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सिया को रातें हमेशा से पसंद थीं।दिन की भीड़, लोगों की आवाज़ें और शहर की भागदौड़...
अध्याय - 10गायत्री और मानस के बीच एक बार फिर प्यार का नया पुल बंध गया था। 'स...
करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ................... शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे क...
उस दौर के बच्चे थे कुछ पीढ़ियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें इतिहास किताबों में पढ़ता ह...
इथन सोच में डूबा था उसने खुद गोदाम में कुबूल किया था कि 'रेड डैगर्स' को...
सूना गलियारा और वह पुरानी हवेलीसूरज डूब चुका था और आसमान पर काले बादलों ने ऐसा प...
लखनऊ की उस तेज़ दोपहर की धूप में भी आरव को अपने भीतर एक भयानक बर्फ़ीला सन्नाटा म...
सात फेरों की रस्म पूरी हो चुकी थी।अग्नि को साक्षी मानकर रुद्रांश राठौर और अन्विक...
और जैसे ही दरवाजा खुलता है...सब लोग अंदर प्रवेश कर जाते हैं और अंदर जो नजारा था...
शाम का धुंधलका अब एक गहरी, रहस्यमयी रात में तब्दील हो रहा था। गुजरात के एक शांत...
समर्पित उन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं। प्रस्तावना यह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। मेरे और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक...
Reincarnated as Villainess: The Man Who Hated Her Became Her Obsession वह एक ऐसी कहानी पढ़ रही थी जिसमें एक क्रूर विलेनैस अपनी निर्दयता के लिए बदनाम थी। एक ऐसी लड़की, जिसने अपनी श...
अनजानी मुलाकात लखनऊ की बारिश में भीगती वह शाम कुछ ख़ास थी। गोमती नगर के एक छोटे और शांत कैफे में मंद-मंद संगीत बज रहा था और बाहर की बूंदों की आहट कांच की खिड़कियों पर साफ़ सुनाई द...
प्रिया पाठको,, यह एक सामाजिक कहानी है । जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है । अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ?? ....... .......
रात के लगभग दस बज रहे थे। लोधी रोड स्थित CBI Special Crime Division के office से बाहर निकलते हुए शक्ति ने अपनी SUV स्टार्ट की। पिछले छह घंटों से चल रहे operation ने उसे थका दिया था...
बात उन दिनों की है, एक मकान बना कर रहना, एक मिसाल और योग्यता थी। मकान अगर मंजिले हो, तो कया बात, बहुत अमीर समझे जाने वाला शक्श....." हाहाहा, "हसता हुँ, आपने पर.... ये दोगल...
आख़िरी लोकलरात के 11:52।ट्रेन छूटने ही वाली थी।अंगद दौड़ते हुए प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँचा।फोन कंधे और कान के बीच दबा हुआ—“बस 2 मिनट… मैं train में हूँ… भेज दूँगा।”दरवाज़े बंद होने लगे।व...
स्वरा..... स्वरा....उठो स्वरा ....कब तक यूं ही सोती रहोगी ?? क्या माँ....सोने भी दो ना.... बिल्कुल भी नहीं..... चलो जल्दी उठो जाओ देखो तुम्हारी बरडी तुम्हारा कब से इंतजार कर...
शाम का वक्त था और Priyam अपने कमरे में खड़ी थी। खिड़की से हल्की धूप आ रही थी, और कमरे में सन्नाटा था। आज कुछ अलग सा लग रहा था। दिल हल्का-हल्का धड़क रहा था, और मन में हल्की बेचैन...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
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