हिंदी सामाजिक कहानियां किताबें और कहानियां मुफ्त पीडीएफ

    लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 19
    by Neelam Kulshreshtha
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    • 111

    ज़िंदगी हर कदम एक नई जंग है ---सच, दामिनी ने इस जंग को खूब बहादुरी से लड़ा है आदमी की बाहरी जंग तो सबको दिखाई देती है ...

    बिटिया! बदल गई तुम
    by VIRENDER VEER MEHTA
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    बिटिया! बदल गई तुम मेरी प्यारी बिटिया, ढेरों प्रेम भरा स्नेह और आशीर्वाद। जानता हूँ अपने मेल बॉक्स में मेरी मेल देखकर तुम हैरान अवश्य हो रही होगी, क्योंकि ...

    आखर चौरासी - 21
    by Kamal
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    ‘‘बाहर बड़ी देर लगा दी ?’’ भीतर घुसते ही उनकी पत्नी ने पूछा। ‘‘हाँ, वो सामने वाले अम्बिका बाबू बातें करने लग गए थे। नेताजी के बारे में कह रहे ...

    बड़ी दीदी - 1
    by Sarat Chandra Chattopadhyay Verified icon
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    इस धरती पर एक विशिष्ट प्रकार के लोग भी वसते है। यह फूस की आग की तरह होते हैं। वह झट से जल उठते हैं और फिर चटपट बुझ ...

    समझोते
    by Upasna Siag
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    माँ ! आज आप सुरभि आंटी के पास जरूर जा कर आना ! मानसी ने मुझसे कहा। अब सुरभि क्या करेगी ? पढाई तुमने करनी है। जिसमें रूचि हो ...

    आसपास से गुजरते हुए - 20
    by Jayanti Ranganathan Verified icon
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    आई को इस उम्र में यह जिम्मेदारी सौंपना मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था। इससे तो अच्छा होता, मैं दिल्ली चली जाती। वहां मैं अकेली संभाल लेती, पर ...

    इंद्रजाल
    by Shailendra Chauhan
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    शैलेन्द्र चौहान उनके हाथों में जब-तब एक लॉलीपॉप रहता।अक्सर तो वे अपने हाथों का उपयोग कुछ लेने के लिए ही करते थे परंतु जब भी वे अपने आसपास किसी ...

    अनुराधा - 7 - अंतिम भाग
    by Sarat Chandra Chattopadhyay Verified icon
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    कुमार नही आया, यह सुनकर विजय की मां मारे भय के कांप उठी ‘यह केसी बात है रे? जिसके साथ लडाई है उसी के पाक लड़के को छोड़ आया?’ विजय ...

    वह रात किधर निकल गई
    by Geeta Shri
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    वह रात नसीबोवाली नहीं थी. देर रात फोन पर झगड़ने के बाद बिंदू किसी काम के लायक नहीं बची थी। आयशा और वैभव दोनों दूर से सब देख समझ रहे थे, ...

    आखर चौरासी - 20
    by Kamal
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    हरनाम सिंह का पूरा घर अँधेरे में डूबा हुआ था। घर के सभी खिड़की दरवाजे बंद थे। जाड़ों की शामें यूँ भी जल्द खामोश हो जाती हैं। बाहर ठण्ढी ...

    सैलाब - 18
    by Lata Tejeswar renuka Verified icon
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    पावनी किचन के काम में व्यस्त थी,आखिर संक्रांति की तैयारियां भी करनी थी। तब घर की घंटी बज उठी। पावनी ने अपना काम छोड़ कर दरवाजा खोला। सामने ४० ...

    पल जो यूँ गुज़रे - 22
    by Lajpat Rai Garg Verified icon
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    तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार निर्मल का परिवार, कुल सात लोग — परमानन्द, सावित्री, जितेन्द्र, सुनन्दा, कमला, बन्टु तथा निर्मल — रविवार शाम को शिमला पहुँच गये। अनुराग ने इनके ...

    अनुराधा - 6
    by Sarat Chandra Chattopadhyay Verified icon
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    इसीत से तरह पांच-दिन बीत गए। स्त्रियों के आदर और देख-रेख का चित्र विजय के मन में आरंभ से ही अस्पष्ट था। अपनी मां को वह आरंभ से ही ...

    सांच कि, झूठ
    by Sapna Singh Verified icon
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    रंभा ने गोबर के ढे़र में पानी का छींटा मारकर सींचा और उन्हें सानने के लिये अपने दोनों हाथ उसमें घुसेड़ दिये। घिन बर आई, पिछले कुछ वर्षों में ...

    अनुराधा - 5
    by Sarat Chandra Chattopadhyay Verified icon
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    कलकत्ता से कुछ साग-सब्जी, फल और मिठाई आदि आई थीं। विजय ने नौकर से रसोईघर के सामने टोकरी उतरवाकर कहा, ‘अंदर होंगी जरूर?’ अंदर से मीठी आवाज में उत्तर आया, ...

