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दो साल और बीत चुके थे। अनिका की मास्टर डिग्री पूरी हो चुकी थी और यूरोप के कई प्र...
मेरी जिंदगी की कहानी — जो मैंने जिया है, वही लिखा हैमेरा नाम धर्मपाल सरोज है। मै...
"बाबा आज क्या क्या करना है?" दरगाह के अंदर नौशीन ने चारों तरफ़ देखते हुए पीर से...
भाग ९ — एक बड़ा फैसलाअगली सुबह मिहिर की आँख खुली तो उसके मन में एक ही बात थी—“क्...
उसको ऐसा लगा था कि बात बहुत लम्बी चलेगी, दुर तक जाएगी, अपना ज्ञान बघारूंगा,...
अतिरिक्त समय और संसाधनों से निःशुल्क शिक्षा की सामुदायिक व्यवस्थालेखक: शिवम कुमा...
सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आई तो शैलजा की आँख खुली। रात की घटनाएँ उसे...
---- : पञ्चब्रह्मोपनिषद्:---पञ्चब्रह्मोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शैव उपनि...
रोजगार और शिक्षा व्यवस्था - सूरत बदलने की जरूरतभारत आज दुनिया का सबसे युवा देश ह...
Mr. & Ms. FakeEpisode 26 – The Girl Who Knew Saanviअगली सुबह...सूरज निकल चुका था...
भाग १ — एक दिन, कई जिम्मेदारियाँ सुबह छह बजे अलार्म बजा। मिहिर ने आँखें खोलीं, लेकिन कुछ क्षणों तक बिस्तर पर ही पड़ा रहा। बगल में उसकी पत्नी निशा अभी सो रही थी। सामने की द...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
ઓટલો ગામની એ સવાર આજે પણ મારી આંખો સામે એવી જ ઊભી થાય છે સૂરજ હજી પૂરો ઉગ્યો ન હતો આકાશમાં હળવો લાલ રંગ પથરાયો હતો ઘરના આંગણામાં પડેલી ઠંડી માટી પર મારા નાના પગલા પડતા અને હું દોડત...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
एक ऐसी दुनिया जहां कमजोरो की कोई जगह नहीं बस ताकतवर लोग ही हुकूमत चलते है और ताकत का मतलब है "पैसा" अगर तुम्हारे पास पैसा है तो तुम दुनिया की हर चीज हासिल कर सकते हो। लोग आ...
संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
घना अंधेरा जंगल. रात का न जाने कौन- सा पहर था. चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था कि अपनी ही साँसों की आवाज किसी अनजान खतरे की आहट लग रही थी. आसमान को काले बादलों ने निगल लिया था और...
प्रिया पाठको,, यह एक सामाजिक कहानी है । जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है । अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ?? ....... .......
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