हिंदी उपन्यास प्रकरण किताबें और कहानियां मुफ्त पीडीएफ

    मनचाहा - 28
    by V Dhruva
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    जब हमारा डांस शुरू होता है सब तालियां और सिटीया बजाने लगे। डांस करते वक्त अवि कहते हैं तुमने छूने से मना किया था पर माफ करना इस वक्त ...

    अच्छाईयां –३१
    by Dr Vishnu Prajapati
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    भाग – ३१   सूरज छोटू और रंगा को खुशी खुशी उनकी जगह पर छोड़कर दूर हो गया मगर छोटूने जो बात कही थी वो शायद सच थी की ...

    मनचाहा - 27
    by V Dhruva
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    मैं और रवि भाई मेरे रुम में बैठकर TV देखते-देखते इधर उधर की बातें करने लगे। कुछ देर बाद रवि भाई अपने कमरे में जाने को उठें हीं थे ...

    मनचाहा - 26
    by V Dhruva
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    सुबह अलार्म बजा छः बजे का। यार यह सुबह जल्दी क्यों हो जाती है। मैं रवि भाई को ना बोल देती हुं के मुझे नहीं आना। निंद में ही ...

    मनचाहा - 25
    by V Dhruva
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    सब शोपिंग में मस्त थे। निशु, अवि और रवि भाई एक केंडल शोप में थे। मीना, काव्या और दिशा एक handicraft की शोप में थी और मैं, साकेत और ...

    अच्छाईयां – ३०
    by Dr Vishnu Prajapati
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    भाग – ३० छोटू और रंगा के लिए ऐसा दिन जिन्दगीमें शायद पहलीबार आया था की बड़ी होटल का बचाकुचा खाना नहीं मगर अन्दर बैठ के खाना मिला हो ...

    मनचाहा - 24
    by V Dhruva
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    मैं दरवाजा लोक करके मुडी तो साकेत मेरे सामने खड़ा था। मैं- साकेत तुम यहां? साकेत- हां वो तुमसे कुछ बात करनी थी। बुरा न मानो तो तुम्हारे रूम ...

    मनचाहा - 23
    by V Dhruva
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    पाखि जोर से बोलती है- यह क्या कर रहे हैं आप? सब मुडकर पिछे देखते है। निशा पाखि से पुछती है कि क्या हुआ? मैं- वो..वो अवि का पैर ...

    मनचाहा - 22
    by V Dhruva
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    सूनसान माहौल में एक जोरदार आवाज गूंज उठी। हां सही सोचा आपने। और वह गूंज थी थप्पड़ की। थप्पड़ पड़ा था अवि के गाल पर और ofcourse मारा था ...