Bayaan - Part 5

  • 162
  • 57

Part 5 .  बारे में जान रही थी, उतना ही मुझे लग रहा था कि वह खुद भी अपनी भावनाओं को पूरी तरह नहीं समझ पाई थी। वह बार-बार लिखती थी कि उसे अभिनव से प्यार नहीं है, लेकिन उसकी हर दूसरी बात किसी न किसी तरह अभिनव पर आकर रुक जाती थी। मैंने अगला पन्ना खोला। वहाँ लिखा था— "आज मैंने फिर खुद से कहा कि मुझे अभिनव के बारे में नहीं सोचना चाहिए। आखिर मैंने उसे केवल दो बार ही देखा है। पहली बार स्कूल में और दूसरी बार पवन चाचा के यहाँ हुई नौटंकी में।" "लेकिन पता