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"शेख़ बाबा हम्ज़ा की बहन आरामगाह में लाईं जा चुकीं है।" रुक्मणि ने उनके कमरे के...
Episode 20 – शादी से पहले की खामोशियाँ शादी की तारीख तय हो चुकी थी।कोई ढोल-नगाड़...
एक बूँद ज़िंदगीजब रास्ता खत्म हो जाए, तब इंसानियत रास्ता बनाती है।--- प्रस्तावना...
समय का पहिया घूमता रहो। देखते-देखते घर को सगरा अनाज, धन-दौलत ओर सामान खतम हो गओ।...
अनुरागिनी का रहस्यमय वचन अध्याय 3: स्कूल का पहला नंबर और वो अदृश्य रजाईहथेली के...
अगली सुबह राहुल समय से काफी पहले ऑफिस पहुँच गया.पहले दिन की घबराहट अब थोडी कम थी...
कहानी: एक लड़की की___(मीशा अपने कमरे में जाती है... और सोचती है... काव्य से बात...
एपिसोड 37 – मेरी हमशक्ल, मेरी बहन“हैलो… दीदी।”उस एक आवाज़ ने पूरे कमरे की हवा रो...
अगले दिन सब थके हुए थे कि सब सोते और खाते ही रहे रुम में ही।आज की शाम सब होटल के...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 60: अंतिम पुस्तकालय का रास्तानैना की आँखें खुली हुई थ...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
इस तरह एक सदियां बीत गए।। लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी। और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।" "प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...
बड़ा सा फ्लैट…जहाँ पहले हँसी गूंजती थी, वहाँ अब एक अजीब-सी खामोशी थी। 7 साल का शिवांश दौड़ता हुआ अपने पापा करण के पास आया…उसकी आँखों में मासूम खुशी थी। लेकिन जैसे ही वो करीब पहुँचा...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
शहर में उस दिन सुबह से ही बारिश हो रही थी। आसमान बादलों से ढका था और कॉलेज की सड़क पर जगह-जगह पानी जमा था। आरव हमेशा की तरह कॉलेज के बस स्टॉप पर अकेला खड़ा था। हाथ में कित...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
गंगा के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव सूर्योदय के साथ ही जाग जाता था। सुबह के पाँच बजे थे। आसमान अभी अँधेरा था, लेकिन पूरब की दिशा में हल्की लालिमा दिखाई देने लगी थी। दूर मंदिर...
उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ऐसा आलम था कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी मिट्टी छोड़कर सैकड़ों मील दूर परदेस जाने को मज...
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