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मत्स्य कन्या - 6

अशवीश्वर जी मालविका जी से उनकी परेशानी पूछते हैं...." बताइए आपको क्या कष्ट है जिसका समाधान हम कर सकते हैं....." मालविका जी त्रिश्का को दिखाते हुए कहती हैं..." महाराज जी मेरी बेटी को कुछ सपने बहुत परेशान करते हैं जिसकी वजह से ये बहुत परेशान रहती है...."

अब आगे.............

अशवीश्वर महाराज त्रिश्का के हाथ को पकड़कर उसकी लकीरों को ध्यान से देखते हुए कहते हैं...." असंभव...?..... मत्स्य वंश की वरदानी कन्या....." अशवीश्वर महाराज इतना कहते ही अपनी आंखें बंद कर लेते हैं लेकिन उससे पहले सबको शांत रहने के लिए कह देते हैं...." आप सब थोड़ी देर शांत रहना मैं अभी इनके बारे में देखकर बताता हूं..."

मालविका जी अशवीश्वर महाराज की बात सुनकर हड़बड़ा जाती है और तुरंत त्रिश्का से कहती हैं......" त्रिशू तुम सब जाओ बाइक राइडिंग के लिए जाओ बच्चों आगे की बात में महाराज जी से पूछ लूंगी...."

लेकिन त्रिश्का मालविका जी को सवालिया नज़रों से देखती हुई पुछती है......" मां इन्होंने अभी क्या कहा...मत्स ये मत्स क्या होता है...?..."

मालविका जी त्रिश्का की बात को अनसुना करते हुए कहती हैं....." त्रिशू तू आज की छुट्टी ऐसे खराब मत कर जा सबके साथ..." सिद्धार्थ की तरफ आश भरी नजरों से देखते हुए कहती हैं....." सिद्धार्थ पायल जाओ बच्चों..."

सिद्धार्थ मालविका जी से त्रिश्का को ले जाने के लिए सुनकर खुश हो जाता है वो वैसे भी यहां से जाकर त्रिश्का के साथ कुछ टाइम बिताना चाहता था... इसलिए त्रिश्का से कहता है...." त्रिश्का चलो वैसे भी हमें लेट हो जाएगा पार्टीसिपेट लेने में...."

पायल भी एक्साइटेड होकर कहती हैं....." हां त्रिशा चल जल्दी आ इन्हें हराने में बड़ा मज़ा आएगा...."

सिद्धार्थ आंखें छोटी करके पायल को उंगली दिखाता हुआ बोला...." बच्चू हमसे जरा बचके रहना..."

रौनक बड़े शान से काॅलर उठाते हुए कहता है..." हम हैं तूफान तुम तिनके हमारे आगे टिक नहीं सकते...."

पायल एटिट्यूड में कहती हैं...." देखते ये तूफान हमारी वाॅटर रेंजर के आगे कब तक टिक सकता है...."

त्रिश्का इन सबकी बात सुनकर चलने के हां कह देती है और मालविका जी से पूछती हैं....." मां आप अकेले घर चली जाओगी यहां....."

मालविका जी उससे कहती हैं...." हां त्रिशू तू चिंता मत कर मैं चली जाऊंगी । मैं तो आ जाऊंगी....तू अपना ध्यान रखियो..."

त्रिश्का : हां मां आप आराम से घर चले जाना....

त्रिश्का वहां से सबके साथ चली जाती हैं......

रौनक सिद्धार्थ के कंधे पर हाथ रखकर उसके साथ आगे बढ़ जाता है और पायल त्रिश्का से बातें करते हुए नीचे पहाड़ी की तरफ बढ़ रही थी..... सिद्धार्थ नीचे जाते जाते कई बार पीछे पलटकर त्रिश्का को देख रहा था जिसे रौनक बखूबी समझ रहा था इसलिए उसे चिढ़ाते हुए कहता है....." मुड़ मुड़ कर न देख मुड़ मुड़ के....." सिद्धार्थ अचानक कहीं इस बात से उसे घूरता है , जिससे रौनक चुपचाप आगे बढ़ने लगता है लेकिन उसके पास जाकर धीरे से कहता है...." और भाई ये आंखों से बातें कब तक चलेगी.... क्या कभी त्रिश्का को प्रपोज भी करेगा....."

सिद्धार्थ उससे कहता है......" अभी नहीं यार अभी मैं त्रिश्का की फीलिंग को समझ नहीं पाया , पता नहीं क्या वो भी मुझसे प्यार करती है...."

