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बारिश की वो पहली मुलाक़ात By July Writes

जुलाई का महीना था। आसमान कई दिनों से बादलों को थामे बैठा था, जैसे किसी इकरार का इंतज़ार कर रहा हो। और फिर उस दिन… पहली बारिश शुरू हुई।

कॉलेज की छुट्टी के बाद आईशा बस स्टॉप पर खड...

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राज या हक़ीकत By Priyanka Saini

यह कहानी है मासूम – सी मान्या की.. जो अभी केवल 23 साल की है । जो फिलहाल में एक स्कूल टीचर है। जितनी मासूम.. उतनी ही प्यारी है, लेकिन एक दिन उसकी पूरी दुनिया पलट सी जाती है। जब उसकी...

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1926 की अमावस की वो खौफनाक रात By RAAHULL SHARMA

भाग 1: देवपुर रियासत

सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था।

चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...

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कॉल By sky

हर दिन एक ही कॉल, ठीक 12 बजे, और फिर सन्नाटा। और जब भी कोई कॉल उठाए, सिर्फ एक आवाज़  "मुझे क्यों मारा?" ये सिलसिला कुछ सालों तक यूँ ही चला, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने स...

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दरवाजा: काली हवेली का श्राप By Piyu soul

रात का सन्नाटा…इतना गहरा था कि जैसे हवा भी डर रही हो चलने से।

गाड़ी धीरे-धीरे कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ रही थी।चारों तरफ घना जंगल… सूखे पेड़ों की टहनियाँ ऐसे हिल रही थीं जैसे किसी...

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जब रिश्ता प्यार बन जाए. By Priyam Gupta

शाम का वक्त था और Priyam अपने कमरे में खड़ी थी।
खिड़की से हल्की धूप आ रही थी, और कमरे में सन्नाटा था।
आज कुछ अलग सा लग रहा था।
दिल हल्का-हल्का धड़क रहा था, और मन में हल्की बेचैन...

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षड्यंत्र By Ratna Pandey

" इंस्पेक्टर मैं सच कह रही हूँ। उस दिन मेरे घर पार्टी में लगभग 110 लोग आए थे। सभी मेरे दोस्त थे। खाने में चिकन करी, फिश करी और अंडा करी तीनों ही थीं। कुछ लोग चिकन नहीं खाते थे,...

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काश हम अजनबी होते तो खुश होते By Avinash

रात के दो बज चुके थे। दिसंबर की सर्द हवाएं खिड़की के कांच से टकराकर एक सिहरन पैदा कर रही थीं। कमरे के भीतर का सन्नाटा उस बाहरी ठंड से भी ज्यादा सर्द और भारी था। गीता बेड के एक कोने...

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सात फेरे हम तेरे - सेकेंड सीजन By RACHNA ROY

इस तरह एक सदियां बीत गए।।

लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी।

और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...

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कर्मजली कोख... By kalpita

कलावती हॉस्पिटल के लेबर रूम में प्रसव पीड़ा को चुपचाप सहन कर रही थी रेशमा…
ना कोई चीख, ना चित्कार…
बस चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी।
पीला पड़ा चेहरा और सफेद होती आँखें किसी और ही...

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बारिश की वो पहली मुलाक़ात By July Writes

जुलाई का महीना था। आसमान कई दिनों से बादलों को थामे बैठा था, जैसे किसी इकरार का इंतज़ार कर रहा हो। और फिर उस दिन… पहली बारिश शुरू हुई।

कॉलेज की छुट्टी के बाद आईशा बस स्टॉप पर खड...

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राज या हक़ीकत By Priyanka Saini

यह कहानी है मासूम – सी मान्या की.. जो अभी केवल 23 साल की है । जो फिलहाल में एक स्कूल टीचर है। जितनी मासूम.. उतनी ही प्यारी है, लेकिन एक दिन उसकी पूरी दुनिया पलट सी जाती है। जब उसकी...

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1926 की अमावस की वो खौफनाक रात By RAAHULL SHARMA

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सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था।

चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...

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कॉल By sky

हर दिन एक ही कॉल, ठीक 12 बजे, और फिर सन्नाटा। और जब भी कोई कॉल उठाए, सिर्फ एक आवाज़  "मुझे क्यों मारा?" ये सिलसिला कुछ सालों तक यूँ ही चला, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने स...

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दरवाजा: काली हवेली का श्राप By Piyu soul

रात का सन्नाटा…इतना गहरा था कि जैसे हवा भी डर रही हो चलने से।

गाड़ी धीरे-धीरे कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ रही थी।चारों तरफ घना जंगल… सूखे पेड़ों की टहनियाँ ऐसे हिल रही थीं जैसे किसी...

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जब रिश्ता प्यार बन जाए. By Priyam Gupta

शाम का वक्त था और Priyam अपने कमरे में खड़ी थी।
खिड़की से हल्की धूप आ रही थी, और कमरे में सन्नाटा था।
आज कुछ अलग सा लग रहा था।
दिल हल्का-हल्का धड़क रहा था, और मन में हल्की बेचैन...

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षड्यंत्र By Ratna Pandey

" इंस्पेक्टर मैं सच कह रही हूँ। उस दिन मेरे घर पार्टी में लगभग 110 लोग आए थे। सभी मेरे दोस्त थे। खाने में चिकन करी, फिश करी और अंडा करी तीनों ही थीं। कुछ लोग चिकन नहीं खाते थे,...

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काश हम अजनबी होते तो खुश होते By Avinash

रात के दो बज चुके थे। दिसंबर की सर्द हवाएं खिड़की के कांच से टकराकर एक सिहरन पैदा कर रही थीं। कमरे के भीतर का सन्नाटा उस बाहरी ठंड से भी ज्यादा सर्द और भारी था। गीता बेड के एक कोने...

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सात फेरे हम तेरे - सेकेंड सीजन By RACHNA ROY

इस तरह एक सदियां बीत गए।।

लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी।

और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...

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कलावती हॉस्पिटल के लेबर रूम में प्रसव पीड़ा को चुपचाप सहन कर रही थी रेशमा…
ना कोई चीख, ना चित्कार…
बस चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी।
पीला पड़ा चेहरा और सफेद होती आँखें किसी और ही...

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