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इश्क और अश्क By Aradhana

"नहीं! ऐसा मत करो, छोड़ दो please..... जाने दो! नहीं! नहीं!"

"रात्रि उठ! ऐसा कहकर मेघा (रात्रि की मां) ने रात्रि को झकझोर दिया। कितनी बार कहा है इस लड़की को की छोड़...

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जब रिश्ता प्यार बन जाए. By Priyam Gupta

शाम का वक्त था और Priyam अपने कमरे में खड़ी थी।
खिड़की से हल्की धूप आ रही थी, और कमरे में सन्नाटा था।
आज कुछ अलग सा लग रहा था।
दिल हल्का-हल्का धड़क रहा था, और मन में हल्की बेचैन...

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यादो की सहेलगाह - रंजन कुमार देसाई By Ramesh Desai

उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी.

उन्हें कांदिव...

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दुश्मनी के दरमियान इश्क By Shivraj Bhokare

वो रात, जहाँ सब शुरू हुआ

उस रात की खामोशी में एक अजीब सा तूफान छुपा था।
हवा ठंडी थी, मगर उसके भीतर एक अनकही बेचैनी थी, जैसे कोई राज धीरे-धीरे परतों से बाहर आने को तैयार हो।
शह...

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काल कोठरी By Neeraj Sharma

ये उपन्यास सत्य पर एक ऐसी प्रेरित कहानी है, जो लिखने मे मुझे काफ़ी तकलीफ झेलनी पड़ी। कारण था, बस एक ही स्थान वही रहे और पात्र बदले जाये फिर सोचा नहीं सब कुछ ही सच हो।...

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बिल्ली जो इंसान बनती थी By Sonam Brijwasi

Heroine: शानवी सिंह
Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान)

शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था।
बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी By Jyoti Prajapati

सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई By Ramesh Desai

15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे.

मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...

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Trikon - एक्शन सीरीज़ By Varun Vilom

दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है।

नदी के किनारे-किनारे।

रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है।

बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है।

पैरों में...

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दीवाने की दिवानियत By kajal jha

एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट
दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...

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वो रात, जहाँ सब शुरू हुआ

उस रात की खामोशी में एक अजीब सा तूफान छुपा था।
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दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है।

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