(भाग 1)उसने कभी ऊँची आवाज़ में कुछ नहीं कहा।न शिकायत… न इल्ज़ाम… न मोहब्बत का इज़हार।बस…चुपचाप सब सहती रही।और ...
भाग 1बारिश उस रात कुछ ज़्यादा ही बेरहम थी।आसमान से गिरती हर बूँद जैसे किसी गुनाह की गवाही दे ...
हवा आज कुछ ज़्यादा ही ठहरी हुई थी।जैसे उसे भी मालूम हो कि दो दिलों के बीच कुछ ऐसा ...
रात बहुत शांत थी…इतनी शांत कि सांसों की आवाज़ भी शोर लग रही थी।हवेली की तीसरी मंज़िल पर एक ...
ये अहसास प्यार का हैबांस के ऊँचे पेड़ों के बीच से छनकर आती धूप, जैसे किसी ने सोने की ...
पहली नज़र का प्यारधुंध से ढका वह शहर किसी पुराने ख्वाब जैसा लगता था।ऊँचे-ऊँचे पत्थर के महल, जिनकी मीनारें ...
भाग -1:शादी की उस रात, जब हर तरफ रौशनी थी, तब भी आयरा को लगा जैसे वो किसी अँधेरी ...
भाग 1बारिश उस रात कुछ ज़्यादा ही बेरहम थी।रेलवे स्टेशन की पुरानी छत से टपकती बूंदें ज़मीन पर गिरकर ...
भाग 1दुबई की शामें झूठी होती हैं।खूबसूरत, चमकदार… और भीतर से बेरहम।सूरज समुद्र में डूब रहा था। आसमान गुलाबी ...
एक साल की शादी, उम्र भर का फैसलासियोल की ऊँची ऊंची इमारतें हमेशा से ही ली जू-हान को छोटी ...