Pritpal Kaur की किताबें व् कहानियां मुफ्त पढ़ें

संताप

by Pritpal Kaur
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“आज उम्र के जिस पड़ाव पर बैठा हूँ, यहाँ आराम से बैठकर पीछे देखना सुविधाजनक लगने लगा है. पिछले ...

मुक्ति.

by Pritpal Kaur
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“तुम जिंदा क्यों हो? मर क्यों नहीं जाते? मर जाओ...” उसकी तरफ से यह सलाह अनायास नहीं आयी थी. कई ...

मर्दानी आँख

by Pritpal Kaur
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हलके गुलाबी रंग के कुरते में गहरे रंग की प्रिन्ट दार पाइपिंग से सजी किनारी वाली कुर्ती उसकी गोरी ...

बिग बैंग

by Pritpal Kaur
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फाइल पर आख़िरी टिप्पणी कर के अपने हस्ताक्षर चिपकाये, झटके से फाइल बंद की और अपनी झुकी हुयी गर्दन ...

पिछवाड़े का कब्रिस्तान

by Pritpal Kaur
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पूर्व प्रकाशित 'दैनिंक जागरण ' ७ मार्च २०१६ लोग कहते हैं कि कहानी लिखो तो वो अक्सर हकीकत में बदल ...

पगडंडी.

by Pritpal Kaur
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हंस में प्रकाशित स्कूटर की चाबी पकड़ाते समय उसकी अंगुलिओं के बढ़े हुए सुडोल नाखून उसकी हथेली पर छू गए ...

तीर-ए-नीमकश

by Pritpal Kaur
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वह बाथरूम से नहा कर बाहर निकली और बेडरूम में ही रुक गयी. खड़ी हो कर सोचने लगी की ...

टांगें

by Pritpal Kaur
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कनिका ने कांपते हुए अपने घुटने ढके और वेटर का बेसब्री से इंतजार करने लगी. इस वक़्त वह साउथ ...

चैन

by Pritpal Kaur
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ऐसी ही एक अंजान सी बुझी बुझी सी शाम को वह अपने घर से निकल कर बाहर सड़क पर ...

चाट

by Pritpal Kaur
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बात सीधी सी थी, लेकिन उसकी गंध बेहद तीखी थी. तभी तो जया की ही नहीं पूरे मोहल्ले की ...