शब्दों से इंद्रधनुष बुन कर, मैं उसे सपनों के आसमान में सजाती हूँ। सीधी-सादी कहानियां, हमारे ही जैसे क़िरदार! चाहिए इन शब्दों को आपका थोड़ा सा प्यार!