रात का सन्नाटा…इतना गहरा था कि जैसे हवा भी डर रही हो चलने से। गाड़ी धीरे-धीरे कच्चे रास्ते पर आगे ...
श्राप… जो वरदान बन सकता है “जिस दिन तुम्हारी आँखों में फिर से नागमणि की चमक लौटेगी…उसी दिन इस ...
कर्ज़ की दस्तक गाँव में शाम हमेशा जल्दी उतर आती थी।सूरज अभी पूरी तरह डूबा भी नहीं था, लेकिन प्रताप ...