने लगा) हार्दिक : मैं जानता हूं कि ऐसी ...

मिडल क्लास - 1
द्वारा Jigar Joshi

अपने भारत में करीब 50% मिडल क्लास के लोग रहते हे llहर  समय के चलते इसमें संख्या हर साल बधता चला।   ये। वो?  हे  जो सपने तो इनके भी ...

यहाँ कुछ लोग थे - राजेन्द्र लहरिया - 4 - अंतिम भाग
द्वारा राज बोहरे

राजेन्द्र लहरिया कहानी यहाँ कुछ लोग थे 4                  और साहब, बाकी रहे लोगों का तनाव उनके चेहरों से ऐसे उड़ गया जैसे ठंडी हवा लगने से पसीना ...

काश
द्वारा Ana AT

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बूढ़ा मरता क्यों नही ?
द्वारा Neelima Sharrma Nivia

बूढ़ा मरता क्यों नी !!!रिश्ते  कितने मुश्किल होते हैं आजकल . एक जमाना था सबसे आसान  रिश्ता था  माँ- बाप का बच्चो से  और बच्चो का माँ- बाप से  ...

गृहकार्य और मिमामोरू पद्धति
द्वारा Anand M Mishra

  कोरोना के कारण देशबंदी में शिक्षकों को पढ़ाने का ‘जुनून’ होता है तथा साथ ही वे अपने छात्रों से ‘लगन’ के साथ ‘कठोर परिश्रम’ चाहते हैं। ये बच्चों ...

सर्कस - 1
द्वारा Keval Makvana

              रॉयल सर्कस शहर का प्रसिद्ध सर्कस था। वहा शो सप्ताह में तीन दिन होता था, इसलिए टिकट खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी। इस सर्कस के फेमस ...

स्वीकृति - 6
द्वारा GAYATRI THAKUR

    विनीता अपनी मौसेरी बहन मीनाक्षी के आने से बेहद खुश थी ,उसके आने से मानो  उसके अकेलेपन का दुख जैसे  कम हो  गया हो ..और  साथ ही  ...

आधार
द्वारा राज कुमार कांदु

रज्जो का पति कल्लू शहर में दिहाड़ी मजदूरी का काम करता था । बहुत दिन हुए उसने शहर से कुछ नहीं भेजा था । जब पिछली बार फोन किया ...

सपनों की कीमत
द्वारा Rama Sharma Manavi

   हर चीज की कीमत चुकानी पड़ती है,सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने पर हम अक्सर अकेले रह जाते हैं, इसे सफलता का अभिशाप भी कह सकते हैं या मूल्य,यह ...

दायरों के पार - 10
द्वारा नादान लेखिका

मैंने विशु को बहुत समझाया, बहुत बार माफी मांगी उससे, उसके सामने गिड़गिड़ाई भी मगर उसने जैसे कसम खा ली थी कुछ भी ना सुनने की। वो गुस्से में ...

रिश्तों में फूफा-मौसा-जीजाजी की भूमिका
द्वारा Anand M Mishra

भारत में रिश्ते चुनने की परम्परा रही है। प्राचीन काल में बहुत ही कम को स्वेच्छा से रिश्ते चुनने की छूट मिली थी। उदाहरण के लिए हम सावित्री, माता ...

यहाँ कुछ लोग थे - राजेन्द्र लहरिया - 3
द्वारा राज बोहरे

राजेन्द्र लहरिया कहानी यहाँ कुछ लोग थे  3                  और साहब, बाबा के निर्देशानुसार कार्य शुरू हो गया। लोगों ने गाँव में चंदा इक्ट्ठा करना शुरू कर दिया। ...

शैतानियाँ
द्वारा Brijmohan sharma

( कॉलेज के छात्रों की शैतानियाँ )  भूमिका  प्रस्तुत कहानी एक सत्यकथा पर आधारित है कि किस प्रकार एक बहादुर मिलिट्री रिटायर्ड प्रिंसिपल गुंडागर्दी से त्रस्त बदनाम कॉलेज को ...

ये कैसी मित्रता?
द्वारा Dinesh Tripathi

मित्र का शब्द बड़ा व्यापक है| इसेसखा,सखी मित,्र दोस्त आदि नाम से जाना जाता है लेकिन प्रचलन में दोस्त शब्द व्यापक है मित्रता के बाजार में एक नया शब्द अंग्रेजी का फ्रेंड ...

दायरों के पार - 9
द्वारा नादान लेखिका

एयरपोर्ट पहुंचकर विशु ने बताया कि उसे ओर निक को एमी ने अपनी कार से ही एयरपोर्ट ड्राप किया !" विशु की टैक्सी जाने कहाँ जाम में फंस गई ...

आधुनिकता और हमारा समाज
द्वारा Anand M Mishra

हम भारतीयों ने अपनी जीवन-शैली को त्याग कर पश्चिमी देशों की नकल की। कहने को ये पश्चिमी देश विकसित हैं। हमारे देश को अविकसित या विकासशील कहते हैं। मगर ...

“बिशुन बिशुन बार बार” – परम्परा का खोता हुआ प्रवाह
द्वारा Meenakshi Dikshit

उत्तर प्रदेश के मध्य भाग में लोक पर्वों की बहुतायत है। हिंदी पंचांग के कुछ माह तो ऐसे हैं जिनमें हर एक दो दिन बाद एक लोकपर्व आ जाता ...

यहाँ कुछ लोग थे - राजेन्द्र लहरिया - 2
द्वारा राज बोहरे

राजेन्द्र लहरिया कहानी यहाँ कुछ लोग थे 2                 ….हुआ यह क एक बार आषाढ, सावन और भादों–पूरे तीन महीने गुजर गए और इस गाँव की धरती पर आसमान ...

BOYS school WASHROOM - 20
द्वारा Akash Saxena "Ansh"

अविनाश, प्रज्ञा का  हाथ थामे जैसे-तैसे उसके पड़ोस के घर, गिन्नी के दरवाजे पर पहुँच ही गया। उसने कई बार ज़ोर-ज़ोर दरवाजा थप थपाया...तब जाकर गेट खुलते ही एक औरत ...

दायरों के पार - 8
द्वारा नादान लेखिका

मेरी ओर एमी की नजदीकियां हद से ज़्यादा बढ़ चुकी थी ! एक दूसरे के बिना रह पाना अब हमारे लिए सम्भव नही था ! अपने जीवनसाथियों से इतना ...

एक बिनती
द्वारा SHAMIM MERCHANT

"एक बिनती है आपसे। माँ को इस बारे में पता न चले।"यक़ीन नहीं हो रहा था, की मैं अपने चाचाजी के सामने, मजबूर होकर, मिन्नते कर रही थी। वह ...