हिंदी हास्य कथाएं किताबें और कहानियां मुफ्त पीडीएफ

    अफसर का अभिनन्दन - 10
    by Yashvant Kothari
    • (1)
    • 49

    लू में कवि                                   यशवन्त कोठारी           तेज गरमी है। लू चल रही है। धूप की तरफ देखने मात्र से बुखार जैसा लगता है। बारिश दूर दूर तक ...

    म्यूजियम में चाँद
    by amitaabh dikshit
    • (2)
    • 47

    “कहते हैं पिछली सदी का चांद  इस सदी जैसा नहीं था” एक बोला. “नहीं बिल्कुल ऐसा ही था”  दूसरे ने पहले की बात काटी. “तुम्हें कैसे मालूम है”  पहले ...

    तीन बेचारे
    by Pushp Saini
    • (19)
    • 231

    लघुकथा ( तीन बेचारे ✍?)~~~~~~~~~~~~~~~"झील किनारे बैठ के सोचू क्यों बचपन तू दूर गया" "अरे यार ! हमने झील किनारे मिलने का कार्यक्रम इसलिए नहीं बनाया था कि तुम "पुष्प ...

    न्युटन का अपराध
    by Ajay Amitabh Suman
    • (10)
    • 155

    अर्जुन अपने 5 भाइयों के साथ मुजफ्फपुर में रहता था। उसके पिता सरकारी मुलाजिम थे । गुजर बसर लायक बामुश्किल कमा पाते थे । अक्सर खाने पीने के लिए ...

    अफसर का अभिनन्दन - 9
    by Yashvant Kothari
    • (2)
    • 42

    सम्माननीय सभापतिजी                                                                                                                                                                                                                                             

    मैं अपने भाई को क्यूँ मरना चाहता था..
    by devendra kushwaha
    • (12)
    • 200

    मैं पिछली सदी में उस साल में पैदा हुआ जब परिवार नियोजन बहुत प्रचिलित नही था और हम दो हमारे दो पर किसी को बहुत विश्वास भी नही था। ...

    हनीमून स्पेशल
    by Ajay Amitabh Suman
    • (22)
    • 455

    रमेश और महेश की मित्रता की मिसाल स्कूल में सारे लोग देते। पढ़ाई या खेल कूद हो, दोनों हमेशा साथ साथ रहते। गिल्ली डंडा हो, कबड्डी या कि पतंग ...

    अफसर का अभिनंदन - 8
    by Yashvant Kothari
    • (3)
    • 72

      साहित्य में वर्कशॉप –वाद   यशवन्त कोठारी   इन दिनों सम्पूर्ण भारतीय साहित्य में वर्कशाप वाद चल रहा है। भक्तिकाल का भक्तिवाद रीतिकाल का शृंगारवाद, आधुनिककाल के प्रगतिवाद, ...

    आओ चमचागीरी सीखें - व्यंग
    by Deepak Bundela
    • (7)
    • 116

    कलम दरबारी की कलम से“आओ चमचागीरी सीखें”कसम है उन चम्चगीरों की जिन्होने पूरे देश के कर्मठ लोगों को अपना पालतू बना रखा है…बगैर चमचों के बड़ा आदमी इनके बगैर ...