हिंदी हास्य कथाएं किताबें और कहानियां मुफ्त पीडीएफ

    अफसर का अभिनन्दन - 21
    by Yashvant Kothari
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    कहाँ गए जलाशय ?                                                   यशवंत कोठारी  भयंकर गर्मी है देश –परदेश में पानी के लिए त्राहि त्राहि हो रही है.बूंद बूंद के लिए सर फूट रहे हैं .अगला  ...

    व्यथा झोलाछाप डॉक्टर की
    by राजीव तनेजा
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    व्यथा झोलाछाप डॉक्टर कीकसम ले लो मुझसे...'खुदा' की...या फिर किसी भी मनचाहे भगवान की.....तसल्ली ना हो तो बेशक।...'बाबा नामदेव' के यहाँ मत्था टिकवाकर पूरे के पूरे सातों वचन ले ...

    मुन्नू अनशन पर
    by Dr Narendra Shukl
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    मुन्नू अनशन पर     एक दिन मेरे मित्र राधेश्याम मेरे पास हांफते हुये आये । मैंने पूछा - ‘राधेश्याम इतना भाग क्यों रहे हो & ओलेम्पिक्स तो कब ...

    अफसर का अभिनन्दन - 20
    by Yashvant Kothari
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    सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा यशवन्त कोठारी       हमारे देश का नाम भारत है । भारत नाम इसलिए है कि हम भारतीय हैं । कुछ सिर फिरे ...

    इश्क कैसे कैसे
    by राजीव तनेजा
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    इश्क कैसे कैसे "ओह।…शिट..पहुँच जाना चाहिए था अब तक तो उसे….पता भी है कि मुझे फिल्म की स्टार्टिंग मिस करना बिलकुल भी पसंद नहीं।”“कहीं ट्रैफिक की वजह से तो नहीं…इस ...

    हैप्पी हिन्दी डे
    by dilip kumar
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    "हैप्पी हिन्दी डे "            (व्यंग्य )हे कूल डूड ऑफ़ हिंदी  ,टुडे इज द बर्थडे ऑफ़ हिंदी ,ईट्स आवर मदर टँग एन प्राइड आलसो ,सो ...

    अफसर का अभिनन्दन - 19
    by Yashvant Kothari
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    हिंदी -व्यंग्य में पीढ़ियों का अन्तराल                                            यशवंत कोठारी काफी समय से  हिंदी व्यंग्य का  पाठक हूँ .अन्य भाषाओँ की रचनाएँ भी पढता रहता हूँ .उर्दू,गुजराती , मराठी ,अंग्रेजी ...

    अफसर का अभिनन्दन - 18
    by Yashvant Kothari
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    युवा ,रोज़गार और सरकार   यशवंत कोठारी देश भर में बेरोजगारी पर बहस हो रही है.संसद से लेकर सड़क तक हंगामा बरपा है.बेरोजगार युवाओं की लम्बी लम्बी कतारें कहीं ...

    अफसर का अभिनन्दन - 17
    by Yashvant Kothari
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    मारीशस में कवि                             यशवंत कोठारी जुगाडू कवि मारीशस पहुँच गए.हर सरकार में हलवा पूरी जीमने का उनका अधिकार है,वे हर सरकार में सत्ता के गलियारे में कूदते फांदते ...

    kambal kripa prapti
    by Sadhana Kumar
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    सोशल मीडिया का हर तरफ बोलबाला है. इस इन्टरनेट युग मे हर तरफ ज्ञान तों जैसे प्रसाद की तरह बँट रहा है. लोगों के सोशल मीडिया प्रोफाईल देखिये तो ...

    अफसर का अभिनन्दन - 16
    by Yashvant Kothari
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    व्यंग्य हम सब बिकाऊ हैं . यशवंत कोठारी   इधर समाज में तेजी से ऐसे लोग बढ़ रहे हैं जो बिकने को तैयार खड़े हैं बाज़ार ऐसे लोगों से ...

    अफसर का अभिनन्दन - 15
    by Yashvant Kothari
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    बनते –बिगड़ते फ्लाई ओवर                                           यशवंत कोठारी जब भी सड़क मार्ग से गुजरता हूँ किसी  न  किसी बनते बिगड़ते  फ्लाई ओवर पर नज़र पड़ जाती है.मैं समझ  जाता हूँ ...

    अफसर का अभिनन्दन - 14
    by Yashvant Kothari
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     धंधा चिकित्सा शिविरों  का ...                      यशवंत कोठारी हर तरफ चिकित्सा शिविरों की बहार हैं. जिसे देखो वो ही शिविर लगा रहा  है. कहीं भी जगह दिखी नहीं की ...

    अफसर का अभिनन्दन - 13
    by Yashvant Kothari
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    होना फ्रेक्चर हाथ में  ... यशवंत कोठारी आखिर मेरे को भी फ्रेक्चर का लाभ मिल गया.जिस उम्र में लेखकों को मधुमेह ,उच्च रक्त चाप ,किडनी फेलियर ,या स्ट्रोक या ...

