कविता कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Poems in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultures. Th...Read More


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रंग बदलता आदमी, बदनाम गिरगिट - 2 By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

रंग बदलता आदमी,बदनाम गिरगिट 2 काव्य संकलन- समर्पण- देश की सुरक्षा के, सजग पहरेदारों के, कर कमलों में-...

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जीवन वीणा - 4 By Anangpal Singh Bhadoria

दुर्लभ देह पाय मानव की, जो उन्नति पथ नहीं बनाते ।वह कृतघ्न हैं मंद बुद्धि हैं, अपना जीवन व्यर्थ गंवाते ।।अमृत पात्र दिया परमेश्वर, उसमें भरते गंदा पानी ।वीणा घर में रखी पुरानी, कदर...

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जीवन के सप्त सोपान - 11 - अंतिम भाग By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

जीवन के सप्त सोपान 11 ( सतशयी) ------------------------------ अर्पण- स्नेह के अतुल्नीय स्वरुप,उभय अग्रजों के चरण कमलों में...

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में और मेरे अहसास - 44 By Dr Darshita Babubhai Shah

चलो चलते है निद की नगरी lचलो देखे सपनों की नगरी ll   ********************************* हुश्नण को बे-पर्दा देख चाँदको शरारत सूझी है आज lमुहब्बत की इन्तहा देख चाँदको शरारत सूझी...

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पहला - मेरी कविताएँ By Shalvi Parihar

मेरी नींदसारा दिन जागूँ तो, बेजान-सी हो जाती हूं।साँस लेती हूं, पर निढ़ाल-सी हो जाती हूं।एक आँख लगने का इंतज़ार है, मुझेफिर सांस लेती मेरी ये आँखें है, जिन्हें मैं अक्सर बोलते सुनती...

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सुनो...!!! By ARUANDHATEE GARG मीठी

सुनो...!!!! तुम बनारस हो जाओ, मैं उसमें समाहित रस हो जाऊंगी । तुम प्रेम मग्न कृष्ण की बांसुरी हो जाओ, मैं उसकी मधुर ध्वनि में समाहित राधा हो जाऊंगी । तुम चौरासी घाट हो जाओ प्रिय, म...

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भारत - 4 By नन्दलाल सुथार राही

जय हिन्द'भारत' काव्य संग्रह के अंतर्गत भाग तीन में भारत की सगुण भक्ति धारा के प्रमुख एवं भारत की सांस्कृतिक धारा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रभु श्रीराम एवं श्री कृष्ण से सम्ब...

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आज रावण को अधजला ही रहने दोगे क्या..?? By ARUANDHATEE GARG मीठी

क्या ख्याल है बादलों...??? आज रावण को अधजला ही रहने दोगे क्या? बुराई पर अच्छाई की जीत का झूठा ढोंग करने वालों को , बुराई पर झूठी जीत भी नही दिलाओगे क्या? आज रावण को अधजला ही रहने द...

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मेरे शब्द मेरी पहचान - 12 By Shruti Sharma

आज की कविताएं1:-) वजह बन जाएँ 2:-) दोस्त नज़र आता हैआशा है आप सभी को ये पसंद आएंगी । उम्मीद करती हूँ आप लोग इसे पढने के बाद ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसे पहुँचाएंगे । आप सभी का ये...

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तुम बिन जिन्दगी (मेरी कवितायें) By निखिल ठाकुर

नाम जिन्दगी का क्या दें अब हम ...तन्हा ए पल जीये है यूं उम्र भर मैने...

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पिंजरे कि चिड़िया By Yayawargi (Divangi Joshi)

पाऊं मे जंजीर आज भी है जिसका नाम संस्कार हैये हमारी कोई सुरक्षा नहींये उनका अंहकार हैबेमतलबी सवाल तेरे जवाब बने बहस मेरे बोलना बना बदतमीजीऐसी एक चिड़िया कि कहानी"मुंह चलना बंध कर ।च...

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मोक्षधाम - 5 - अंतिम भाग By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

मोक्षधाम 5 (मिटा सके श्मशान क्याॽ) समर्पणः- इस धरा धाम के संरक्षण में, जिन्होंने अपना शास्वत जीवन- हर पल बिताया, उन्ही सात्विक-...

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खिमुली काव्य - खंड-1 By जयदीप पत्रिका

पहली कवितालिखता हूँ एक कविता लिखता हूँ एक कविता, कुछ लाइनों में, ऐ मेरे वतन, तेरे उन जवानों के लिए। जिन्होंने अपना सीना चीर दिया गोलियों से, और नहीं आने दी तेरे आंगन में कोई दरार।।...

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जीवन पथ By Dr Mrs Lalit Kishori Sharma

जीवन पथ है बड़ा अनोखाफिर भी मानव चलता जाए।कभी उजाला कभी अंधेराना जाने कब जीवन में आए।जीवन पथ पर चलते जानायही विडंबना है जीवन की ।घोर अंधेरा ऐसा छायाकाले बादल यू मंडराएजीवन पथ अब नज...

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समय की नब्ज पहिचानों - 4 - अंतिम भाग By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

समय की नब्ज पहिचानों 4 काव्य संकलन- समर्पण- समय के वे सभी हस्ताक्षर, जिन्होने समय की नब्ज को,...

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सरल नहीं था यह काम - 5 - अंतिम भाग By डॉ स्वतन्त्र कुमार सक्सैना

सरल नहीं था यह काम 5 काव्‍य संग्रह स्‍वतंत्र कुमार सक...

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बोलता आईना - 4 - अंतिम भाग By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

बोलता आईना 4 (काव्य संकलन) समर्पण- जिन्होंने अपने जीवन को, समय के आईने के समक्ष, खड़ाकर,उससे कुछ सीखने-...

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रंग बदलता आदमी, बदनाम गिरगिट - 2 By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

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में और मेरे अहसास - 44 By Dr Darshita Babubhai Shah

चलो चलते है निद की नगरी lचलो देखे सपनों की नगरी ll   ********************************* हुश्नण को बे-पर्दा देख चाँदको शरारत सूझी है आज lमुहब्बत की इन्तहा देख चाँदको शरारत सूझी...

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पहला - मेरी कविताएँ By Shalvi Parihar

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सुनो...!!! By ARUANDHATEE GARG मीठी

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बोलता आईना - 4 - अंतिम भाग By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

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