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Episode- 13 (सफेद दीवार का काला सच) रिया जब गहरी नींद से जागी, तो कमरे का सन्नाट...
बेला के थप्पड़ से रमा वही जम गई,दर्द से उनकी आंखों में आंसू आ गए। अब अनुज चु...
दोहा:१९कामी क्रोधी लालची, इनसे भक्ति न होय।भक्ति करै कोई सूरमा, जाति वरन कुल खोय...
भाग - 3 वो धीरे से उठी और रोज़ की तरह बिना किसी आवा...
पुस्तक समीक्षा प्रेम और मानवीय संबंधों का 'सारंग राग' ...
सूरज की हल्की रोशनी पर्दों से छनकर कमरे में आ रही है।श्रेया जागी-बैठी है, आँखें...
जादुई भेड़ियाँ को हारने ने बाद रुद्र काफी थक चुका और घायल भी था। इसीलिए गाँव जाने...
यह चांदनी है।सुबह का समय था। गंगा के किनारे, ऋषिकेश में मैं कुछ पढ़ रहा था। तभी...
[46]“मैं जानता हूँ। वेदों में राधा का नाम है। ऋग्वेद में है जो सबसे प्राचीन ग्रं...
अभी तक आपने पढ़ा कि धीरे-धीरे पंकज और रितु के बीच प्यार गहराने लगा, जिसे बीना ने...
ये उपन्यास सत्य पर एक ऐसी प्रेरित कहानी है, जो लिखने मे मुझे काफ़ी तकलीफ झेलनी पड़ी। कारण था, बस एक ही स्थान वही रहे और पात्र बदले जाये फिर सोचा नहीं सब कुछ ही सच हो।...
मैं यह कहानी दोबारा लिख रही हूँ, लेकिन इस बार बिल्कुल वैसे, जैसे मैंने इसे अपने दिल में महसूस किया था। मेरी पहले की कहानी "दिल से दिल तक: एकतरफा सफर" से यह काफी मिलती-जुलती...
शाम की हल्की सुनहरी रोशनी उस छोटी-सी बस्ती की गलियों में बिखरी हुई थी, जहाँ हर घर अपनी अलग कहानी कहता था—संघर्ष, उम्मीद और अधूरे सपनों की। उसी बस्ती के एक कोने में था काव्या का घर...
वह पुराना बंगला मल्हार एक फ्रीलांस फोटोग्राफर था, जिसे पुरानी इमारतों और सन्नाटों को कैमरे में कैद करने का जुनून था। इसी जुनून के चलते वह हिमाचल के एक दूरदराज गाँव 'अंधेरी घाट...
2087 में, सबसे महंगी चीज़ यादें थीं। और सबसे सस्ती चीज़ भी। मीरा के हाथ काँपते थे — बस थोड़े से, मुश्किल से नज़र आने वाले — जब उसने अपनी हथेली मेमवॉल्ट स्कैनर के ऊपर रखी। शीशे के...
पहली रात… लेकिन वैसी नहीं कमरे में हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी… फूलों की खुशबू जैसे हर सांस के साथ दिल तक उतर रही थी… और मैं… लाल जोड़े में सजी मैं थी…मैं धीरे से आईने के सामने...
मुंबई की रात हमेशा की तरह चमक रही थी।ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच से गुजरती सड़कों पर गाड़ियों की लाइट्स किसी नदी की तरह बहती दिखाई दे रही थीं।लेकिन उस चमक के बीच एक लड़की के मन में अज...
दुनिया की 7 सबसे डरावनी फिल्में Part 1: The Exorcist (1973) चेतावनी: यह सिर्फ एक फिल्म नहीं… एक अनुभव है रात के 2:47 बजे का समय था। कमरे में हल्की-सी हवा चल रही थी। मो...
दिल्ली, शहर की दुर्गा कॉलोनी , आलोक शर्मा जी का घर, आलोक शर्मा एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर हैं। सुबह-सुबह हॉल में बैठकर चाय पीते हुए अखबार पढ़ रहे हैं। सुबह के तकरीबन 8...
शुरुआत दिल्ली के बाहरी इलाके में बनी नई हाईराइज़ सोसायटी ब्लैकवुड रेजीडेंसी दिन में जितनी चमकती थी, रात में उतनी ही डरावनी लगती थी। ऊँची इमारतें, लंबे सुनसान कॉरिडोर, सीसीटीवी कैम...
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