बारिश उस दिन कुछ ज़्यादा ही ठहरकर बरस रही थी, जैसे शहर को नहीं—अन्वी के दिल को भिगोना चाहती ...
जबलपुर की शांत गलियों में पली-बढ़ी आराध्या त्रिपाठी के सपनों में एक ही तस्वीर थी—सफेद एप्रन, स्टेथोस्कोप और एक ...
“संगिनी”आस्था के कमरे में आज अजीब-सी हलचल थी। दीवार पर टंगी घड़ी की टिक-टिक उसे बार-बार याद दिला रही ...