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मैं हूँ अशोक।कलिंग के युद्ध के बाद मेरा जीवन बदल चुका था। मैंने युद्ध का मार्ग छ...
: : प्रकरण - 53 : : सब से बड़ा दूर उपयोग मोबाइल...
लेखक - एसटीडी मौर्य ️चुपके-चुपके आऊँगा – भाग 2जैसा कि मैंने पिछले भाग में बताया...
रात गहरी हो चुकी थी।मैं बालकनी में खड़ी नीचे देख रही थी।अर्जुन उस अजनबी महिला के...
रात के लगभग 2 बजे थे। बाहर तेज़ हवा चल रही थी। आसमान में बादल घिर आए थे और कभी-क...
अध्याय:6दृश्य: श्रद्धा का कमरा , छोटा पर सलीके से सजाया हुआ...!श्रद्धा और प्रीति...
दादासाहेब ने फ़ोन पकड़ा, उनकी उंगली डायलर पर थी, राख को बुलाने के लिए तैयार। लेक...
अध्याय 8: प्राचीन हथियार · बारेट (Barrett)काओ शिंग ने जमीन पर पड़े अन्य सामानों...
पहाड़ियों की चोटी पर स्थित उस विशाल और जर्जर हवेली को लोग 'चीखती हवेली'...
गाँव की ठंडी हवा और ढलते सूरज की सुनहरी रोशनी ने पूरे माहौल को एक जादुई अहसास...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
मंडप सजा हुआ था। शहनाई की आवाज़ पूरे घर में गूंज रही थी। सबके चेहरों पर खुशी थी… सिवाय मेरे। मैं लाल जोड़े में सजी थी, लेकिन दिल अंदर से टूटा हुआ था। आज मेरी शादी थी… लेकिन उस लड़...
मां कमरे में बड़बड़ाते हुए दाखिल होती है ....ये लड़की पता नही कब सुधरेगी ...!! वंदना: 8 बज गए है । सूर्य देवता सर पर है ,पर राजकुमारी अभी तक सोई हुई है ( वो खिड़की का परदा हटाते...
इस शहर में, सूरज उम्मीद जगाने नहीं उगता था; वह तो बस पिछली रात के ज़ख्म दिखाने उगता था। यह कोई ऐसी जगह नहीं थी जो संविधान या जज के हथौड़े से चलती हो। यहाँ, सिर्फ़ एक आदमी का कानून...
आइस सील एज ओपन बीटा शुरू होता है “कुल्हाड़ी से काटना, बड़ा भाई मर गया!” “उनका कहना है कि निर्माण स्थल पर कुछ मजदूरों ने उसे पैसे उधार लेने के कारण पीट-पीटकर मार डाला!” ज़ि...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
लेकिन ठंडी हवेली, मंडप सजाया गया है, गुलाबी और सुनहरी डेकोर के बीच शहनाई की हल्की धुन। समय: रात 11 बजे। लाल और सुनहरे फूलों से सजी जगह में शहनाई बज रही है। फूलों की खुशबू के...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
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