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विवेक बगल वाली सीट पर बैठा आँखें फाड़े सब कुछ देख रहा था। उसकी आँखों के सामने जो...
बड़ी इच्छा थी, श्रीरामलला के दर्शन करूँ। ट्रेन से उतरते ही अयोध्या में कदम रखा।...
ध्रुव की ताराभाग - २७लेखिका "अनामिका"विजय जी ने घर लौटते ही ध्रुव का नंबर मिलाय...
हिम्मत के रंग लेखक: विजय शर्मा एरीगाँव के किनारे बसे छोटे-से घर में रवि अपने पित...
अर्शी ने खुद को सामान्य किया और दरवाज़ा खोला।वो घबराकर बोली, “भैया… आप यहाँ क्या...
कहा जाता है कि जब अल्फाज़ कम पड़ जाएं, तो आंखें सब कह देती हैं... लेकिन जब दर्द...
अध्याय:20पूर्ण समर्पण और परमात्मा का संगीत महानता केवल कौशल या ...
### पहचान### सीज़न 1 — अध्याय 1### मजीठा का नौजवानएक सच्ची घटना से प्रेरित काल्प...
अपना कौन?जब दौलत चली गई, तब रिश्तों के असली चेहरे सामने आए…लेखक: Kantibhai Ratho...
हास्य व्यंग्य यदि आज रावण जीवित होता विजयादशमी की बधाई देने मित्र यमराज मेरे...
प्रस्तावना भारत एक ऐसा देश है जहाँ प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि 'माता' माना जाता है। जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और जंगलों के कटने सेपरेशान है, तब हमारे देश के...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
एक नई शुरुआत सुबह के करीब छह बजे थे। छोटे से शहर की गलियों में अभी पूरी तरह चहल-पहल शुरू नहीं हुई थी। कहीं किसी घर के आंगन में झाड़ू लग रही थी, तो कहीं चाय की पहली खुशबू हवा...
विराट का आलीशान घर – सुबह रसोईघर में संपूर्णा (चाय बनाते हुए, मुस्कान के साथ) बोली - अच्छा, आज विराट जी को जल्दी जाना है, तो चाय गर्म और नाश्ता तैयार। विवान, अपना खिलौना इध...
"किसी अनकहे सच का पता लगाना ठीक उतना ही मुश्किल है, जितना आग की लपटों से किसी ज़िंदा इंसान को निकाल लाना..." एक ऐसे ही अनकहे सच की तलाश में था राजू। उसे खुद मालूम नहीं था...
ઓટલો ગામની એ સવાર આજે પણ મારી આંખો સામે એવી જ ઊભી થાય છે સૂરજ હજી પૂરો ઉગ્યો ન હતો આકાશમાં હળવો લાલ રંગ પથરાયો હતો ઘરના આંગણામાં પડેલી ઠંડી માટી પર મારા નાના પગલા પડતા અને હું દોડત...
पीपल का चबूतरा, हुक्के की गुड़गुड़ और वहम की रातउस रात मोनू सिर्फ अपनी माँ की आवाज़ सुनना चाहता था।उसे नहीं पता था कि उस एक आवाज़ की तलाश उसे ऐसी चीज़ के सामने खड़ा कर देगी, जो शाय...
कलयुगी महा-उत्पाद और अधर्म की भयानक ज्वालाएँ भड़कने से ठीक १०० वर्ष पूर्व, जब काल-चक्र ने एक पावन युग की रचना का निर्णय लिया, तब पृथ्वी पर परम-पवित्र भूमि सिंभाला की स्थापना हुई। स...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
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