    आखर चौरासी - 19
    by Kamal
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    फैक्ट्री कैंटीन से जिन्दा बच निकले उन 28 सिक्खों जितने खुशकिस्मत, वे तीन सरदार फैक्ट्री कर्मचारी नहीं थे, जो एक नवंबर की उस काली सुबह अपनी ड्यूटी पर पहुँचे ...

    आसपास से गुजरते हुए - 19
    by Jayanti Ranganathan Verified icon
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    अगले दिन मैं शो देखने नहीं गई। दिन-भर टीवी देखती रही। शाम को कुछ दूर पैदल चली, अकेले में निराशा फिर घर करने लगी। पता नहीं, अब दिल्ली जाकर ...

    अनुराधा - 4
    by Sarat Chandra Chattopadhyay Verified icon
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    इस प्रकार में आने के बाद एक पुरानी आराम कुर्सी मिल गई थी। शाम को उसी के हत्थों पर दोनों पैर पसाक कर विजय आंखें नीचे किए हुए चुरुट ...

    सैलाब - 17
    by Lata Tejeswar renuka Verified icon
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    कॉलिंग बेल की आवाज से किचन में व्यस्त पावनी ने किचन से बाहर आ कर दरवाजा खोला। सामने बिंदु और उसकी ३ सहेलियाँ खड़ी थी। पावनी आश्चर्य चकित हो ...

    अश्लील क्या है.. नज़रिया या कपड़े??
    by Roopanjali singh parmar
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    एक शब्द है जिस पर अक्सर ही बहुत सारे विचार पढ़ने या सुनने को मिलते हैं.. और वो शब्द है 'अश्लीलता'। अगर चर्चा अश्लीलता पर होगी तो महिलाओं का ...

    पल जो यूँ गुज़रे - 21
    by Lajpat Rai Garg Verified icon
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    अन्ततः मई के द्वितीय सप्ताह की एक खुशनुमा प्रातः ऐसी आई जब शिमला स्थित सभी प्रमुख समाचारपत्रों के सम्वाददाता अपने—अपने कैमरामैन के साथ मशोबरा के ‘मधु—स्मृति विला' के परिसर ...

    यूँ ही
    by Pranava Bharti
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    एक उम्र होती है न जो पीछे जितनी छूटती जाती है, उतनी ही परछाईं की तरफ़ दौड़ लगाती है जैसे ---उसकी उम्र भी शायद कुछ ऎसी ही है ...

    छलिया कौन
    by Dr. Vandana Gupta
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        सब कहते हैं और हमने भी सुना है कि जिंदगी एक अबूझ पहेली है। जिंदगी के रंग कई रे.…. और सबसे गहरा रंग है प्यार का.... और ...

    लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 18
    by Neelam Kulshreshtha
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    जब घरवाले अपने घर आने वाले होतें हैं तो ढेर सी तैयारियाँ करनी होतीं है, कैसी उत्तेजना भरी ख़ुशी मन में रहती है। तब अपनी थकान पर ध्यान नहीं ...

    लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 17
    by Neelam Kulshreshtha
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    यामिनी ने रोती हुई दिल दहलाने जैसा सवाल पूछती सृष्टि को अपने हाथों में जकड़ लिया, नहीं, बिलकुल नहीं, किसने कहा तुमसे कि तुम्हारी मम्मी मर जाएगी ?” उसने ...

    आखर चौरासी - 18
    by Kamal
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    ऐसा ही एक दृष्य विक्की ने दूसरे माले पर स्थित अपने फूफा के फ्लैट की खिड़की से देखा था। अपने पुर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उस दिन उसे बी.आई.टी. सिन्दरी ...

    अतृप्त रिश्ते
    by r k lal Verified icon
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    अतृप्त रिश्तेआर 0 के0 लालअरे रुकना जरा,  पहचाना तुमने। प्रभात ने उसे रोकते हुए कहा। शोभा ने भी आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, - "व्हाट ए प्लेज़ेंट सरप्राइज, तुम्हें ...

    अनुराधा - 3
    by Sarat Chandra Chattopadhyay Verified icon
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    बाबुओं के मकान पर पूरा अधिकार करके बिजय जमकर बैठ गया। उसने दो कमरे अपने लिए रखे और बाकी कमरो में कहचरी की व्यवस्था कर दी। विनोद धोष किसी ...

    माँ से ही मायका होता है
    by Upasna Siag
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    कब्रें विच्चों बोल नी माए दुःख सुःख धी नाल फोल नी माए आंवा तां मैं आमा माए आमा केहरे चावा नाल माँ मैं मुड़ नहीं पैके औणा पेके हुंदे माँवा नाल। सुरजीत बिंदरखिया का यह गीत हस्पताल के जनरल ...

    आसपास से गुजरते हुए - 18
    by Jayanti Ranganathan Verified icon
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    फ्लाइट डेढ़ घंटे लेट थी। मैं तीन बजे मुंबई एयरपोर्ट पहुंची और रात को दस बजे पुणे। वापसी का सफर ठीक ही था। फ्लाइट में मैंने खाना खा लिया ...