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Ep-1 दो दुनिया एक किस्मतदिल्ली.सुबह के ठीक आठ बजे.सर, नौ बजे लंदन ब...
**भाग सात: हवेली की चौखट पर**दरवाज़े पर पड़ने वाली वो ज़ोरदार दस्तक और पल्लवी के मा...
रामपुर गाँव की गलियों में शाम का वक़्त था। सूरज पहाड़ों के पीछे छिप रहा था और आस...
वो लड़की जो कभी नहीं हारीअध्याय 10 — पहली जीत, पहली परीक्षासुबह की धूप आज कुछ अल...
ापित वीडियोभाग 1मेरा नाम राहुल है और यह मेरी कहानी है।यह बात तब की है जब मैं बस...
Welcome all Shayri's Shivam Varshney इकतरफा मोहब्बत का इजहा...
अध्याय 10 : पुलिस बनी चोरराजपूताना भवन, विशाखापत्तनम...शाम ढल चुकी थी। घर के सभी...
लगभग सब ही लोग उसको उसके इसी निक नेम से बुलाते थे सिर्फ चुनिंदा लोग या फिर फील्ड...
जब मेरी बेटी आई, तो लगा जिंदगी बदल गई। पहले दिन रात एक जैसी लगती थी। रोना, दूध,...
प्रस्तावना (Introduction)‘The Power of Positive Thinking’ सिर्फ एक किताब नहीं है...
अक्सर आपके मन में एक सवाल आता होगा कि आख़िर में क्षत्रिय में क्यों पैदा हुआ? या ब्राह्मण परिवार में क्यों पैदा हुआ उसका आख़िर मुझे क्या फ़ायदा? इससे तो अच्छा मैं किसी भी जाति म...
"कुछ मुलाकातें ज़िंदगी बदल देती हैं... और मेरी ज़िंदगी की वह मुलाकात एक शादी के समारोह में हुई थी।" मैं उससे पहली बार एक शादी के समारोह में मिली थी। वह लड़के वालों की तरफ़...
लोकतंत्र की ज़मीनी सच्चाई और युवाओं की पुकार— सत्येंद्र कुमार "एस.टी.डी. मौर्य" कटनी मध्य प्रदेश क्या आप जानते हैं कि देश में क्या चल रहा है? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? हम...
छोटे शहर का लड़का और वो पहली मुलाकात लखनऊ से करीब दो घंटे की दूरी पर बसा एक छोटा, शांत और हरा-भरा कस्बा—'मलिहाबाद'। जहाँ सुबह-सुबह पक्षियों की चहचहाहट और मिट्टी की सोंधी...
बेगूसराय का वो काला दिनस्थान: गर्ल्स इंटर स्कूल एंड कॉलेज, मोहनपुरा (बेगूसराय, उत्तर प्रदेश)समय: शाम के 4:00 बजेसीन 1: सुनसान रास्ता और वो खामोशीमोहनपुरा की सड़क पर सन्नाटा पसरा था...
ये कहानी पूरी तरह से मेरी कल्पना पर आधारित है ये कहानी पूरी तरह से मेरी कल्पना पर आधारित है अगर इस कहानी या इसके किसी भी पात्र से आपको भावनात्मक रूप से ठेस पहुंचाती हैं तो मैं क्षम...
दूर कही एक सुनसान घना जंगल था। जहां चारों तरफ एक खामोशी छाई हुई थी उस जंगल में कोई भी जानवर आने से डरता था उसी जंगल के बीच से होकर उदयपुर तक जाने का एक रास्ता था दिन को तो लोग उस र...
शहर की भीड़भाड़ से दूर, एक संकरी गली के कोने में बना वह छोटा सा कैफे, 'द ओल्ड ओक', आज कुछ ज्यादा ही खामोश लग रहा था। शायद उस खामोशी की वजह दोपहर का वक्त था, या शायद कुदरत ख...
बेटे की परीक्षा समाप्त हो गई थी। श्रीश भी जिद करने लगा मम्मी कहीं बाहर घुमाकर लाओ। मेरी भाभी जम्मू रहती हैं पिछले पाँच साल से। लेकिन कभी जम्मू जाना नहीं हुआ। एक तो दिल्ली से बहु...
"घर में अजनबी" - 7000 Words* सुबह के 5:47 बज रहे थे। दिल्ली में दिसंबर की सर्दी। बाहर कोहरा। मल्होत्रा हाउस के अंदर हीटर चल रहा था, पर अनाया के कमरे में जैसे बर्फ जम...
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