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कथानक का परिचय (Synopsis):यह कहानी आधुनिक समाज, रिश्तों की उथल-पुथल, मानवीय मूल्...
कहानी - शीनू की मंज़िलशीनू इस वर्ष शहर की नृत्य प्रतियोगिता में प्रथम आई थी। उसक...
आधुनिकता की अंधी दौड़ में जब शहर के कंक्रीट के मकान ऊंचे होते जा रहे थे, तब गाँव...
कौशल राज की विशाल राजसभा में, जब स्वर्णिम राज से लाई गई एक-से-एक सुंदर और बेशकीम...
किताबों के पन्नों में मेरा एक अलग संसारमुझे पढ़ने का शौक बचपन से ही कुछ अलग तरह...
ध्रुव की तारा भाग - ११लेखिका "अनामिका"हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद जब विजय औ...
कलयुगी महा-उत्पाद और अधर्म की भयानक ज्वालाएँ भड़कने से ठीक १०० वर्ष पूर्व, जब का...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 71— एकांश का रहस्यअनन्या की नज़र सामने खड़े...
शाम का समय था। बारिश अभी-अभी रुकी थी। सड़क पर पानी की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थ...
(नूरगढ़ की चौड़ी पक्की सड़क पर ढलती हुई धूप ने एक अजीब सी चमक बिखेर रखी थी। हवा...
स्वर्णिम गढ़ यानी अपने आप में एक पूर्ण गढ़ । यह वह भूमि थी जहां की हवाओं में खूबसूरती बहती थी , जहां प्यार की छांव थी और शांति का पहरा था। वक्त कब बदला और इस शां...
जन्म से कॉलेज तक मेरा नाम अंकित है। मैं उत्तराखंड के चमोली जिले के एक छोटे से गाँव, त्रिकोट, का रहने वाला हूँ। मेरा जन्म 29 दिसंबर को मेरे मामा के गाँव में हुआ था। मेरे नाम की...
सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी। "अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
मैं... अपने ऑफिस का काम जल्द से जल्द निपटाने में व्यस्त था तभी मुझे कुछ हल्की सी चिल्लाने की आवाज सुनाई दी, पर मुझे अपने ऑफिस का काम जल्दी खत्म करना था इसलिए मैंने उस आवाज को नजर...
एक अनजान मुलाकातशहर की भीड़ हमेशा की तरह अपने काम में व्यस्त थी।सड़कों पर गाड़ियों का शोर था। लोग जल्दी-जल्दी अपने ऑफिस जा रहे थे। कोई फोन पर बात कर रहा था, तो कोई अपने काम के लिए...
बहुत पुरानी बात नहीं है, यह उस दौर की कहानी है जब लोग आँखों से दिलों का हाल पढ़ लिया करते थे। शहर के बीचों-बीच बसा पुराना कॉलेज, जिसकी दीवारों पर इतिहास की परतें जमी थीं और गलियारो...
भाग १ — एक दिन, कई जिम्मेदारियाँ सुबह छह बजे अलार्म बजा। मिहिर ने आँखें खोलीं, लेकिन कुछ क्षणों तक बिस्तर पर ही पड़ा रहा। बगल में उसकी पत्नी निशा अभी सो रही थी। सामने की द...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
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