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और जैसे ही दरवाजा खुलता है...सब लोग अंदर प्रवेश कर जाते हैं और अंदर जो नजारा था...
शाम का धुंधलका अब एक गहरी, रहस्यमयी रात में तब्दील हो रहा था। गुजरात के एक शांत...
"थोड़ा पानी से दूर खड़ा रहा कीजिए..."शिवाय की बात सुनते ही शक्ति ने उसे घूरकर दे...
बोध ------कहानी सगरहे की जबरदस्त कहानी मेरी पिरये सबसे जयादा..... ( बोध ) व...
अध्याय 6: वह रातउस रात अंगद घर नहीं गया।वह स्टेशन के बाहर लगी एक लोहे की बेंच पर...
अभिराम - हंसते हुए प्यार में तो पापड़ बेलने ही पड़ते हैं और इंतजार भी करना पड़ता...
ईशान के कंधों पर रखा वह पुराना महोगनी वायलिन जैसे-जैसे हवा में अपनी सुरीली साँसे...
देश के करोड़ों मतदाताओं के द्वारा चयनित प्रधानमंत्री की मिमीक्री! वो भी नेता प्रत...
तिलस्मीभाग द्वितीयरात के अँधेरे में आकाश पर तारे टिमटिमा रहे थे। उदय सिंह अमर सि...
जयगुरु श्रीमान् बांसुरी की वह धुनभाग द्वितीय — जागरणरामलाल तेज कदमों से दौड़ता ह...
शाम का वक्त था और Priyam अपने कमरे में खड़ी थी। खिड़की से हल्की धूप आ रही थी, और कमरे में सन्नाटा था। आज कुछ अलग सा लग रहा था। दिल हल्का-हल्का धड़क रहा था, और मन में हल्की बेचैन...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है। यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्क...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
चाय की एक मशहूर दुकान के सामने, शहर की व्यस्त सड़क पर गाड़ियों का शोर अपने चरम पर था। वहाँ खड़ी एक सफेद सेडान कार के बोनट से पीठ टिकाए कबीर खड़ा था। उसकी सादी सूती शर्ट की आस्तीनें कोह...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
अनंत के उस पार पति की रहस्यमयी मृत्यु के बाद मीरा नीलगढ़ लौटती है, लेकिन वहाँ उसे बदलती तस्वीरें, रहस्यमयी डायरी और ऐसे संकेत मिलते हैं जो उसकी पूरी पहचान पर सवाल खड़े कर देते ह...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
दोपहर का समय था।चारों ओर सूखी और पथरीली ज़मीन फैली हुई थी। दूर-दूर तक छोटी-छोटी पहाड़ियाँ दिखाई दे रही थीं। उनके बीच से एक सँकरा कच्चा मार्ग निकल रहा था। उसी मार्ग के किनारे एक बड़...
अभिशप्त रूह का तांडवदुनिया के नक्शे पर कुछ जगहें ऐसी होती हैं जिन्हें कुदरत ने शायद स्वर्ग का द्वार बनाने के लिए रचा था, लेकिन इंसानी फरेब और खून ने उन्हें नर्क का रास्ता बना दिया।...
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