    हम हिन्दीवाले
    by dilip kumar
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    हम हिन्दीवाले (व्यंग्य )अपने कुनबे में हमने ही ये नई विधा इजाद की है ।एकदम आमिर खान की मानिंद "परफेक्शनिस्ट",नहीं,नहीं भाई कम्युनिस्ट मत समझिये।भई कम्युनिस्ट से जब जनता का ...

    दाम्पत्य
    by VIJAY KUMAR SHARMA
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    दाम्पत्य बात २०१४ के प्रारंभ की है जब नायक की सगाई परिवार जनों की व्यवस्था पद्धति (अरेंज ) से सम्पन्न हो चुकी थी, जहाँ पहली ही मुलाकात में नायक-नायिका ...

    अफसर का अभिनन्दन - 12
    by Yashvant Kothari
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    आओ अफवाह उड़ायें   भारत अफवाह प्रधान देश है। अतः आज मैं अफवाहों पर चिन्तन करूंगा। सच पूछा जाए तो अफवाहें उडा़ना राष्ट्रीय कार्य है और अफवाहें हमारा राष्ट्रीय ...

    छुपी सच्चाई
    by Smit Makvana
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    छुपी सच्चाई मेने अपने दोस्त(राहुल) को फोन करके अपने साथ बुला लिया ताकि कोई समस्या आये तो हम दोनों एक दूसरे को संभाल शके। राहुल की फिटनेस बहुत ही ...

    एक सच : आरंभ ही अंत
    by Smit Makvana
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    एक सच: आरंभ ही अंत  PART-1 में(निखिल) कॉलेज में था, पापा(जगदीसभाई)  काम पर और माँ(रवीनाबेन)  घर पे, छोटा भाई(आयुष) भी स्कूल में गया था। सोमवार से लेकर शनिवार तक हम लोगो ...

    अफसर का अभिनन्दन - 11
    by Yashvant Kothari
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    व्यंग्य सफल और स्वादिष्ट श्रद्धांजली                                   यशवंत कोठारी साहित्य के भंडारे चालू आहे.कविता वाले कविता का भंडारा कर रहे हैं,कहानी वाले कहानी के  भंडारे में व्यस्त है. नाटक वाले ...

    अफसर का अभिनन्दन - 10
    by Yashvant Kothari
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    लू में कवि                                   यशवन्त कोठारी           तेज गरमी है। लू चल रही है। धूप की तरफ देखने मात्र से बुखार जैसा लगता है। बारिश दूर दूर तक ...

    म्यूजियम में चाँद
    by amitaabh dikshit
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    “कहते हैं पिछली सदी का चांद  इस सदी जैसा नहीं था” एक बोला. “नहीं बिल्कुल ऐसा ही था”  दूसरे ने पहले की बात काटी. “तुम्हें कैसे मालूम है”  पहले ...

    तीन बेचारे
    by Pushp Saini
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    लघुकथा ( तीन बेचारे ✍?)~~~~~~~~~~~~~~~"झील किनारे बैठ के सोचू क्यों बचपन तू दूर गया" "अरे यार ! हमने झील किनारे मिलने का कार्यक्रम इसलिए नहीं बनाया था कि तुम "पुष्प ...

    न्युटन का अपराध
    by Ajay Amitabh Suman
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    अर्जुन अपने 5 भाइयों के साथ मुजफ्फपुर में रहता था। उसके पिता सरकारी मुलाजिम थे । गुजर बसर लायक बामुश्किल कमा पाते थे । अक्सर खाने पीने के लिए ...

    अफसर का अभिनन्दन - 9
    by Yashvant Kothari
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    सम्माननीय सभापतिजी                                                                                                                                                                                                                                             

    मैं अपने भाई को क्यूँ मरना चाहता था..
    by devendra kushwaha
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    मैं पिछली सदी में उस साल में पैदा हुआ जब परिवार नियोजन बहुत प्रचिलित नही था और हम दो हमारे दो पर किसी को बहुत विश्वास भी नही था। ...

    हनीमून स्पेशल
    by Ajay Amitabh Suman
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    रमेश और महेश की मित्रता की मिसाल स्कूल में सारे लोग देते। पढ़ाई या खेल कूद हो, दोनों हमेशा साथ साथ रहते। गिल्ली डंडा हो, कबड्डी या कि पतंग ...

    अफसर का अभिनंदन - 8
    by Yashvant Kothari
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      साहित्य में वर्कशॉप –वाद   यशवन्त कोठारी   इन दिनों सम्पूर्ण भारतीय साहित्य में वर्कशाप वाद चल रहा है। भक्तिकाल का भक्तिवाद रीतिकाल का शृंगारवाद, आधुनिककाल के प्रगतिवाद, ...

    आओ चमचागीरी सीखें - व्यंग
    by Deepak Bundela Moulik
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    कलम दरबारी की कलम से“आओ चमचागीरी सीखें”कसम है उन चम्चगीरों की जिन्होने पूरे देश के कर्मठ लोगों को अपना पालतू बना रखा है…बगैर चमचों के बड़ा आदमी इनके बगैर ...

    कहानी च्युइंग गम की
    by devendra kushwaha
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    कक्षा छह में मुझे पहली बार पॉकेट मनी यानी जेब खर्च मिलना शुरू हुआ। जेब खर्च के नाम पे 1996 में रोजाना एक रुपया बुरा नहीं था। मैं शायद ...