Dikshant Nagpure की किताबें व् कहानियां मुफ्त पढ़ें

अंकित: द घोस्ट हंटर

by Dikshant Nagpure
  • (4/5)
  • 987

एपिसोड 1: हड्डी चुराने वाला ज़ॉम्बीभाग 1 — कब्रिस्तान में सन्नाटा नहीं थारात के दो बज रहे थे। शहर ...

अंधकार का जन्म

by Dikshant Nagpure
  • 1.1k

मैंने दरवाज़ा खटखटाया, और अंदर से मेरी ही आवाज़ ने कहा—'आ जाओ, मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था।'फोन की ...

धोबी

by Dikshant Nagpure
  • 1.6k

गंगाराम गाँव का धोबी था।सुबह उठता। कपड़े इकट्ठा करता। नदी किनारे ले जाता। पत्थर पर पटकता। साबुन लगाता। धूप ...

वो ठेला वाला जिसकी चाय पीके कोई वापस घर नहीं पहुंचा

by Dikshant Nagpure
  • (5/5)
  • 1.5k

गाँव के चौराहे पर ठेला लगाता था भैरू। छोटा सा ठेला था। चाय की केतली। पान की दुकान। कुछ ...

कब्र नंबर 13

by Dikshant Nagpure
  • (5/5)
  • 1.6k

मेरे गाँव में सबसे पुरानी चीज़ मंदिर नहीं है। मेरे दादा जी नहीं हैं। ये पीपल का पेड़ नहीं ...

वो कमरा

by Dikshant Nagpure
  • 1.4k

तीन महीने पहले की बात है।हम लोग नए शहर में आए थे। पापा की नौकरी ट्रांसफर हुई थी। माँ, ...