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मूसलाधार बारिश पूरे शहर पर कहर बरपा रही थी।काले बादलों ने आसमान को पूरी तरह निगल...
अंजलि की कार शहर की सडकों पर तेजी से आगे बढ रही थी.सडक पर गाडियों की भीड थी, लेक...
Leval :-1शीर्षक : नंगे पाँव वाली पद्मश्री-----by rakshita ( karnataka)उत्तर कन्न...
“संसार की चिंता छोड़ो और यह खोजो कि यह चिंता करने वाला ‘मैं’ कौन हूँ? जब तक अहंक...
इस बीती का पूर्वा...
ज्यादातर साइबर ठग ईडी, सीबीआई, क्राइम ब्रांच, पुलिस, आईटी, आरबीआई, ट्राई का डर द...
रात बीत चुकी थी...लेकिन राधा के लिए सब कुछ बदल चुका था।वह अपने कमरे में बैठी थी।...
उधर देवपुर में जैसे ही सूरज ढला, रात का अंधकार शहर पर किसी अजगर की भांति लिपट गय...
अक्षय ने गाड़ी धीमी कर दी। उसकी धड़कन अचानक तेज़ हो गई। क्योंकि ये वही हवेली थी…...
शैलजा सिंह की एंट्री – नया कमरा, नई शुरुआत… या कुछ और?शाम का धुंधलका धीरे-धीरे श...
संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
घना अंधेरा जंगल. रात का न जाने कौन- सा पहर था. चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था कि अपनी ही साँसों की आवाज किसी अनजान खतरे की आहट लग रही थी. आसमान को काले बादलों ने निगल लिया था और...
प्रिया पाठको,, यह एक सामाजिक कहानी है । जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है । अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ?? ....... .......
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
कहानी की शुरुआत एक अंधेरे कमरे से होती है, जहाँ एक लड़की लोहे की चेन से लॉक होती है। फिर कमरे का दरवाज़ा खुलता है और एक आदमी अंदर आता है। वह उस लड़की के पास जाता है और उससे कहता...
समर्पित उन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं। प्रस्तावना यह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। मेरे और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक...
मैं... अपने ऑफिस का काम जल्द से जल्द निपटाने में व्यस्त था तभी मुझे कुछ हल्की सी चिल्लाने की आवाज सुनाई दी, पर मुझे अपने ऑफिस का काम जल्दी खत्म करना था इसलिए मैंने उस आवाज को नजर...
"रात का गहरा सन्नाटा था, जिसे सिर्फ तेज़ बारिश और बिजली की कड़क तोड़ रही थी। 8 साल की छोटी आन्या अपने रास्ते से भटक कर घने जंगल के बीचों-बीच खड़ी थी। उसके नन्हे पाँव कीचड़ में...
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