यह कहानी एक महिला की यात्रा के बारे में है, जो ट्रेन में सवार होती है। वह अपनी सीट तक पहुँचने में कुछ धक्कों का सामना करती है, जिससे उसके बैग की स्ट्रैप टूट जाती है और उसकी कुहनी में हल्की चोट लग जाती है। जब वह अपनी सीट पर पहुँचती है, तो उसे पता चलता है कि कुछ लोग उसी सीट पर बैठे हैं जिनके पास भी वही टिकट है। इसके बाद, अन्य यात्री उनकी मदद करते हैं और उसे खिड़की वाली सीट दिलवा देते हैं। कहानी में एक मोड़ तब आता है जब महिला अपने विश्वविद्यालय के उप-कुलपति को स्टेशन पर दौड़ते हुए देखती है, और उसे डर होता है कि वे उसे ढूंढ रहे हैं। फिर वह अपनी पहचान बताती है कि वह दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग की प्रोफेसर प्रिया राव है। कहानी इस बात पर खत्म होती है कि उप-कुलपति उससे बात करने आते हैं। शादी Neetu Singh Renuka द्वारा हिंदी लघुकथा 6.4k 2.2k Downloads 7.1k Views Writen by Neetu Singh Renuka Category लघुकथा पढ़ें पूरी कहानी मोबाईल पर डाऊनलोड करें विवरण दहेज जैसी घृणित प्रथा का कम से कम संपन्न और पढ़े-लिखे घरों में बहिष्कार कब होगा क्यों लड़की से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण दहेज देखना हो जाता है। इतना ज़्यादा कि लड़की कैसी भी हो, दहेज के नाम पर उसे टिका दिया जाता है। More Likes This कहानी में छुपी एक सन्देश - 1 द्वारा Std Maurya मेरे समाज में ऐसा क्यों होता हैं - भाग 1 द्वारा Std Maurya ऐसे ही क्यों होता हैं? - 1 द्वारा Std Maurya एक डिवोर्स ऐसा भी - 1 द्वारा Alka Aggarwal पहली मुलाक़ात - 1 द्वारा puja नेहरू फाइल्स - भूल-113 द्वारा Rachel Abraham हिकमत और कमाई द्वारा Devendra Kumar अन्य रसप्रद विकल्प हिंदी लघुकथा हिंदी आध्यात्मिक कथा हिंदी फिक्शन कहानी हिंदी प्रेरक कथा हिंदी क्लासिक कहानियां हिंदी बाल कथाएँ हिंदी हास्य कथाएं हिंदी पत्रिका हिंदी कविता हिंदी यात्रा विशेष हिंदी महिला विशेष हिंदी नाटक हिंदी प्रेम कथाएँ हिंदी जासूसी कहानी हिंदी सामाजिक कहानियां हिंदी रोमांचक कहानियाँ हिंदी मानवीय विज्ञान हिंदी मनोविज्ञान हिंदी स्वास्थ्य हिंदी जीवनी हिंदी पकाने की विधि हिंदी पत्र हिंदी डरावनी कहानी हिंदी फिल्म समीक्षा हिंदी पौराणिक कथा हिंदी पुस्तक समीक्षाएं हिंदी थ्रिलर हिंदी कल्पित-विज्ञान हिंदी व्यापार हिंदी खेल हिंदी जानवरों हिंदी ज्योतिष शास्त्र हिंदी विज्ञान हिंदी कुछ भी हिंदी क्राइम कहानी