रौनक उसे समझाता है...." मेरी माने तो उसे प्रपोज कर दे जो भी होगा पता चल जाएगा कम से कम तू इस तरह उसे छुपकर तो नहीं देखेगा....और जहां तक मुझे लगता है त्रिश्का को मैंने सिर्फ तुझे ही नोटिस करते देखा है...."

रौनक की बात सुनकर सिद्धार्थ उसे कंधे उसे पकड़कर एक्साइटेड होकर पूछता है...." सच में..."

रौनक : हां....

सिद्धार्थ ख्यालों में खोता हुआ कहता है......" फिर तो मेरा प्यार ज़रूर कामयाब होगा...."

रौनक उसे चिढ़ाते हुए कहता है...." हम होंगे कामयाब, हम होंगे कामयाब एक दिन हो मन में है विश्वास पूरा है विश्वास..."रौनक हाथ फैलाकर ये गाना गा रहा था जिससे त्रिश्का और पायल उसकी अचानक की हुई हरकत से हंसने लगती है लेकिन सिद्धार्थ उसे बहुत देर से घूर रहा था और उसे गले से पकड़कर उसे परेशान करता हुआ कहता है ...." रुक जा तुझे कामयाब बनाता हूं......"

रौनक उसी नौटंकी आवाज में कहता है...." अबे साले छोड़ लूला बनाएगा क्या फिर तेरी शादी में मैं ही दिखूंगा सबसे अलग दूल्हे का लूला यार......" सिद्धार्थ उसे छोड़ देता है

पायल और त्रिश्का इन दोनों की नौटंकी पर ठहाके लगा रही थी...,पायल उसके पास आकर कहती हैं......" सच में कभी कभी तुझे दौरे पड़ते हैं क्या पागलपंती के...."

रौनक उसे उकसाते हुए कहता है....." ये सब तेरी संगती का असर है...." पायल उसकी कमर पर एक मुक्का जड़ देती है...

त्रिश्का सबसे कहती हैं....." तुम्हारी ये नौटंकी खत्म हो गई हो तो चले या यही सारा टाइम इस ड्रामे में बिताना है....."

सिद्धार्थ त्रिश्का से कहता है......" हां देखो त्रिशा कबसे कह रहा हूं चुपचाप चल लेकिन इस जोकर को तो कहीं भी शुरू हो जाने की आदत है...."

त्रिश्का चुपचाप आगे चलकर कहती हैं....." अब चलना भी है या नहीं...."

तीनों उसके पीछे पीछे आगे बढ़ने लगते हैं......उधर मालविका जी अशवीश्वर महाराज के आंखें खोलने का वैट कर रही थी थोड़ी देर में अशवीश्वर महाराज अपनी आंखें खोलते हैं और ढूंढती हुई नजरों से देखते हुए पूछते हैं...." आपकी बेटी कहां है...?...."

मालविका जी हाथ जोड़कर कहती हैं..." महाराज जी मैंने उसे भेज दिया.... मैं नहीं चाहती कि वो आगे की बात सुने... आपने उसकी हाथों की लकीरों को पढ़ लिया है बस आप समाधान बता दीजिए....."

अशवीश्वर महाराज कहते हैं...." आपकी बेटी कोई साधारण कन्या नहीं है.....

मालविका जी अशवीश्वर महाराज की बात काटते हुए कहती हैं...." माफ़ करना महाराज जी मैं ये बात अच्छे से जानती इसलिए उसे इन सब बातों से दूर रखना चाहती हूं लेकिन वो बार बार आकर उसे सपनों के जरिए सचेत करते रहते हैं...."

अशवीश्वर महाराज कहते हैं....." सचेत तो वो करेंगे, आपकी बेटी उनके वंश से सम्बंधित है इसलिए आप उसे उसके अस्तित्व से विहीन नहीं कर सकती ....."

मालविका जी अशवीश्वर महाराज की बातें ज्यादा अच्छी नहीं लग रही थी इसलिए उखड़े मन से कहती हैं....." इसलिए तो महाराज कोई ऐसा तरीका बताइए जिससे मेरी बेटी को मैं उनसे दूर कर सकू...."

अशवीश्वर महाराज मालविका जी की जिद्द के आगे ज्यादा कुछ नहीं कहते ...." ठीक है आप जैसा चाहे...बस आप अपनी बेटी के साथ साथ बहुतों की जान को खतरे में डाल रही है, ,,,"

आगे की बात अ‌शवीश्वर महाराज अपने आप से कहते हैं..." उस कन्या का जन्म किसी खास उद्देश्य से हुआ है, ये उसके उद्देश्य को अवरोध कर रही है प्रभु जाने आगे इनका क्या होगा.....?..."




.................to be continued...........

त्रिश्का का जन्म किस मकसद से हुआ है...?

जानने के लिए जुड़े रहिए

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