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दादासाहेब राख से प्यार नहीं करते थे; वे राख से होने वाली तबाही की पूजा करते थे।...
अप्सराहरुको गाथा नमस्कार सरस्वती मातालाई, शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई। स्वर्गको...
लेखक -एसटीडी मौर्य ️दूरभाष +917648959825कटनी मध्य प्रदेश (भारत )एक बार मैं ट्रेन...
विष्णु भक्त प्रह्लाद का जन्मरानी कयाधू ने अब तक तीन पुत्रों को जन्म दिया था, जिन...
अध्याय 5: अध्याय 5: पहली हत्या का इनाम: नाग-मानव जनजाति के पुजारी की भर्ती का स्...
एपिसोड 7: भरोसा टूटे?बंगला फिर शांत था, लेकिन हवा में तनाव। अनन्या सोफे पर बैठी,...
गोलियों की आवाज़ अब और करीब आ चुकी थी।मैं डर से कांप रही थी… और अर्जुन के हाथ मे...
इतिहास के पन्नों से 21 ...
शानवी उस फाइल वाली बात को बार-बार याद करकेखुद को ही समझा रही थी —वो बोली - मैं स...
एपिसोड 8: गिल्ट, घाव और अनसुनी चीखेंकमरे की खामोशी ज़ोया को काटने को दौड़ रही...
आइस सील एज ओपन बीटा शुरू होता है “कुल्हाड़ी से काटना, बड़ा भाई मर गया!” “उनका कहना है कि निर्माण स्थल पर कुछ मजदूरों ने उसे पैसे उधार लेने के कारण पीट-पीटकर मार डाला!” ज़ि...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
माना जाता है कि दुनिया का लगभग 97 % इतिहास समय के साथ लुप्त होते गया है . इतिहास का लिखित विवरण करीब 6000 वर्ष पूर्व आरंभ हुआ था . इतिहास तो अनंत है फिर भी उसके पन्नों में कुछ छो...
Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...
दरिया, परिंदे और वो अजनबी अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ान विशेष एपिसोड: “रक्तपंख बनाम नरकवीर” [दृश्य 1 – महानगर का बाहरी इलाका, संध्या] लाल सूरज डूब रहा है। धुएँ से भरी हवा में सायरनों की आवाज़ गूँजती है...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
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