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बेटी का पिताएक पिता का प्रेम, बेटी की मजबूरी और पछतावे की भावुक कहानीलेखक: कांति...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 85— तीन आत्माएँ, एक चुनावकिले के भीतर अंधेर...
यह लेख तुम्हारी रामायण-व्याख्या को आगे बढ़ाता है। प्रचलित कथा के प्रसंगों और तुम...
डॉ. आर्यन ने अपनी फाइल बंद की और विराट की तरफ देखा। उनकी आवाज में वह गंभीरता थी...
रास्ते से जा रहा था कि अचानक ही बारिश शुरू हो गई। छाता तो लिया नहीं था, क्योंकि...
मेरी हार्टब्रेक की कहानीवो मेरी ज़िंदगी में वापस आई थी, लेकिन पहले जैसी नहीं रही...
नीला आकाशएक सपना, एक संघर्ष और अपनी पहचान पाने की कहानीसुबह का आसमान बिल्कुल साफ...
बहन के समझाने के बाद राजू ने कांपते हाथों से हितेश का नंबर मिलाया।फोन की घंटी बज...
रिश्ते की बातसमय कभी रुकता नहीं है। वह अपनी रफ़्तार से निरंतर चलते रहता है। कमल...
“कुछ चाहिए क्या?&r...
एक शहर की लड़की गांव घूमने आती है। उसे क्या पता था कि इस गांव से वापस जाने का रास्ता बंद हो जाएगा। क्या वो लड़की इस जबरदस्ती के रिश्ते को कभी अपनाएगी? या इस कैद से भाग जाएगी? और ज...
कहते हैं कि ज़िंदगी में कुछ मुलाकातें अचानक होती हैं। न कोई योजना होती है, न कोई इंतज़ार। बस एक दिन कोई अनजान इंसान हमारी दुनिया में आता है और धीरे-धीरे हमारी कहानी का ऐसा हिस्सा...
आज जब मैं खुद को आईने में देखती हूँ, तो कुछ अलग-सा महसूस होता है। आईने में चेहरा तो वही दिखाई देता है, लेकिन लगता है जैसे जीवन में न जाने कितने बदलाव आ गए हैं। एक समय था, जब लोग...
एक 19 साल की लड़की आईने के सामने खड़ी थी। वह बिल्कुल नई नवेली दुल्हन की तरह लग रही थी। उसकी आँखों में चमक थी और चेहरे पर अपार खुशी। वह खुद को आईने में ऐसे निहार रही थी, जैसे कोई...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।" "प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...
डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की तीन लघुकथाएँ (1) लाइक एंड कॉमेंट्सरात के लगभग साढ़े ग्यारह बजे रामलाल जी का हृदय गति रुकने से देहांत हो गया। उनका बड़ा बेटा शंकरलाल गाँव से सैकड़ों मील दू...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
फूलों से सजा और जगमगाती रोशनी में नहाया मल्होत्रा विला। ढोल-बाजे की आवाज़ के शोर के बीच हर कोई खुशी से नाच रहा था। मौका था करोड़पति कपड़ा व्यापारी बिशम्बर मल्होत्रा की 23 वर्षीय...
सुबह का वक्त, 'हेवेन डेल' इंटरनेशनल स्कूल का कॉरिडोर। लॉकर रूम और कॉरिडोर बच्चों की भीड़ से भरा हुआ है। तभी एक तरफ से लारा और सोफिया अपने सादे कपड़ों में, किताबों का ढेर थ...
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