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सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी। स्विट्जरलैंड की ठंडी हवा कमरे में तैर...
शहद की गुड़िया- प्रकरण " फ्लोरा की प्रसूति के पहले...
ऋगुवेद सूक्ति-(२२) की व्याख्या त्वं ज्योतिषा वितमोववर्थ--ऋगुवेद,--१/११/२२भावार्थ...
मुझे क्या बेचेगा रुपैया" सिर्फ एक गाना नहीं है। ये उस हर लड़की की आवाज़ है जिसे...
महाभारत की कहानी - भाग-२३८ युधिष्ठिर के शरीर में लीन होकर विदुर का महाप्रयाण प...
वीर के कॉल उठाते ही। अचानक एक इंसान की राक्षसों की तरह हस्ती हुई image सामने आ ग...
अनाथ अमाया को ईश्वर की कृपा से एक बार फिर माता-पिता मिल गए थे। शायद देशमुख परिव...
25.खुद को मत बेचोसजी हुई इन बाज़ारों में,तुम अपनी कीमत मत लगवाना,रिश्तों के, रिवा...
एपिसोड 20: बच्चों की अंतरराष्ट्रीय पहचान और नई उम्मीद रिया और आरव का स्कूल अब पट...
तलवार हवा में थी।सब कुछ एक पल में हुआ।परास ने देखा और चिल्लाया :"वर्धान—!"पर वर्...
"छाया की जिंदगी का एक ही सपना था—विशाल का प्यार। लेकिन जब उसका सपना बिखर जाता है, तो उसके साथ टूटती है उसकी मोहब्बत की दीवानगी। उसी पल उसमें जन्म लेता है आत्मसम्मान और नारी-शक्...
सुबह की किरणें कमरे में फैल चुकी थीं। लगभग 45-46 का चौबे, पहलवान जैसा गठीला शरीर लिए, आँगन में कसरत कर रहा था। उसकी भारी आवाज़ गूँजी— “नीचे आ जा और कसरत कर, वरना नाश्ता नहीं मिल...
वो अब तक शराब के चार बोतल ख़तम कर चुकी थी। एक आलीशान कमरा… जिसमें दीवारों कुछ महंगी पेंटिंग्स लगे थे । वो कोई आम पेंटिंग्स नहीं थे, हर जगह अलग अलग जानवरों के पेंटिंग्स थे , जैसे...
मुक्तेश्वर। छोटी-सी जगह. भरा पूरा कस्बा। ब्रिटिश शासन में किसी अंग्रेज़ गवर्नर का निवास स्थान होने के कारण यहाँ पर अधिकांशतः इमारतें उसी काल की बनी हुई थीं- लाल और मज़बूत पक्की ईं...
"तमन्ना को कभी नहीं पता चला कि उसकी ज़िंदगी कब सुबह से शाम और शाम से रात में बदलती जाती है।गली के खेल, माँ की व्यस्तता और पिता की चुप्पी के बीच वो बस एक बच्ची थी—जिसके सपनों की...
डिस्को का माहौल गर्म था, म्यूजिक की तेज़ धुन में लोग मस्ती के रंग में रंगे हुए थे। लेकिन एक लड़की थी, जो बाकी सब से बिल्कुल अलग दिख रही थी। उसका नाम था सनजना, और वो किसी अप्सरा जैस...
सागरपुर नाम का शहर, जो न तो पूरी तरह गाँव था और न ही पूरी तरह महानगर। यहाँ न तो मेट्रो की गूंज थी और न ही ऊँची-ऊँची इमारतों की चकाचौंध। लेकिन यहाँ के लोग अपनी ज़िंदगी जीने के लिए स...
ह कहानी मैं उन सभी दिलों को समर्पित करती हूँ, जो टूटी हुई हालात में भी मोहब्बत पर यकीन रखते हैं। उन लड़कियों के लिए, जो अकेली होकर भी अपने परिवार के लिए लड़ती हैं, और उन लड़कों...
अपने जन्म वर्ष 1953 से अपने जीवन की युवावस्था और दाम्पत्य तथा नौकरी शुरुआत तक की अवधि का आत्मगंधी लेखा- जोखा मैंने अपनी आत्मकथा के पहले खंड “ आमी से गोमती तक “ में दे दिया है जिसे...
प्रारम्भिक जीवन और आध्यात्मिक झुकाव वृंदावन की पावन गंध, राधे-राधे की गूँज और कृष्ण नाम की रसधारा… इन्हीं भावों के बीच प्रेमानंद जी महाराज का जीवन आरंभ हुआ। उनका जन्म सामान्य पर...
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