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आधी रात का डररात के 12 बजे। कमरा शांत। हल्की–सी हवा परदे हिला रही है।तीनों गहरी...
उस दिन के बाद से सिया कई दिनों तक ऑफिस नहीं आई। अर्शित रोज़ अपने केबिन में बैठकर...
आदित्य जान बूझकर जानवी को जलाने के लिए कहता है --आदित्य :- कंश मामा ..!तिरु :- य...
रूम नंबर 101(सस्पेंस थ्रिलर हिन्दी कहानी | लगभग 1500 शब्द)लेखक: विजय शर्मा एरीबर...
यह कहानी है आरोही की, जो अपनों के बीच रहकर भी पराई थी। यह कहानी है उस अजनबी की,...
खन्ना मेंशन की उस सुबह में सूरज की पहली किरण ने केवल अंधेरा नहीं छँटाया था, बल्क...
W-22 : The Door That Should Not ExistSEASON 1 – “The First Crossing”कहते हैं कुछ...
एपिसोड 4 — "नीली आँखों वाले रक्षक और एक नया रहस्य"पुराने बंकर के बाहर तनाव अपने...
⭐ एपिसोड 67 — “हवेली का ज़िंदा साया”कहानी — अधूरी किताबतहखाने में अचानक सब कुछ श...
न्यायको पर्खाइमा निर्मला“आमा, होमवर्क सकेर छिट्टै फर्किन्छु है।”निर्मलाले सानो प...
"कभी-कभी ज़िंदगी से भागने वाले, सबसे ज़्यादा ज़िंदा महसूस करने वाले होते हैं..." यह उपन्यास एक प्रेम कथा नहीं है, न ही कोई रहस्यपूर्ण थ्रिलर। यह उन साँसों की कहानी है, ज...
एक ज़माना था… जब समय घड़ी की सुइयों से नहीं, इंतज़ार की धड़कनों से मापा जाता था। उस छोटे से कस्बे की सुबह बड़ी सादी होती थी। सूरज निकलता, चूल्हों में आग जलती, और गलियों में झाड...
पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था। उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था। उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...
रात इतनी गहरी थी कि चाँद की रौशनी भी शायद डर के छिप रही थी। बारिश की बूंदें पत्थरों पर जोर से गिर रही थीं, और हर तरफ सिर्फ अंधेरा था।यह कहानी है २२ साल के आरव की, जो कुछ ही समय पहल...
रामू: जो खुद को बहुत समझदार मानता है। श्यामू: रामू का पड़ोसी, जो थोड़ा सीधा है लेकिन मौके पर चौका मारता है। बसंती चाची: मोहल्ले की "न्यूज़ चैनल"। इन्हें सबके घर की खबर होती...
खामोश पेंटिंग की पहली साँस पुरानी गली की वह कला-दुकान हमेशा की तरह उस शाम भी आधी अँधेरे में डूबी हुई थी। बाहर बारिश की हल्की बूँदें पत्थरों से टकरा रही थीं और अंदर हवा में पुरान...
अनामिका और अविनाश दोनों उस पहाड़ी के किनारे टूटी हुई रेलिंग के पास खड़े डूबते हुए सूरज को देख रहे थे।आसमान में गुलाबी नारंगी आभा पीछे छोड़ता हुआ सूरज अपनी गति से नज़रों से ओझल हो र...
रामेसर अब गाँव का भोला-सा लड़का नहीं रहा। समय ने उसे माँजा, अनुभवों ने उसे गढ़ा, और शिक्षा ने उसे ऊँचाई दी। अब वह अपने व्यक्तित्व में एक निखार लिए चलता है, साफ़-सुथरे कपड़े, चमचमात...
19 जनवरी 2022 सुबह 10:30 बजे "वो सच में आयेंगे ना काजल?" फिर आवाज बदलकर "कितना बार यही सवाल करेगी पागल" नॉर्मल आवाज में "कितनी ही बार की हु" फिर आ...
1 एक बुद्धिमान मनुष्य था, बड़े काम करने वाला मनुष्य था, और प्रभु ने उसके प्रति प्रेम की कल्पना की, और उसे ग्रहण किया, कि वह ऊपर के निवासों को देखे, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के बुद्...
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