vrinda की किताबें व् कहानियां मुफ्त पढ़ें

त्रिशा... - 39

by vrinda

लगभग एक घंटे के सफर के बाद त्रिशा अपने‌ मायके लौट आई जहां उसका स्वागत बड़े ही लाड़ प्यार ...

त्रिशा... - 38

by vrinda
  • 594

राजन ने उन लोगो के पास जाकर आदर से त्रिशा के पापा और मामा को नमस्ते कहा। उन्होनें भी ...

त्रिशा... - 37

by vrinda
  • 294

अगली सुबह का सूरज त्रिशा और राजन के लिए एक नई उम्मीदों के साथ आया है। कल की रात ...

त्रिशा... - 36

by vrinda
  • 888

राजन ने जब खाने का निवाला यूं चेहरे पर मुस्कान और आंखों में प्यार के साथ त्रिशा की ओर ...

त्रिशा... - 35

by vrinda
  • (5/5)
  • 903

बीती रात की यादों के सजीव होते ही त्रिशा के मन में कड़वाहट भर गई। वह खुद के लिए ...

त्रिशा... - 34

by vrinda
  • 870

त्रिशा अपने ही अंदर गूंज रही और आपस में एक दूसरे से लड़ रही उन दोनों आवाजों को सुन ...

त्रिशा... - 33

by vrinda
  • 1.4k

उस भयावाह रात के बाद जब अगली बार जब त्रिशा की आंख खुली तो उसने खुद को अपने बिस्तर ...

त्रिशा... - 32

by vrinda
  • 1.3k

राजन का मन जैसे कर रहा था वो वैसे त्रिशा को इधर उधर धक्का दे रहा था। उसे मार ...

त्रिशा... - 31

by vrinda
  • 1.1k

"क्या????????ऐसे टुकुर टुकुर क्या देख रही है मेरी तरफ?????" राजन ने त्रिशा को अपनी ओर देखने के बाद कहा।पर ...

त्रिशा... - 30

by vrinda
  • 1.1k

"क्या कहा रे तूने????????अब तू मुझे बताएगी कि मुझे क्या बोलना है और क्या नहीं बोलना ??????""मेरी मर्जी, मेरा ...