हिंदी सामाजिक कहानियां किताबें और कहानियां मुफ्त पीडीएफ

    खोज
    by Asha Pandey Author
    • (5)
    • 34

    दुनिया चाहे कितनी भी भरी हो, पर अपना दिल खाली हो तो सब ओर खाली ही खाली लगता है शहर के सबसे व्यस्त होटल में, ग्राहकों की सेवा में ...

    सोलमेट्स
    by Seema Singh
    • (10)
    • 89

    भागती-दौड़ती कॉलेज के लिए तैयार होती संजना की एक नजर घड़ी पर लगातार बनी हुई थी, अगर बस छूट गई तो दिन बर्बाद! “ प्रोफेसर भार्गव एक नम्बर के खडूस! ...

    फ़तह
    by Neelam Kulshreshtha
    • (3)
    • 55

    जिग्ना रोज़ की तरह बालकनी में सुबह की चाय पीने के बाद अख़बार पढ़ती है, ऎसे में आस पास के गमलों के छोटे पौधे व हरी भरी मनी प्लांट ...

    अदृश्य हमसफ़र - 6
    by Vinay Panwar
    • (7)
    • 53

    अपने मृदुल और हँसमुख स्वभाव की वजह से अनुराग सभी घरवालों का दिल जीतता जा रहा था। पढ़ाई में होशियार तो था ही साथ ही किसी भी काम के ...

    पछतावा...
    by Dhavalkumar Padariya Kalptaru
    • (2)
    • 43

         ऑर्डर...ऑर्डर ...     तमाम सबूतों एवं गवाहों के मद्दे नज़र रखते हुए अदालत यह नतीजे पर पहुंची हैं कि मुजरिम रामु को को चोरी करने एवं मासूम ...

    फिर फिर
    by Asha Pandey Author
    • (7)
    • 51

    स्वप्न इतना डरावना तो नही था, किन्तु न जाने कैसे वृन्दा पसीने से तर-ब-तर हो गई । गला सूख गया था उसका । आजकल अक्सर ऐसा होता है । ...

    छोटी बहू
    by Pushp Saini
    • (18)
    • 203

    कहानी [छोटी बहू ✍]******************मृणाल यह एक नाम जैसे ज़िन्दगी बन गया है ।पहले कभी वैसा महसूस ही नहीं किया जैसा उससे मिलने के बाद,वह जिस दिन हाँ कहेगी वह ...

    अदृश्य हमसफ़र - 5
    by Vinay Panwar
    • (7)
    • 56

    ममता उठी और अनु दा को ढूंढने लगी। ढूंढते ढूंढते छत पर जा पहुंची। अनु दा वहीं आराम कुर्सी पर टेक लगाए तारों को एकटक देखे जा रहे थे। ममता- ...

    आ लौट चलें
    by Ajay Kumar Awasthi
    • (2)
    • 33

            त्रिपाठी जी का बड़ा संयुक्त परिवार था सो आपस मे खटपट तो होती ही रहती थी । पर बात इतनी बढ़ जाएगी ये घर के ...