Tum hi to ho - 4 Queen of Night द्वारा प्रेम कथाएँ में हिंदी पीडीएफ

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Tum hi to ho - 4

चलिए शुरू करते



यहां पर
सिद्धी भी बाकी सारे काम कर घर से निकल गयी उसका आज जॉब इंटरव्यू था वैसे तो उसके बेस्ट फ्रेंड क्रिश की मदत से बहोत सारी जानकारी मिल चुकी थी और उसी ने उसे दो तीन कंपनी के इंटरव्यू के बारे मैं बताया था वो बाहर जा ही रहीं थी की उसे एक कॉल आया जिसपे bestie लिखा था
उसने मुस्कराते हुए कॉल उठाया उसने हैलो कहा ही था की सामने से रिया ने बेस्ट ऑफ लक जान don't worry तुझे जॉब मिल जायेगी टेंशन ना ले ठीक है सब बढ़िया होगा
वहीं एक लड़के की आवाज आयी सिद्धी रिया सही केह रही है हमें पता है तू कर लेगी और हाँ हम दोनों आंटी जी से मिलकर भी आयेंगे तो टेंशन फ्री होके इंटरव्यू देना
सिद्धी ने उनकी बात सुनी तो खुश होकर कहा thank you सो मच आप दोनों हमेशा मेरा साथ देते हो मैं बहोत लकी हू की आप जैसे दोस्त मिले मुझे
क्रिश कहता है बस हाँ सिद्धी मेरी जान हम फ्रेंड है यार
सिद्धी कहती ओके
रिया कहती है क्रिश सही केह रहा है और अब जल्दी जा लेट हो जायेगा
फोन कट कर एक जॉब इंटरव्यू के लिये चलि जाति है
सिद्धि बाहर जाकर रिक्शा ढूँढने लगती
थोड़ी देर बाद रिक्शा मिलती है और वो चलि जाती है

यहां
शुभ भी निधि को लेकर चला जाता है उसे कॉलेज के सामने कार रोकी निधि उतर गयी उसने कहा bye कहा
फिर शुभ अपने ऑफिस की और चला जाता है
वहीं वो एक बिल्डिंग के आगे उनकी कार रुकती वहीं एक उसकी हम उम्र का आदमी आकर दरवाजा खोलता है शुभ ने मास्क पेहन रखा था जिसे सिर्फ उसकी काली गहरी आखें ही दिख रहीं थीं
वो गाड़ी से उतरा और बिल्डिंग की और चल पड़ा उसके अंदर आते ही जहां ऑफिस मैं हलचल हो रहीं थीं सब शांत होगया
सब अपनी जगह खडे होगये और एक साथ गुड मॉर्निंग कहते हैं
शुभ सिर्फ एक नजर देख लिफ्ट की और बढ़ता है वहीं जब वो चला जाता है तो सब अपने काम में लग जाता है वहीं शुभ अपने कैबिन मैं बैठा था की दरवाजे से एक आवाज आयी may i come in sir उसने कहा come in और देखा तो उसका सेक्रेटरी राघव आया था
राघव ने कहा सर आज दो घंटे बाद आपकी मीटिंग है. mr मनोहर के साथ
शुभ ने कहा ठीक है
और वो जो इंटरव्यू रखे थे उसका क्या हुआ
सर वो दिग्विजय सर दो तीन दिन के इंटरव्यू के बाद मैनेजर की जगह किसे देनी है वो देखेंगे
शुभ ने सुना तो उसने मन में सोचा कि दिग्विजय अंकल देखेंगे तो सही चुनेंगे और फिर वो राघव से केहने लगा ठीक है राघव ये दिग्विजय अंकल देख लेंगे तुम गाड़ी रेडी करो हमें जाने मैं टाइम लगेगा और हाँ रेस्टोरेंट बुक किया है ना
राघव ने कहा येस सर
ओके तुम जा सकते हो
राघव अपने कैबिन से बाहर आया
खुदसे केहने लगा ये सर भी पता नहीं हमेशा ऐसे ही रहते लगता है कि अगर गलती से भी कोई गलती करदी तो ये सजा देने मैं कोई गलती नहीं करेंगे

आगे की कहानी बाद मैं