Tarkeshwer Kumar की किताबें व् कहानियां मुफ्त पढ़ें

दुबारा पत्थर मत मारना।

by Tarkeshwer Kumar
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बड़ी बड़ी घटनाओं को और बड़ी बड़ी कहानियों को और बड़े बड़े जानवरों को अपने में समेटे हुए रहता ...

भूतिया पटरी

by Tarkeshwer Kumar
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काल्पनिक कहानी!यह घटना एक छोटे से गांव की है, शहर से दूर जहां पर भोले भाले गांव वाले रहते ...

हां भगवान, मैं डरता हूं।

by Tarkeshwer Kumar
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डर_क्या हैं?सही मायने में कहूं तो हर बार, डर का दायरा इंसान खुद पैदा नहीं करता हैं। हालात, किस्मत, ...

सच्ची दोस्ती?

by Tarkeshwer Kumar
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आप कितने भी बड़े हो जाइए आप के अंदर बचपना जिंदा रहना चाहिए या यूं कहिए जिंदा रहता हैं ...

स्कूल के वो दिन ही अच्छे थे

by Tarkeshwer Kumar
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प्रिय दोस्तो, जिंदगी बहुत तेज़ी से अपने मुक़ाम की और दौड़ रहीं हैं। इस छोटी सी जिंदगी में अनेकों ...

उस बुजुर्ग की दीवाली

by Tarkeshwer Kumar
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जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई हैं मृत्यु, पर उससे भी कटु सत्य हैं वृद्धावस्था। एक कविता के माध्यम से ...

माँ मैं तेरा कर्ज़दार हूँ

by Tarkeshwer Kumar
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माँ, ये जो शब्द हैं ये अपने आप में ही पूरा संसार हैं,मानो इस शब्द के उच्चारण मात्र से ...

बेटियों के दरिंदे

by Tarkeshwer Kumar
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एक कविता बेटियों के नाम करना चाहूंगा,आजकल की जो घटनाएं हो रहीं हैं हमें उसके खिलाफ आवाज उठाना ही ...