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कबीर ने जब मुझे डिनर के लिए पूछा तो मैं एक मिनट के लिए सन्न रह गई। पिछले डेढ़ सा...
David Riya को Vicky के पास जाते हुए देखता है। गुस्से में David की आँखें लाल हो ज...
आख़िरी दस्तकएक ऐसा दरवाज़ा… जिसे रात के बाद कभी नहीं खोलना था।️ लेखककान्तिभाई रा...
कहानी: एक लड़की ( भाग - 5 )मीशा के 24वें Birthday वाले दिन...उनके घर कुछ रिश्तेद...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 57 : शहर में खुली अधूरी किताबशहर की रात हमेशा की तरह...
सिया बालकनी में खड़ी होकर अपने पति को ऑफिस जाते हुए देख रही थी। सुबह की हल्की धू...
उस लंबे चुंबन के बाद...सब कुछ जैसे शांत हो गया।मैं धीरे-धीरे उससे अलग हुई।हम दोन...
विक्टोरिया पुस्तकालय के ऊपर से गिरती चट्टानों और मलबे के धमाकों से पूरी जमीन हिल...
लखनऊ की सर्दियों की रात थी। दिसंबर का महीना, घड़ी में रात के साढ़े ग्यारह बज रहे...
रात कितनी ही घनी और गहरी हो, सुबह का सूरज तो निकलना ही है। हर रोज़ की तरह आज भी...
एक ऐसी दुनिया जहां कमजोरो की कोई जगह नहीं बस ताकतवर लोग ही हुकूमत चलते है और ताकत का मतलब है "पैसा" अगर तुम्हारे पास पैसा है तो तुम दुनिया की हर चीज हासिल कर सकते हो। लोग आ...
रुद्रपुर की पहाड़ियों पर आज रात आसमां से पानी नहीं, बल्कि साक्षात कहर बरस रहा था। बादलों के गरजने की गूँज ऐसी थी मानो पहाड़ अपना सीना पीट रहे हों। मूसलाधार बारिश ने नीचे की घाटियों क...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
खुली खिड़की से आती ठंडी हवा प्रीतम के कुछ कुछ सफेद हुए बालों को धीरे धीरे सहेला रही थी। 56 साल का प्रीतम अपनी कुर्सी पर बैठा बैठा कुछ सोच रहा था ।बाहर से आता शोर मानो उसके कानो तक...
बड़ा सा फ्लैट…जहाँ पहले हँसी गूंजती थी, वहाँ अब एक अजीब-सी खामोशी थी। 7 साल का शिवांश दौड़ता हुआ अपने पापा करण के पास आया…उसकी आँखों में मासूम खुशी थी। लेकिन जैसे ही वो करीब पहुँचा...
सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी। "अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...
नोट - इस लेख में बॉलीवुड फिल्मों में पुरानी डांसर पर चर्चा की गयी है जो आज गुमनाम हैं …. बॉलीवुड के नृत्य आज दुनिया भर में मशहूर है . बॉलीवुड नृत्य अब ऑस्कर अकादमी अवार्ड से...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
मैं... अपने ऑफिस का काम जल्द से जल्द निपटाने में व्यस्त था तभी मुझे कुछ हल्की सी चिल्लाने की आवाज सुनाई दी, पर मुझे अपने ऑफिस का काम जल्दी खत्म करना था इसलिए मैंने उस आवाज को नजर...
समर्पित उन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं। प्रस्तावना यह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। मेरे और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक...
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