सर्वश्रेष्ठ लघुकथा कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम - 2

by Abantika

Part 2"दिल्ली के सरोजिनी नगर मार्केट में बच्चों के कपड़ों की एक दुकान पर अपने सात साल के बेटे, ...

दो कहानी

by Rajeev kumar
  • 432

अस्तित्व मनोहर के मन-मस्तिष्क पर अस्तित्व शब्द ने खलबली मचा दी थी। उसने सुन रखा था कि आपका अस्तित्व ...

उम्मीद की एक नई किरण

by A
  • 429

शहर की भीड़भाड़ से दूर, एक पुराने जर्जर मकान की बालकनी में बैठे अविनाश के चेहरे पर गहरी चिंता ...

एकतरफा प्यार

by Rajeev kumar
  • 291

एकतरफा प्यार बरसात के बाद गुनगुनी धुप निकल चुकी थी। मौसम खुशनूमा हो गया था। हवा भी चल रही ...

बारिश की पहली बुंदे

by kajal jha
  • 369

बारिश की पहली बूंदेंदिल्ली की गर्मियां हर साल की तरह इस बार भी बेहद बेरहम थीं। सूरज जैसे आसमान ...

घर जो कभी बेचा नही गया

by InkImagination
  • (4.4/5)
  • 576

घर जो कभी बेचा नहीं गयाशहर के सबसे चमकदार इलाके में, जहां हर तरफ़ गगनचुंबी इमारतें आसमान को चीर ...

बेटा

by Rajeev kumar
  • 561

बेटा बड़ी थकान महसुस हो रही थी। रास्ते में कई बार कई पेड़ के नीचे बैठ कर सुस्ता चुका ...

मिड-डे मील

by Rinki Singh
  • (5/5)
  • 569

प्राथमिक विद्यालय का प्रांगण कोलाहल से भरा हुआ था। आज स्कूल का अंतिम दिन था, कल से गर्मी की ...

इश्क. - 17

by om prakash
  • (5/5)
  • 627

सिम्मी को रजनी मेहता अमेरिका वाली लड़की सहज संयोग से मिल ही जाता है ।शेखर दोपहर को सिम्मी के ...

सुबह का तारा

by Rakesh Kaul
  • 413

सुबह का तारा आज के नए ज़माने के शहरों में ज़्यादातर तालीमयाफ़्ता नौजवान अच्छी नौकरी की तलाश में घर-परिवार ...

युद्ध के पश्चात कृष्ण और गान्धारी संवाद

by Prithvi Nokwal
  • (0/5)
  • 858

पुत्र वियोग में तड़पती गांधारी जब कृष्ण को श्राप देने चली तब कृष्ण गांधारी से कहते हैंमाता मैं शोक ...

डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ - 6

by Dr. Pradeep Kumar Sharma
  • 483

डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँमाँऑफिस से लौटकर जैसे ही वह घर पहुँचा, पत्नी बोलीं, "सुनिए जी, आपके पास ...

बगावती

by Deepak Sharma
  • 630

“मैं सिनेमा जा रही हूं,”गली के नुक्कड़ पर उस बुद्धवार जैसे ही मां अपने झोलों के साथ प्रकट हुईं,अपनी ...

जिंदगी की खुशी

by manshi
  • 444

क्या आप ने कभी सोचा है, कि कोई ऐसा भी होगा, जिसमें गुण तो बहुत हैं, पर वह किसी ...

कॉफी शॉप की अधूरी मुलाकात

by Bharti 007
  • (4.8/5)
  • 573

बारिश उस दिन कुछ ज़्यादा ही ठहरकर बरस रही थी, जैसे शहर को नहीं—अन्वी के दिल को भिगोना चाहती ...

ऐसा ही होता है

by Rajeev kumar
  • 627

ऐसा ही होता है दिन भर मशीन की गड़गड़ और घर की चख-चख से बड़ी दुर, गंदा नाला के ...

पतंगों से लालटेन तक

by Ankur Saxena Maddy
  • 342

14 जनवरी की सुबह जयपुर में कुछ अलग ही रंग लेकर आती है। ठंडी हवा में हल्की धूप, छतों ...

हिकमत और कमाई

by Devendra Kumar
  • (5/5)
  • 891

कल मुझे गुडगाँव से एक मीटिंग के लिये दिल्ली प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में एक आयोजान में जाना था. ...

ग्रे शेड्स

by Dr Sandip Awasthi
  • 846

________________________ लगता है सब कुछ व्यर्थ है।क्योंकि सभी तरफ झूठ जीत रहा और सच हार रहा। सोशल साइट्स ...

कन्यादान

by A
  • 1k

दिल्ली की एक छोटी सी कॉलोनी में, जनवरी का महीना था। ठंडी हवा चल रही थी, और घरों में ...

ऊपर उठी हुई नाक

by Deepak Sharma
  • 879

कहानी: दीपक शर्मा “मेरी ट्विट अपनी पूरी उड़ान नहीं भर रही। ...

स्मृतियों की खाट

by Rinki Singh
  • (4.8/5)
  • 897

दरवाज़े के बगल में रखी पुरानी सी खाट पर बैठकर हरिप्रसाद जी हर सुबह चाय की चुस्कियों के साथ ...

कुंती का खेल

by Deepak Sharma
  • 956

कुंती को वह खेल अकस्मात ही सूझा था। टंडन मेम ...

कोई फर्क नहीं पडता

by InkImagination
  • (0/5)
  • 1.1k

कोई फर्क नहीं पड़तावो कॉलेज की पुरानी, घिसी-पिटी सीढ़ियों पर बैठी रहती, घुटनों को सीने से चिपकाए। नीचे, ग्राउंड ...

टप्पे के बाद

by Deepak Sharma
  • 1.1k

स्टेशन पर बहन ने मुझे अकेले पाया तो एकाएक उस का चेहरा बदल- बदल गया। भेद- भरे स्वर में ...

पहला अनकहा प्यार

by ch Devendra
  • (4.3/5)
  • 951

पहला प्यार लव एट फर्स्टसाइट ये बहुत लोगों को हुआ है, बहुतों ने इसे फिल किया है कुछ का ...

एक अनकही प्यार की शुरुआत

by Bharti 007
  • (5/5)
  • 1.1k

जबलपुर की शांत गलियों में पली-बढ़ी आराध्या त्रिपाठी के सपनों में एक ही तस्वीर थी—सफेद एप्रन, स्टेथोस्कोप और एक ...

खामोशी के बाद

by Deepak Bundela
  • (0/5)
  • 1.3k

“खामोशी के बाद”हाय…मैं रीना हूँ।आज जब मैं यह सब लिख रही हूँ, मेरी उम्र चालीस के पार है। बाहर ...

तुम हो साथ जो मेरे

by Juhi Upadhyay
  • 873

नमस्कार मेरा नाम जूही उपाध्याय है मैं मनोविज्ञान व्याख्याता हूंँ।अपनी कुछ बातों को आप सबके सामने रखना आई हूंँ।मेरे ...

प्रमाणपत्र

by Rinki Singh
  • (4.9/5)
  • 1.1k

ऑनलाइन कवि सम्मेलन की तैयारी में नीलिमा पुरानी अलमारी खंगाल रही थी |विषय था- "अपनी पहली रचना"|सोच रही थी, ...