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# आस्था की छाया## *एक दार्शनिक नाटक - अंधविश्वास और सत्य की यात्रा*---## **पात...
जीतेशकान्त पाण्डेय- कक्षा पाँच उत्तीर्ण कर आपने मिडिल स्कूल में प्रवेश लिया। मिड...
उत्तर प्रदेश के Pratapgarh जिले में बसे छोटे और शांत गाँव Kusumi की एक अलग ही पह...
नंद...
बचपन की आख़िरी चिट्ठी(एक हिस्सा, पर पूरी कहानी)हमारा पहला दिन था प्लेस्कूल का।मै...
रोमी के बोले शब्द विजय के दिमाग में घूम रहे थे आज वह अकेले में बैठ कर बहुत रोया...
जानवी :- आप कहना क्या चाहते हो पापा ?अशोक : - बेटी ये सब आदित्य के वजह से हो रहा...
सिय्या मुंबई की भीड़ में भी अकेली सी चल रही थी। हाथ में फाइल, चेहरे पर हल्की थका...
ससुराल से एक साल बाद मायके पहुँची थी |बरामदे की चौखट पार की ही थी कि सामने से फू...
रात का माहौल और गहरा गया था। करन बिस्तर से उठने की कोशिश कर रहा था, अनाया उसके प...
मम्मीमम्मी - मम्मी -मम्मी कहाँ हो आप ' अभिनव अवाज देता हुआ घर में आता है। बेटा मैं यहां स्टोर मे हूं। दीवाली की सफाई कर रही हूँ। अभिनव ये क्या है ? बक्शे मे क्या टटॉल रही हो। म...
पुणे,महाराष्ट्र, इंडिया।।।।।। सनशाइन कैफे,, कैफे के अंदर बहुत सारे लोग मौजूद थे,,क्योंकि अभी दोपहर का वक्त हुआ था,,वहीं कैफे में कुछ लोग आपस में बात कर रहे थे,,वहीं कुछ स्टूड...
पहली मुलाकात गर्मी की छुट्टियाँ खत्म हो चुकी थीं, और स्कूल का पहला दिन था। स्कूल का गेट बच्चे और उनके माता-पिता से भरा हुआ था। हर कोई अपने दोस्तों से मिलने के लिए उत्साहित था। बि...
हॉस्पिटल में आईसीयू के बाहर की हवा भारी थी, जिसमें फिनाइल की तीखी गंध और वेंटिलेटर की 'बीप-बीप' करती डरावनी आवाज़ मिली हुई थी। सान्वी वर्मा के हाथ में पकड़ा हुआ वह बीस लाख...
मैं यह कहानी दोबारा लिख रही हूँ, लेकिन इस बार बिल्कुल वैसे, जैसे मैंने इसे अपने दिल में महसूस किया था। मेरी पहले की कहानी "दिल से दिल तक: एकतरफा सफर" से यह काफी मिलती-जुलती...
इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की.... शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है। क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें? तुम उठकर क्यों चली आई मुझे ब...
इस कहानी में हर मोड़ पर मौत खड़ी है। हर कदम के साथ खतरा बढ़ता जाता है और ज़िंदगी व मौत के बीच की रेखा मिटती चली जाती है। यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है, जिसका किसी भी वास्तविक व्...
मुंबई की उस रात में उमस नहीं, एक दम घोटने वाली खामोशी थी. उपनगर की एक तंग गली के आखिरी छोर पर स्थित उस जर्जर इमारत का कमरा नंबर सत्रह, किसी जिंदा कब्र जैसा लग रहा था. घडी की सुइयां...
आरव एक साधारण सा युवक था। सुबह काम पर जाना, शाम को बाइक से शहर की सड़कों पर घूमना और रात को अपने छोटे से कमरे में थक कर सो जाना — यही उसकी ज़िंदगी थी। उसे नहीं पता था कि उसकी यह सा...
कबीर" टाईम 7:20 ,लोकेशन: कबीर का फ्लैट मुंबई... बाहर हो रही धीमी बारिश...और बैकग्राउंड में पंखे की आवाज... कबीर: चेयर पर बैठा हुआ लेपटॉप खुला है, लेकिन स्क्रीन पर वही C...
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